जितेन्द्र कुमार | चित्रकूट1 मिनट पहले
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लाठियों के साथ दिवारी नृत्य करते यदुवंशी।
चित्रकूट में दीपावली मेले के दूसरे दिन बुंदेलखंड के यदुवंशी समुदाय द्वारा दिवारी नृत्य का प्रदर्शन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के उपासक यह कलाकार ढोलक की थाप पर लाठियों से अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
यह नृत्य इतना सटीक होता है कि लाठियों का वार अचूक प्रतीत होता है। कलाकार एक महीने पहले से मौन धारण करते हैं और मंदाकिनी नदी में स्नान के बाद अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यह सदियों पुरानी परंपरा है।
मेले के दूसरे दिन लगभग 500 से अधिक टोलियां चित्रकूट पहुंचीं। प्रत्येक टोली के कलाकार एक हाथ में मोर पंख और दूसरे हाथ में लाठियां लिए ढोलक की थाप पर जमकर नृत्य करते हैं, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
चित्रकूट में कामदगिरि महा आरती परिषद, भरत विलाप मंदिर और रामसरिया भरतकूप सहित कई स्थानों पर संत-महंत भी दिवारी नृत्य में शामिल होते हैं। उनकी लाठियों की खटखटाहट अचूक वार का आभास कराती है।
कामदगिरि महा आरती के महंत विपिन विराट महाराज ने बताया कि अब तक कामदगिरि महा आरती प्रांगण में 250 से अधिक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया है, जिसके बाद कामदगिरि की परिक्रमा शुरू हो गई है।
