प्रदेश की पहली एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक से बनी सीहोर-श्यामपुर सड़क अपनी 10 साल की गारंटी के बावजूद पहले ही साल में उखड़ गई है। 30 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस सड़क की बदहाली पर भोपाल-सीहोर लोकसभा सांसद आलोक शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्
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सांसद आलोक शर्मा ने जर्जर सड़क के संबंध में मिली शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सख्त लहजे में कहा कि एफडीआर तकनीक से बनी इस सड़क को लेकर कई शिकायतें आई हैं। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी ने भी सड़क का निर्माण किया है, यदि सड़क तय समय-सीमा से पहले उखड़ गई है, तो उसे दोबारा निर्माण कराने के आदेश दिए जाएंगे।
‘अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी’ सांसद ने स्पष्ट किया कि किसी भी कार्य में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि गलत काम किया गया है, तो कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत से बनी यह 24 किलोमीटर लंबी सड़क 2023 में पूरी हुई थी। तब दावा किया गया था कि यह सड़क कम लागत में दोगुनी मजबूत होगी और इसकी मजबूती की 10 साल की गारंटी थी।
पहली बारिश में ही गड्ढों में तब्दील हालांकि, यह सड़क पहले ही साल की बारिश में जगह-जगह दरारों और गड्ढों में तब्दील हो गई, जिससे अब इस सड़क से आवागमन मुश्किल हो रहा है। सीहोर से श्यामपुर तक की यह सड़क जयपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे से जुड़ती है। यह कुरावर, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, गुना-ग्वालियर और राजस्थान जाने वाले यात्रियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सैकड़ों गांवों के लोग परेशान सड़क के खस्ताहाल होने से सैकड़ों गांवों के लोगों, किसानों और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एमपीआरडीसी की जीएम सोनल सिन्हा ने पहले आश्वासन दिया था कि बारिश खत्म होने के बाद सड़क का डामरीकरण किया जाएगा। लेकिन यह आश्वासन बेअसर साबित हुआ है। सड़क पर आए गड्ढों को पेंचवर्क करके काम चलाया जा रहा है, जिससे यह सड़क प्रतिदिन हादसों का कारण बन रही है।
