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विजय सिन्हा की सीट फंसी, सम्राट चौधरी को कड़ी टक्कर: लेसी सिंह, नितिन नवीन आगे, नीतीश सरकार के 28 मंत्रियों की सीटों का हाल – Bihar News

विजय सिन्हा की सीट फंसी, सम्राट चौधरी को कड़ी टक्कर:  लेसी सिंह, नितिन नवीन आगे, नीतीश सरकार के 28 मंत्रियों की सीटों का हाल – Bihar News


बिहार में विधानसभा चुनाव के दोनों फेज की वोटिंग खत्म हो गई। इस बार नीतीश सरकार के 36 मंत्रियों में से 28 चुनाव मैदान में हैं। इनमें BJP के 17 और JDU के 11 मंत्री हैं। 14 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे। बिहार को दोनों डिप्टी CM सम्राट चौधरी और विजय कुम

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धमदाहा से लेसी सिंह और बांकीपुर से चुनाव लड़ रहे नितिन नवीन समेत बाकी मंत्री फिलहाल आगे नजर आ रहे हैं। चैनपुर से जमा खान की सीट भी फंसी दिख रही है।

बिहार चुनाव में दैनिक भास्कर के 400 से ज्यादा रिपोर्टर ग्राउंड पर मौजूद रहे। ग्राउंड से मिले इनपुट को लेकर हमने 5 सीनियर जर्नलिस्ट, 4 पॉलिटिकल एक्सपर्ट और 2 सेफोलॉजिस्ट से डिस्कशन किया। इसके अलावा पॉलिटिकल पार्टियों के इंटरनल सर्वे से मिले इनपुट के आधार पर रिपोर्टर्स पोल तैयार किया गया है। चुनाव में क्या है मंत्रियों की स्थिति, इस पोल में पढ़िए…

तारापुर में सम्राट चौधरी के सामने अरुण कुमार साह की चुनौती

बिहार के डिप्टी CM और BJP नेता सम्राट चौधरी मुंगेर जिले की तारापुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने RJD के अरुण कुमार साह हैं। तारापुर की राजनीति में OBC, विशेषकर कुशवाहा (कोइरी) समुदाय का दबदबा है। सम्राट चौधरी भी इसी जाति से आते हैं। अरुण कुमार उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

वजह: तारापुर सीट पर 6 बार सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी विधायक रहे हैं। सम्राट चौधरी को ‘गांव का लड़का’ होने का फायदा मिल रहा है। कुशवाहा, वैश्य, सवर्ण और बिंद समाज में पैठ है। ये NDA का वोट बैंक हैं। हालांकि सम्राट की ‘रफ लैंग्वेज’ को लेकर वोटर्स में नाराजगी है। उसके उलट RJD के अरुण कुमार की छवि सभ्य व्यक्ति का रही है। मुस्लिम और यादव वोट बैंक उनके साथ है।

लखीसराय में विजय कुमार सिन्हा की लड़ाई आसान नहीं

डिप्टी CM विजय कुमार सिन्हा लखीसराय से चुनाव लड़ रहे हैं। मुकाबला कांग्रेस के अमरेश कुमार अनीस से है। शुरुआत में विजय कुमार सिन्हा आगे दिखाई दे रहे थे। फिलहाल दोनों कैंडिडेट में कड़ी टक्कर दिख रही है।

वजह: विजय कुमार सिन्हा का प्लस पॉइंट है कि वे RSS बैकग्राउंड से हैं। उनका जमीन पर स्ट्रॉन्ग होल्ड माना जाता है। लखीसराय BJP का गढ़ रही है। विजय सिन्हा 2010 से लगातार जीत रहे हैं। उनके बयान ‘NDA की सरकार आ रही है। इन गुंडों की छाती पर बुलडोजर चलेगा’ के बाद समीकरण बदले हैं।

कांग्रेस कैंडिडेट अमरेश कुमार से 2020 में भी उन्हें कड़ी टक्कर मिली थी। अमरेश हारने के बाद भी एक्टिव रहे। महागठबंधन खासकर RJD का कोर वोट बैंक उनके पास है।

सीवान से मंगल पांडेय आगे

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय बाहुबली शहाबुद्दीन के गढ़ सीवान से चुनाव लड़ रहे हैं। ये सीट 2005 से 2020 तक BJP के पास रही। RJD ने यहां से सीनियर लीडर अवध बिहारी चौधरी को उतारा है। वे 6 बार विधायक रह चुके हैं और मौजूदा विधायक हैं। AIMIM ने मोहम्मद कैफ और जन सुराज ने इंतेखाफ अहमद को टिकट दिया है। फिलहाल यहां मंगल पांडेय आगे दिख रहे हैं।

