धौलपुर के सैंपऊ कस्बे में नगर पालिका की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बाजार क्षेत्र और बाड़ी मार्ग पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सफाईकर्मी कई दिनों से कचरा उठाने नहीं आ रहे हैं, जिससे हवा के साथ कचरा उड़कर घरों तक पहुंच रहा है और लोगों को परेशानी हो रही है। नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन पर सफाई व्यवस्था की उपेक्षा का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब यह ग्राम पंचायत थी, तब लगभग 20 सफाईकर्मी पूरे कस्बे की सफाई कर लेते थे। अब नगर पालिका बनने के बाद 75 से अधिक सफाईकर्मी होने के बावजूद स्थिति और खराब हो गई है। बाजारों और गलियों में कचरे के ढेरों के साथ पशुओं का गोबर भी फैला हुआ है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका केवल कागजों में सफाई कार्य दिखा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उनका यह भी कहना है कि सफाईकर्मियों की संख्या कागजों में अधिक दिखाकर फर्जी भुगतान किया जा रहा है। जिस फर्म को सफाई व्यवस्था का टेंडर मिला है, उसने भी अपनी जिम्मेदारी सीधे नगर पालिका प्रशासन को सौंप दी है, जिससे निगरानी और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। सफाईकर्मियों ने भी अपने भुगतान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें प्रतिदिन लगभग 105 रुपए का भुगतान किया जा रहा है, जबकि न्यूनतम मजदूरी 285 रुपए प्रतिदिन निर्धारित है। इस गणना के अनुसार उन्हें महीने में लगभग 7500 रुपए मिलने चाहिए, लेकिन पिछले महीने केवल 3200 रुपए ही दिए गए। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार, अधिशासी अधिकारी और अकाउंटेंट की मिलीभगत से भुगतान में अनियमितता की जा रही है। सफाईकर्मियों ने यह भी बताया कि उनसे कोरे कागजों पर अंगूठे और हस्ताक्षर करवाए जाते हैं, और उन्हें वास्तविक भुगतान की जानकारी नहीं दी जाती। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच करने, सफाई व्यवस्था में सुधार लाने और सफाईकर्मियों को उचित भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है।
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