रेगिस्तान की तपती रेत पर आज भारतीय सेना की शक्ति गरज उठी। जैसलमेर में फैले विशाल मरुस्थल में सेना ने अपने ‘संयुक्त हथियार अभियान’ यानी Combined Arms Operation का शानदार प्रदर्शन किया। आसमान में उड़ते हेलिकॉप्टर और ज़मीन पर दौड़ते टैंक एक साथ दिखे -जै
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दरअसल भारत की तीनों सेनाएं इन दिनों पश्चिमी सीमा पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे बड़ा युद्धाभ्यास कर रही है-त्रिशूल। 30 हजार सैनिक इस अभ्यास में अपना दमखम दिखा रहे हैं और दुनिया को मैसेज दे रहे हैं कि- हम किसी से कम नहीं।
रेगिस्तान में उड़ते हेलिकॉप्टर
“यह हैं भारतीय सेना की थार रैप्टर ब्रिगेड के हेलिकॉप्टर — जो आज दक्षिणी कमान के बड़े अभ्यास ‘मरु ज्वाला’ और ‘अखंड प्रहार’ का हिस्सा हैं।यह अभ्यास ‘एक्सरसाइज त्रिशूल’ के तहत चल रहा है, जिसमें तीनों सेनाएं — थल सेना, वायु सेना और नौसेना — एक साथ काम कर रही हैं।”
“यह सीन बताता है कि भारतीय सेना अब भविष्य के युद्ध के लिए खुद को कैसे तैयार कर रही है — जहाँ हवा, ज़मीन और तकनीक एक साथ काम करेंगी।”
सेना के जांबाजों ने हेलिबोर्न ऑपरेशन का अभ्यास किया।
हेलिकॉप्टर मिशन की शुरुआत- ‘हेलिबोर्न ऑपरेशन’
हेलिकॉप्टर नीचे उतर रहा है, और रस्सियों के सहारे सैनिक नीचे आ रहे हैं। यह है ‘हेलिबोर्न ऑपरेशन’। इसमें जवानों को दुश्मन के इलाके के पीछे उतारा जाता है ताकि वे अचानक हमला कर सकें। सैनिक जैसे ही ज़मीन पर उतरते हैं, वे तुरंत अपनी पोजिशन लेकर आगे बढ़ते हैं। ऊपर से हेलिकॉप्टर उन्हें कवर दे रहा है।”
“इस मिशन में सबसे अहम भूमिका निभाई सेना के इन भरोसेमंद हेलिकॉप्टरों ने — ध्रुव, रुद्र, चेतक और चीता।”
भारतीय थल सेना के प्रमुख हेलिकॉप्टर और उनकी ताकत
HAL ध्रुव (Advanced Light Helicopter – ALH Mk III)
“ध्रुव — नाम की तरह ऊंचाइयों को छूता हुआ। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाया गया यह उन्नत हल्का हेलिकॉप्टर भारतीय सेना की रीढ़ माना जाता है। यह एक मल्टी-रोल मशीन है — यानी एक ही हेलिकॉप्टर कई काम कर सकता है।”
मुख्य खूबियां:
- 12 से 14 सैनिकों को ले जा सकता है।
- 1500 किलो तक वजन उठाने की क्षमता।
- दो शक्तिशाली ‘शक्ति’ टर्बोशाफ्ट इंजन लगे हैं, जिससे यह ऊँचाई वाले इलाकों में भी उड़ सकता है।
- इसमें ग्लास कॉकपिट, डिजिटल मैप और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम लगा है।
- रफ्तार लगभग 250 किमी/घंटा और रेंज करीब 630 किमी है।

“ध्रुव का इस्तेमाल सैनिकों को तेजी से तैनात करने, निगरानी करने और बचाव अभियान चलाने में किया जाता है। यह सेना के हर अभ्यास की ‘बैकबोन’ है।”
HAL रुद्र (ALH Mk IV – हथियारबंद)
“यह वही ‘रुद्र’ है — जो नाम के मुताबिक दुश्मनों पर बिजली की तरह टूट पड़ता है।यह ‘ध्रुव’ हेलिकॉप्टर का हथियारबंद (आर्म्ड) संस्करण है। इसमें मिसाइलें, रॉकेट और 20 मिमी की गन लगी होती हैं।”
मुख्य खूबियां:
- हवा से सतह और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें।
- रॉकेट पॉड और 20 मिमी बुर्ज गन लगी होती है।
- इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिफेंस सिस्टम और टारगेटिंग सेंसर हैं।
- यह ‘क्लोज एयर सपोर्ट’ यानी जमीनी सैनिकों को हवाई कवर देने में माहिर है।