वजह: मंगल पांडे BJP के सीनियर लीडर और सरकार में मंत्री हैं, इसका फायदा उन्हें मिल रहा है। सीवान सीट पर मुस्लिम वोटर करीब 25% हैं। इन्हें RJD का कोर वोट बैंक माना जाता है। AIMIM और जन सुराज ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। इससे RJD के वोट बंटेंगे।

कुढ़नी से केदार प्रसाद गुप्ता आगे

पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता मुजफ्फरपुर की कुढ़नी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट से वे 2015 का चुनाव और 2022 में उपचुनाव जीत चुके हैं। उनका मुकाबला RJD के सुनील कुमार सुमन से है। जनसुराज ने अफरोज आलम को उतारा है। केदार प्रसाद गुप्ता यहां से मजबूत नजर आ रहे हैं।

वजह: केदार प्रसाद गुप्ता का अपना वोट बैंक हैं। वैश्य और अति पिछड़ा वर्ग में मजबूत पकड़ है। मुखिया से मंत्री के पद तक पहुंचे है, इसलिए जमीनी राजनीति की समझ है। वहीं RJD के सुनील कुमार सुमन पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।

भोरे से शिक्षा मंत्री सुनील कुमार आगे

शिक्षा मंत्री और JDU नेता सुनील कुमार गोपालगंज की भोरे सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला CPI (ML) के धनंजय कुमार से है। जन सुराज ने यहां से प्रीति किन्नर को टिकट दिया है। 2020 में सुनील कुमार सिर्फ 462 वोट से जीत पाए थे। हालांकि, इस बार मजबूत लग रहे हैं।

वजह: सुनील कुमार पॉलिटिकल फैमिली से हैं, इस वजह से उनका प्रभाव है। भोरे में अनुसूचित जाति और ब्राह्मणों का 25% से ज्यादा वोट बैंक है। कुशवाहा वोटर की संख्या भी अच्छी-खासी है। ये सभी NDA के वोटर माने जाते हैं। वहीं भाकपा माले ने अपने उम्मीदवार जिनेंद्र पासवान की गिरफ्तारी के बाद आखिरी वक्त में धनंजय कुमार को चुनाव लड़ाया। वे जाने-पहचाने चेहरे नहीं हैं।

बेतिया से रेणु देवी आगे

पश्चिम चंपारण जिले की बेतिया से पशुपालन मंत्री रेणु देवी चुनाव लड़ रही हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के बसी अहमद, निर्दलीय रोहित शिकारिया और जन सुराज के अनिल कुमार सिंह से है। रेणु देवी फिलहाल आगे नजर आ रही हैं।

वजह: इस सीट पर ब्राह्मण, बनिया, भूमिहार और राजपूत वोटर हार-जीत तय करते हैं। ये NDA का वोट बैंक हैं। रेणु देवी डिप्टी CM और मंत्री रह चुकी हैं। संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ है। निर्दलीय कैंडिडेट रोहित शिकारिया दूसरे नंबर पर दिख रहे हैं।

गया टाउन से प्रेम कुमार आगे

गया टाउन सीट से BJP कैंडिडेट प्रेम कुमार नौंवी बार चुनाव में हैं। 8 बार से लगातार विधायक हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के मोहन श्रीवास्तव और जनसुराज के धीरेंद्र अग्रवाल से है। फिलहाल प्रेम कुमार बढ़त बनाते दिख रहे हैं।

वजह: प्रेम कुमार के लिए एंटी इनकम्बेसी कम है। वे कहार कम्युनिटी से हैं, जिसका वोट उन्हें मिलता है। BJP का कोर वोट भी मिलता है। कांग्रेस कैंडिडेट मोहन श्रीवास्तव दूसरे नंबर पर हैं। हालांकि, वे चुनौती देते नजर नहीं आ रहे।

हरसिद्धि में कृष्णनंदन पासवान आगे

पूर्वी चंपारण की हरसिद्धि सीट से लड़ रहे कृष्णनंदन पासवान गन्ना उद्योग मंत्री हैं। महागठबंधन से RJD के राजेंद्र कुमार राम और जन सुराज से अवधेश राम चुनाव में लड़ रहे हैं। कृष्णनंदन पासवान यहां आगे दिख रहे हैं।

