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सीवान में मतदान करते वोटिंग कम्पार्टमेंट का वीडियो वायरल: चुनाव आयोग-पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल, निगरानी के दावे खोखले – Siwan News

सीवान में मतदान करते वोटिंग कम्पार्टमेंट का वीडियो वायरल:  चुनाव आयोग-पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल, निगरानी के दावे खोखले – Siwan News

चुनाव आयोग के तमाम निर्देश और प्रशासन की सख्ती के दावे के बावजूद सीवान में प्रथम चरण के तहत हुए मतदान के दौरान नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।

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आयोग ने इस बार मतदान केंद्रों के भीतर मोबाइल फोन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ मोबाइल रखने के लिए अलग से कर्मियों और मोबाइल होल्डर की व्यवस्था की थी। लेकिन हकीकत में यह व्यवस्था पूरी तरह नाकाम साबित हुई।

6 नवंबर को सीवान शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कई मतदाताओं ने मतदान के दौरान न केवल मोबाइल साथ ले गए, बल्कि खुलेआम वोटिंग कम्पार्टमेंट में वीडियो बनाते हुए मतदान करते नजर आए।

वोट डालते हुए वीडियो को सोशल मीडिया पर किया वायरल

इतना ही नहीं, कुछ युवाओं ने अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पक्ष में वोट डालते हुए वीडियो पर पार्टी विशेष के गाने भी जोड़कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल कर दिया।

इन वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मतदाता किस उम्मीदवार को वोट दे रहे हैं। जो न केवल चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि गोपनीय मतदान की भावना पर भी सीधा प्रहार है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बल तैनात थे, तब किसी ने मोबाइल अंदर ले जाने से क्यों नहीं रोका?

मतदान केंद्रों पर तैनात कर्मियों की भूमिका पर सवाल

मतदान केंद्रों पर तैनात कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। चुनाव आयोग ने हर बूथ पर सीसीटीवी कैमरा और निगरानी के लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने का दावा किया था, लेकिन इन वीडियो का बाहर आना बताता है कि निगरानी केवल कागजों तक सीमित रही।

अब तक इन मामलों में न तो जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई हुई है, न ही ऐसे वीडियो साझा करने वालों पर किसी प्रकार की चेतावनी जारी की गई है।

लोग बोले, प्रशासन की निगरानी व्यवस्था महज़ दिखावा

इससे मतदाताओं के बीच यह संदेश गया है कि प्रशासन की निगरानी व्यवस्था महज़ दिखावा बनकर रह गई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मतदान जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में मोबाइल का प्रयोग बिना रोक-टोक संभव है, तो निष्पक्षता और गोपनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

अब देखना यह है कि चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन इन गंभीर लापरवाहियों पर कब तक चुप रहते हैं या कोई ठोस कार्रवाई करते हैं।



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