“अभ्यास में रुद्र हेलिकॉप्टर ने टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को आगे बढ़ने के दौरान सुरक्षा दी। यह आधुनिक युद्ध का वह चेहरा है, जहाँ हवा से ज़मीन को सीधा सहयोग मिलता है।”
HAL चेतक (Chetak)
“यह है ‘चेतक’ — सेना का पुराना लेकिन भरोसेमंद साथी।यह फ्रेंच ‘अलोएट-III’ का भारतीय संस्करण है।भले ही यह दो टन वजन का हेलिकॉप्टर हो, लेकिन काम बड़े-बड़े करता है।”
मुख्य खूबियां:
- दो पायलट और पांच से छह यात्री ले जा सकता है।
- हताहतों को निकालने, खोज और बचाव (SAR) और प्रशिक्षण में उपयोगी।
- 6,500 मीटर तक उड़ान भर सकता है।
- रखरखाव में आसान और भरोसेमंद।

“अभ्यास में चेतक का इस्तेमाल संचार और लाइट ट्रांसपोर्ट मिशनों के लिए किया गया।”
HAL चीता (Cheetah)
“चीता — हल्का, फुर्तीला और बहादुर।यह फ्रेंच ‘SA 315B Lama’ का भारत में बना संस्करण है, जिसे HAL ने तैयार किया।चीता ऊँचाई वाले इलाकों की लाइफलाइन है — चाहे सियाचिन ग्लेशियर हो या लद्दाख की पहाड़ियाँ।”
मुख्य खूबियां:
- चालक दल के अलावा चार सैनिक ले जा सकता है।
- 1135 किलो तक वजन (स्लिंग लोड) उठा सकता है।
- अधिकतम रफ्तार 120 किमी/घंटा।
- ऊँचाई और ठंडे इलाकों में संचालन के लिए मशहूर।

“अभ्यास के दौरान चीता हेलिकॉप्टरों ने निगरानी और टोही मिशन में भाग लिया — यानी दुश्मन की हर हलचल पर नज़र रखी।”
जमीनी सेना की प्रगति
टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां रफ्तार पकड़ चुकी हैं। ‘सुदर्शन चक्र’ और ‘कोणार्क कोर’ की यूनिट्स तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऊपर से हेलिकॉप्टर उन्हें कवरेज दे रहे हैं। रेगिस्तान में यह ‘हवा और ज़मीन’ का तालमेल असली जंग जैसा माहौल बना रहा है।”
“हर कदम फाइनल प्लान का हिस्सा है — यानी कौन-सा टैंक कहाँ जाएगा, हेलिकॉप्टर किस ऊँचाई पर रहेगा, और कब सैनिकों को उतरना है। सब कुछ घड़ी की सुई की तरह तय समय पर हो रहा है।”
टेक्नोलॉजी और जॉइंट ऑपरेशन
“कमांड पोस्ट से हर यूनिट पर नज़र रखी जा रही है। ड्रोन और सैटेलाइट से आई रीयल-टाइम तस्वीरें स्क्रीन पर हैं। यह सिर्फ़ अभ्यास नहीं, बल्कि तकनीकी तैयारी का इम्तिहान है — जहाँ एक गलती की गुंजाइश नहीं।”
“सेना का कहना है कि यह अभ्यास भविष्य के युद्ध के लिए बेहद अहम है, क्योंकि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ बंदूकों से नहीं, बल्कि नेटवर्क, सेंसर और सटीक समन्वय से लड़े जाएंगे।”
समापन और संदेश- सैनिक और हेलिकॉप्टर लौटते हुए
“सूरज डूब रहा है, लेकिन इस मरुस्थल की रेत पर सेना का जोश अब भी गर्म है। जैसलमेर में जो दृश्य दिखा, उसने साबित कर दिया कि भारतीय सेना सिर्फ़ युद्ध के लिए नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में तैयार रहने के लिए अभ्यास करती है।”
“यह तालमेल, यह तकनीक, और यह जोश — तीनों मिलकर आने वाले वक्त में भारत की रक्षा को और मजबूत करेंगे।”

पश्चिमी सीमा पर 10 नवंबर तक चलेगा त्रिशूल अभ्यास।