वजह: कृष्णनंदन पासवान मौजूदा विधायक हैं। उनके खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी कम है। पूर्वी चंपारण NDA का गढ़ माना जाता है। दूसरे नंबर पर चल रहे RJD राजेंद्र कुमार राम 2015 में विधायक रह चुके हैं। तब लोग उनके काम से खुश नहीं थे। राजेंद्र कुमार राम अनुसूचित जाति से हैं। जन सुराज के अवधेश राम उनकी ही कम्युनिटी से हैं। इससे RJD को नुकसान होगा।

झंझारपुर से नीतीश मिश्रा आगे दिख रहे

मधुबनी के झंझारपुर से चुनाव लड़ रहे नीतीश मिश्रा झंझारपुर से चार बार विधायक रह चुके हैं। उनके पिता जगन्नाथ मिश्रा भी इसी सीट से 5 बार 1972 से 1990 तक जीते थे। नीतीश मिश्रा के सामने CPI के रामनारायण यादव हैं। फिलहाल नीतीश कुमार आगे दिख रहे हैं।

वजह: नीतीश कुमार के पिता जगन्नाथ मिश्रा बिहार के CM रहे हैं। उनका अपना वोट बैंक है। दूसरे नंबर पर नजर आ रहे राम नारायण यादव नीतीश मिश्रा से 41,788 वोट से हारे थे। इतने बड़े अंतर को खत्म करना उनके लिए मुश्किल होगा।

छातापुर से नीरज कुमार बब्लू आगे

सुपौल के छापापुर से नीरज कुमार बब्लू चुनाव लड़ रहे हैं। वे लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री हैं। लगातार तीन बार से जीत रहे हैं। उनका मुकाबला RJD के विपिन कुमार सिंह से है। इसमें नीरज कुमार आगे दिख रहे हैं।

वजह: नीरज कुमार ने पिछला चुनाव 20,635 वोट से जीता था। उनका अपना वोट बैंक है। सुरसर नदी से पीने का पानी के लिए प्लांट लगवाया है। नीतीश सरकार की बाकी योजनाओं का फायदा मिलता दिख रहा है। दूसरे नंबर पर पर विपिन कुमार सिंह हैं, लेकिन वे मुकाबले में नजर नहीं आ रहे हैं।

धमदाहा से लेसी सिंह आगे

धमदाहा सीट से चुनाव लड़ रहीं लेसी सिंह मंत्री खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री है। लगातार तीन बार से विधायक हैं। उनके सामने दो बार JDU की टिकट पर पूर्णिया से सांसद रह चुके संतोष कुशवाहा हैं। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने राकेश कुमार उर्फ बंटी यादव को उम्मीदवार बनाया है। फिलहाल लेसी सिंह आगे दिख रही हैं।

वजह: लेसी सिंह की इमेज अच्छी है। वे लगातार क्षेत्र में रहती हैं और इस मामले में बाकी नेताओं से आगे हैं। लेसी सिंह पिछला चुनाव 33,594 वोट से जीती थीं। वे राजपूत कम्युनिटी से आती हैं, लेकिन हर कम्युनिटी में पैठ है। उनका अपना वोट बैंक है। इस सीट पर 40% वोट कुशवाहा कम्युनिटी से हैं, जो NDA का वोट बैंक है। पूर्णिया एयरपोर्ट, सड़क बिजली जैसी योजनाओं का फायदा होगा।

अमरपुर सीट से जयंत राज आगे

बांका जिले की अमरपुर सीट पर JDU के जयंत राज के सामने कांग्रेस के जितेंद्र सिंह हैं। नीतीश सरकार में भवन निर्माण मंत्री जयंत राज अपने काम के दम पर वोट मांग रहे हैं, वहीं जितेंद्र सिंह बदलाव की बात कर रहे हैं। 2020 में जयंत राज ने जितेंद्र सिंह को सिर्फ 3,114 वोट से हराया था। इस बार भी जयंत राज का पलड़ा ही भारी दिख रहा है।

वजह: पिछली बार लोक जनशक्ति पार्टी से चुनाव लड़ने वाले मृणाल शेखर JDU के साथ हैं। उन्हें 40 हजार वोट मिले थे। इसका फायदा जयंत कुमार को मिलेगा। कांग्रेस के कैंडिडेट जितेंद्र सिंह जातीय समीकरण के लिहाज से कमजोर हैं। वे राजपूत हैं और ये कम्युनिटी NDA को वोट देती है।

