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जोधपुर में DGGI की रेड: ट्रांसपोर्टर के ठिकानों पर छापेमारी: बोगस बिलिंग से करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी, 4 घर व 1 ऑफिस पर देर रात तक जांच – Jodhpur News

जोधपुर में DGGI की रेड: ट्रांसपोर्टर के ठिकानों पर छापेमारी:  बोगस बिलिंग से करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी, 4 घर व 1 ऑफिस पर देर रात तक जांच – Jodhpur News

जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (DGGI) की टीम ने शुक्रवार को जोधपुर के एक नामी ट्रांसपोर्टर के ठिकानों पर छापेमारी की। ट्रांसपोर्टर के बंगलों, ऑफिस व गोदाम पर एक साथ छापेमारी की गई। आरोप है कि यह ट्रांसपोर्टर समूह लंबे समय से बोगस बिलिंग और बिल्टी के ज

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इन्हीं बोगस बिलिंग से कई बड़े व्यापारियों द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) उठाया गया था। मामले में बड़ी राशि के फर्जीवाड़े की आशंका के चलते डीजीजीआई ने जोधपुर और देश के कई अन्य शहरों में कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की, जो देर रात तक चलती रही।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए जीएसटी चोरी विभागीय सूत्रों के अनुसार- बासनी सेकंड फेज स्थित रीतू रोडलाइंस के खिलाफ DGGI को सूचना मिली थी कि फर्म फर्जी दस्तावेजों के जरिए जीएसटी चोरी के लिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने में शामिल है। इसी के माध्यम से आईटीसी बेनीफिट लिया जा रहा है।

जीएसटी इंटेलिजेंस की टीमें जांच में जुटी तो प्रारंभिक स्तर पर ही ट्रांसपोर्टर विष्णु गोयल और उनकी फर्म से कई संदिग्ध बिलिंग गतिविधियों के साक्ष्य मिले।

40-50 अधिकारियों की टीमों ने एक साथ की कार्रवा तथ्य जुटाने के बाद जयपुर से जोधपुर पहुंचे करीब 40-50 अधिकारियों की अलग-अलग टीमों ने शुक्रवार सुबह समूह के मालिकों पर कार्रवाई शुरू की। पाली रोड कृष्णा नगर में गोयल परिवार के चार भाइयों के बंगलों और बासनी सेकंड फेज स्थित ऑफिस व गोदाम पर एक साथ छापेमारी की गई।

टीम ने घरों, दफ्तरों और प्रतिष्ठान में मौजूद दस्तावेजों, फाइलों और कंप्यूटर डेटा की जांच की। शुरुआती छानबीन में विभाग को बड़ी मात्रा में फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी अनियमितता के सबूत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, फर्म ने विभिन्न राज्यों में ट्रक बिल्टी और इनवॉयस दिखाकर वास्तविक जीएसटी इनवॉयस के नाम पर करोड़ों रुपए का टैक्स इनपुट लिया जा रहा था।

डिजिटल रिकॉर्ड और खाते जब्त किए DGGI की टीम अन्य विभागों से आवश्यक सहयोग लेकर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटी है। देर रात तक फर्म से संबंधित कई स्थानों से डिजिटल रिकॉर्ड और खाते जब्त किए गए। सूत्रों ने बताया कि जांच में अगर लेन-देन की रकम का पैमाना बड़ा निकला तो आने वाले दिनों में जीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हो सकता है।

विभागीय सूत्रों ने मामले में प्रारंभिक छानबीन में टैक्स चोरी का आंकड़ा बढ़ने की स्थिति में फर्म के मालिक की गिरफ्तारी या करोड़ों की टैक्स रिकवरी की कार्रवाई तय मानी जा रही है। साथ ही प्रारंभिक जांच के साथ ही दस्तावेजों की छानबीन पूरी करने के लिए डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच भी की जा सकती है। इसके बाद ही विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।



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