खैरथल-तिजारा जिले के मुंडावर की नसीरों की ढ़ाणी के प्राथमिक स्कूल में एक भी बच्चे का नामांकन नहीं है। स्कूल में रोजाना एक टीचर आते है, प्रशासनिक काम करते हैं और वापस लौट जाते है। 1997 में खोला गया स्कूल शिक्षक रणधीर चौधरी ने बताया- यह स्कूल दो बीघा में बना हुआ है। वर्ष 1997 में स्कूल खोला गया था। यहां पहले दो टीचर थे। एक टीचर का ट्रांसफर होने पर मैं 2001 में यहां आया। मेरे साथ पढ़ाने वाले एक टीचर का प्रमोशन हो गया और 2018 में वो भी चले गए। मुझे बीएलओ का काम भी दे रखा है। 2018 के बाद यहां नामांकन धीरे-धीरे गिरता चला गया। पिछले साल भी नामांकन केवल दो बच्चों का था। इस बीच मेरी SIR और जनगणना में ड्यूटी लग गई, जिसके बाद दोनों टीसी कटवाकर चले गए। मैंने गांव में घर-घर जाकर बहुत कोशिश की, लेकिन गांव वाले कहते हैं कि आप अकेले बच्चों का कितना पढ़ाओगे। वर्तमान में स्कूल में कोई छात्र नामांकित नहीं है। कम जनसंख्या और बढ़ते निजी स्कूलों के कारण नहीं हो रहे एडमिशन ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्कूल में नामांकन नहीं हो रहा है, तो शिक्षा विभाग को इसकी समीक्षा कर उचित निर्णय लेना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि आसपास के क्षेत्रों में जनसंख्या कम होने और निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या के कारण सरकारी विद्यालय में बच्चे नहीं आ रहे हैं।
Source link