चकाई से सुमित कुमार सिंह आगे

जमुई जिले की चकाई सीट से JDU के सुमित कुमार सिंह मैदान में हैं। वे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हैं। उनका मुकाबला RJD की सावित्री देवी से है। इस मुकाबले में जयंत सिंह आगे दिख रहे हैं।

वजह: सुमित कुमार पॉलिटिकल फैमिली से हैं। उनके पिता नरेंद्र सिंह और दादा श्रीकृष्ण सिंह बिहार में मंत्री थे। दो भाई भी विधायक रह चुके हैं। 2010 में झारखंड मुक्ति मोर्चा और 2020 में निर्दलीय चुनाव जीते थे। उनका अपना वोट बैंक है। इस बार NDA के वोट साथ हैं। सावित्री देवी के पास RJD का वोट बैंक है, लेकिन वे कमजोर नजर आ रही हैं।

फुलपरास से शीला कुमारी मंडल आगे

मधुबनी की फुलपरास सीट से चुनाव लड़ रहीं परिवहन मंत्री शीला मंडल दो बार से विधायक हैं। पिछला चुनाव 10,966 वोट से जीती थीं। उनका मुकाबला कांग्रेस के सुबोध मंडल से है। सुबोध मंडल मधुबनी के जिला अध्यक्ष हैं। अभी शीला मंडल आगे दिख रही हैं।

वजह: शीला मंडल पॉलिटिकल फैमिली से हैं। शीला मंडल के चचेरे ससुर धनिक लाल मंडल फुलपरास से विधायक, बिहार विधानसभा अध्यक्ष और केंद्र में गृह राज्य मंत्री और राज्यपाल रहे हैं। जेठ भूषण मंडल RJD के टिकट पर लौकहा से विधायक रह चुके हैं। शीला मंडल का अपना भी वोट बैंक है। इस सीट पर कांग्रेस कमजोर है। पार्टी 1995 से यहां नहीं जीत पाई है।

सुपौल से विजेंद्र प्रसाद यादव आगे

ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव 1990 से लगातार सुपौल सीट से चुनाव जीत रहे हैं। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के मिन्नतुल्लाह रहमानी से है। 2020 में भी इन्हीं दोनों में मुकाबला था। तब विजेंद्र प्रसाद यादव 28,099 वोट से जीते थे। इस बार भी वहीं आगे दिख रहे हैं।

वजह: सुपौल में अच्छी इमेज है। एंटी इनकम्बेंसी नहीं है। मिथिलांचल को जोड़ने के लिए फोरलेन रोड, रेल महासेतु, मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल बनाने का श्रेय जाता है। वहीं, कांग्रेस से मिन्नतुल्लाह रहमानी पहली पसंद नहीं थे। उन्हें आखिरी वक्त में उन्हें टिकट दिया गया।

चैनपुर में जमा खान की सीट मुश्किल में

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और JDU के इकलौते मुस्लिम विधायक जमा खान चैनपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला बहुजन समाज पार्टी के धीरज कुमार सिंह से है। दोनों में कड़ी टक्कर दिख रही है।

वजह: इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी का मजबूत कैडर है। 30% दलितों में बसपा की पैठ है। 2020 में जमा खान बसपा की टिकट पर ही जीते थे। महागठबंधन से भी यहां दो प्रत्याशी हैं। VIP के प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद ने महागठबंधन की तरफ से नामांकन दाखिल किया था। BJP के पूर्व विधायक बृज किशोर बिंद ने आखिरी वक्त में RJD जॉइन की और नामांकन कर दिया।

दरभंगा सीट से संजय सरावगी आगे

दरभंगा सीट से चुनाव लड़ रहे संजय सरावगी राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री हैं। 2020 में संजय सरावगी 10,639 वोट से जीते थे। इस बार उनका मुकाबला VIP के उमेश सहनी से हैं। द प्लूरल्स पार्टी की पुष्पम प्रिया चौधरी और जन सुराज से रिटायर्ड IPS आरके मिश्रा मैदान में हैं। इनमें संजय सरावगी आगे नजर आ रहे हैं।

वजह: दरभंगा सीट BJP का गढ़ है। पार्टी यहां 2009 से लगातार चार लोकसभा चुनाव जीती है। 2005 के बाद से संजय सरावगी विधायक हैं। 20% कायस्थ, 12% ब्राह्मण और 20% दलित वोट का गठजोड़ उन्हें मजबूत बनाता है। उनकी इमेज अच्छी है। इस सीट पर 76% वोटर शहरी हैं, जो NDA के वोटर माने जाते हैं।

