तरनतारन उप-चुनाव के लिए 19 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है।
पंजाब के तरनतारन में हो रहे उप-चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने का समय समाप्त हो गया है। 21 अक्टूबर शाम पांच बजे तक चुनाव आयोग के पास कुल 19 नामांकन पहुंचे हैं। कल, यानी बुधवार से नामों की स्क्रूटनी शुरू की जाएगी। जबकि 24 अक्टूबर को नोमिनेशन वापस ली
.
बता दें कि करीब 3 महीने पहले AAP विधायक कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद ये सीट खाली हुई थी। चार प्रमुख पार्टियों के अलावा इस बार मौजूदा सांसद व खालिस्तान समर्थक की पार्टी के उम्मीदवार मनदीप सिंह भी टक्कर में हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने हरमीत सिंह, अकाली दल ने पूर्व प्रिंसिपल सुखविंदर कौर, बीजेपी ने हरजीत सिंह और कांग्रेस ने करणबीर सिंह बुर्ज को ज्ञापन सौंपा है।
तरनतारन सीट का रुझान…
- इस सीट पर अब तक हुए 6 चुनाव: 1997 से लेकर 2022 तक इस सीट पर 6 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इतने समय में इस सीट पर ये पहला उपचुनाव है। ये चुनाव इसलिए भी इंट्रस्टिंग होने वाला है, क्योंकि बीते 2 लोकसभा चुनावों और दो विधानसभा चुनावों में लगातार वोटर अपना रुझान बदलते दिखे।
- 2017 तक इस सीट पर अकाली दल का कब्जा: 1997 में इस सीट पर अकाली दल ने जीत दर्ज की थी। लेकिन 2002 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर उतरे हरमीत सिंह संधू ने जीत हासिल की और अकाली दल में ही विलय किया। 2017 तक अकाली दल का इस सीट पर कब्जा रहा। तब अकाली दल 48 फीसदी वोट हासिल कर रहा था।
- अकाली दल का वोट प्रतिशत गिरा: 2017 में अकाली दल के डाउनफॉल के साथ ही तरनतारन सीट भी हाथ से निकल गई। अकाली दल का वोट परसेंट 34 फीसदी के करीब पहुंच गया। जबकि कांग्रेस जो तकरीबन 37 फीसदी वोट हासिल कर रही थी, वे 45 फीसदी तक पहुंच गई।
- 2022 में AAP ने 40% वोट हासिल किए: 2022 में आम आदमी पार्टी की हवा का असर यहां भी दिखा। AAP ने 40 फीसदी वोट हासिल कर जीत दर्ज की। बीते चुनावों में जीत दर्ज करने वाली अकाली दल व कांग्रेस दोनों का वोट प्रतिशत नीचे गिरा।
भाजपा व कांग्रेस उम्मीदवारों पर मामले दर्ज
भाजपा उम्मीदवार हरजीत सिंह संधू के खिलाफ दो आपराधिक मामले भी लंबित हैं, हालांकि किसी में भी दोष सिद्ध नहीं हुआ है। पहला मामला FIR नंबर 70/2023, थाना सुल्तानविंड (अमृतसर) में दर्ज है, जिसमें धाराएं 341, 323, 506, 34 IPC लगाई गई हैं। आरोप- गलत तरीके से रोकना, चोट पहुंचाना और धमकाना है।
दूसरा मामला 2015 से न्यायालय एसडीजेएम बाबा बकाला साहिब में विचाराधीन है, जिसकी धाराएं 326, 323, 324, 341, 148, 149 IPC हैं। आरोप गंभीर चोट पहुंचाना और गलत तरीके से रोकना शामिल है।
वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार करणबीर सिंह बुर्ज का एक मामला चंडीगढ़ में विचाराधीन है। करणबीर को निचली अदालत ने दोषी ठहराए था। उसमें आपराधिक अपील दायर की है, जो अभी भी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित है। यह मामला आईपीसी की धाराओं 332, 353, 308 एवं 34 के तहत है, जिसमें सजा के तौर पर विभिन्न अवधि की कठोर सजा और जुर्माना लगाना शामिल है।
जानें प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवारों को-





