झारखंड हाईकोर्ट में 31 जनवरी 2025 से पहले जिन 61 सिविल मामलों में फैसला सुरक्षित रखा गया था, उनमें से 47 मामलों में अभी तक जजमेंट जारी नहीं हुआ है।
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट में लंबित पड़े ऐसे रिजर्व जजमेंट पर कड़ा रुख अपनाया है। मामले लंबित पड़े हैं, इसका खुलासा झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दायर किए गए हलफनामे में हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने हलफनामे को देखते हुए टिप्पणी की कि हाईकोर्ट की स्थिति न्यायिक विवेक को झकझोरने वाली है। यह बताती है कि फैसलों का लंबित रहना गंभीर समस्या बनती जा रही है।
मिवान स्टील्स लिमिटेड बनाम भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, डायरी नंबर 48094/2025 याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष कोर्ट ने यह टिप्पणी की है।
पूर्व की सुनवाई के साथ जोड़ा जाएगा मामला
सुनवाई के दौरान बेंच कहा कि लंबित पड़े मामलों को लेकर सुनवाई पहले से ही जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच में है। इसलिए इसे भी उसी के साथ सुनवाई के लिए जोड़ा जाएगा।
अदालत ने निर्देश दिया कि 14 नवंबर 2025 को प्रस्तावित W.P.(C) No.489/2025 के साथ इस मामले को सूचीबद्ध किया जाए और इसके लिए रजिस्ट्री को सीजेआई की अनुमति लेनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी जता चुका है असंतोष
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी झारखंड हाईकोर्ट में लंबित जजमेंट को लेकर चिंता जता चुका है। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच वर्तमान में होमगार्ड भर्ती से जुड़ी छह याचिकाओं की सुनवाई कर रही है, जिनमें जजमेंट पिछले दो साल से लंबित थे।
8 अगस्त की सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा था कि इन मामलों में आदेश जारी कर दिए गए हैं, लेकिन बाद में सील कवर रिपोर्ट में पता चला कि 61 अन्य मामलों में फैसले अब भी रुके हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उस दौरान हाईकोर्ट के जजों को सलाह दी थी कि वे अत्यधिक कानूनी विश्लेषण में उलझने के बजाय जल्द से जल्द तर्कसंगत आदेश जारी करें। अदालत ने यहां तक सुझाव दिया था कि यदि आवश्यक हो तो जज छुट्टी लेकर भी लंबित फैसले निपटाएं, ताकि न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
47 में से 46 जजमेंट एक ही जज के पास लंबित
नए हलफनामे में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि लंबित 47 मामलों में से 46 जजमेंट सिर्फ एक ही जज के पास अटके हुए हैं। केवल एक मामला किसी अन्य जज के पास लंबित बताया गया है।
इन मामलों में प्रमुख याचिका मिवान स्टील्स लिमिटेड बनाम भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, डायरी नंबर 48094/2025 है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, मिषा रोहतगी, नकुल मोहता और आदित्य धिंगरा ने पक्ष रखा।