जाले सीट से जीवेश कुमार आगे

नगर विकास एवं आवास मंत्री जीवेश कुमार जाले सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला ऋषि मिश्रा से हैं। ऋषि मिश्रा RJD से हैं, लेकिन कांग्रेस के सिंबल पर मैदान में हैं। 2020 में इस सीट से जीवेश कुमार 21,796 वोट से जीते थे। इस बार भी वही आगे दिख रहे हैं।

वजह: जीवेश कुमार लगातार दो बार से विधायक चुने जा रहे हैं। उनके खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी नहीं दिख रही है। वहीं ऋषि मिश्रा का कांग्रेस में ही विरोध है। इसका फायदा जीवेश कुमार को मिल सकता है।

साहेबगंज से राजू कुमार सिंह आगे

मुजफ्फरपुर की साहेबगंज सीट से BJP के डॉ. राजू सिंह के सामने RJD के पृथ्वीनाथ राय हैं। मौजूदा पर्यटन मंत्री डॉ. राजू सिंह 2020 में साहेबगंज से 15,333 वोट से जीते थे। तब उन्होंने VIP के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 2022 में वे BJP में शामिल हो गए थे। फिलहाल इस सीट से राजू सिंह ही आगे दिख रहे हैं।

वजह: साहेबगंज में राजपूत, यादव, मुस्लिम और भूमिहार वोटर सबसे ज्यादा है। राजू सिंह राजपूत कम्युनिटी से हैं। इनके अलावा वैश्य और निषाद हैं, जो NDA के वोटर माने जाते हैं। VIP की टिकट से लड़े राजू सिंह को पिछली बार 81,203 मिले थे। ये वोट भी उनकी तरफ शिफ्ट हो सकता है।

सिकटी से विजय कुमार मंडल आगे

आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल अररिया की सिकटी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने VIP के हरि नारायण प्रमाणिक हैं। 2020 में ये सीट विजय कुमार मंडल ने 13,610 वोट से जीती थी। फिलहाल वे आगे नजर आ रहे हैं।

वजह: अच्छी इमेज है। कोई विवाद नहीं जुड़ा है। सिकटी में काफी काम किया है। इसमें पावरग्रिड और सुंदर नाथ धाम का डेवलपमेंट शामिल है। अलग-अलग पार्टियों से 5 बार विधायक रह चुके विजय कुमार BJP की टिकट पर तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं।

अमनौर से कृष्ण कुमार मंटू आगे

इनफॉर्मेशन मिनिस्टर कृष्ण कुमार मंटू छपरा की अमनौर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला RJD के सुनील राय से है। 2020 के चुनाव में भी दोनों आमने-सामने थे। तब कृष्ण कुमार मंटू को सिर्फ 3,681 वोट से जीत मिली थी। इस सीट पर तीन बार चुनाव हुए हैं, जिनमें दो बार कृष्ण कुमार मंटू जीते हैं। इस बार भी वे आगे दिख रहे हैं।

वजह: मौजूदा विधायक और राज्य सरकार में मंत्री हैं, इसलिए पलड़ा भारी है। अमनौर सारण लोकसभा सीट में आता है, जहां से BJP के राजीव प्रताप रूडी सांसद हैं। इसका भी फायदा कृष्णकुमार मंटू को मिल रहा है। इसके अलावा ये सीट बनने के बाद से NDA के पास है।

बांकीपुर से नितिन नवीन आगे

पटना की बांकीपुर से चुनाव लड़ रहे नितिन नवीन सड़क निर्माण विभाग के मंत्री हैं। उनका मुकाबला RJD की रेखा गुप्ता से है। नितिन नवीन ने पिछला चुनाव 39,036 वोट से जीता था। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा के लव सिन्हा के बेटे को हराया था। इस बार भी नितिन नवीन आगे दिख रहे हैं।

वजह: दो बार से चुनाव जीत रहे हैं। एंटी इनकम्बेंसी नहीं है। कायस्थ, सवर्ण और अतिपिछड़ा वर्ग के वोटर में पैठ है। RJD कैंडिडेट रेखा गुप्ता पहले BJP में थीं। फिर कांग्रेस में गईं, आखिर में RJD जॉइन की। RJD के लोकल लीडर विरोध में हैं।

कल्याणपुर से महेश्वर हजारी आगे

सूचना और जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी समस्तीपुर के कल्याणपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाकपा माले के रंजीत राम हैं। महेश्वर हजारी पिछला चुनाव 10,251 वोट से जीते थे। इस बार भी वे आगे दिख रहे हैं।

वजह: 16% SC वोटर इनके साथ माने जाते हैं। नीतीश कुमार के करीबी होने का फायदा मिलेगा। 2010 के बाद से ये सीट JDU के पास है।

बहादुरपुर से मदन सहनी आगे

नीतीश सरकार में समाज कल्याण विभाग मंत्री मदन सहनी दरभंगा जिले की बहादुरपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला लालू यादव के करीबी और बहादुरपुर से विधायक रह चुके RJD के भोला यादव से है। मदन सहनी पिछला चुनाव 2,629 वोट से जीते थे। इस बार वे कड़े मुकाबले के बावजूद आगे दिख रहे हैं।

वजह: चार बार विधायक रह चुके हैं। उनका अपना वोट बैंक है। भोला यादव पिछला चुनाव 2015 में जीते थे। पहली बार उनका मुकाबला मदन सहनी से है। दोनों कद्दावर नेता हैं। नीतीश सरकार की योजनाओं का फायदा मदन सहनी को मिलता दिख रहा है।

सोनबरसा से रत्नेश सदा आगे

सहरसा जिले की सोनबरसा सीट से चुनाव लड़ रहे रत्नेश सदा 2010 से विधायक हैं। इस बार उनके सामने कांग्रेस की सरिता पासवान हैं। 2020 के चुनाव में रत्नेश सदा 13,466 वोट से जीते थे। इस बार भी आगे दिख रहे हैं।

वजह: 15 साल से विधायक हैं, लेकिन एंटी इनकम्बेंसी नहीं है। 2023 में मंत्री बनाए गए। उनका अपना वोट बैंक है। सोनबरसा SC रिजर्व सीट है। यहां अनुसूचित जाति के वोटर करीब 27% हैं, जिनमें रत्नेश सदा की अच्छी पैठ मानी जाती है।

नालंदा से श्रवण कुमार आगे

ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार 1995 से नालंदा सीट से विधायक हैं। नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं। पिछला चुनाव 16,077 वोट से जीते थे। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया से है। फिलहाल श्रवण कुमार ही आगे दिख रहे हैं।

वजह: क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। काफी एक्टिव रहते हैं। कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे कौशलेंद्र कुमार पहले BJP में थे। कांग्रेस में आते ही उन्हें टिकट दे दिया गया। इससे महागठबंधन में विरोध है। कांग्रेस कैंडिडेट पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे।

बछवाड़ा सीट से सुरेंद्र मेहता आगे

बेगूसराय की बछवाड़ा सीट से चुनाव लड़ रहे सुरेंद्र मेहता नीतीश सरकार में खेल मंत्री हैं। पिछला चुनाव सिर्फ 484 वोट से जीते थे। इस बार उनका मुकाबला CPI के अवधेश राय और कांग्रेस के शिवप्रकाश गरीब दास से है। सुरेंद्र मेहता की स्थिति इस बार मजबूत दिख रही है।

वजह: बछवाड़ा सीट से महागठबंधन के दो कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार कांग्रेस और CPI अलग चुनाव लड़ी थी, तब दोनों को मिलाकर 94,132 वोट मिले थे। उनके वोट बंटेंगे, तो 2020 की तरह फायदा सुरेंद्र मेहता को होगा। NDA का वोट बैंक पहले से उनके पास है।

बिहारशरीफ से डॉ. सुनील कुमार आगे

पर्यावरण मंत्री डॉ. सुनील कुमार बिहार शरीफ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वे 2005 से ये सीट जीत रहे हैं। इस बार मुकाबला कांग्रेस के उमैर खान से है। सुनील कुमार पिछला चुनाव 15,102 वोट से जीते थे। इस बार भी वे आगे दिख रहे हैं।

वजह: डॉ. सुनील कुमार 20 साल से विधायक हैं। संगठन और कार्यकर्ताओं में पकड़ है। इस सीट पर कुर्मी-कोइरी समुदाय की आबादी सबसे ज्यादा है। ये NDA के वोटर माने जाते हैं। चिराग पासवान के NDA में आने का फायदा मिलेगा। दूसरी तरफ कांग्रेस के उमैर खान मजबूत कैंडिडेट नहीं हैं। बाहरी होने का टैग उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।



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