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108 एम्बुलेंस टेक्नीशियन को बोनस अंक देने से इनकार गलत: हाईकोर्ट ने कहा- ईएमटी का काम एएनएम से समान, याचिकाकर्ता को दी राहत – Jodhpur News

108 एम्बुलेंस टेक्नीशियन को बोनस अंक देने से इनकार गलत:  हाईकोर्ट ने कहा- ईएमटी का काम एएनएम से समान, याचिकाकर्ता को दी राहत – Jodhpur News


राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने एक फैसले में 108 एम्बुलेंस सेवा में इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) के रूप में काम करने वाली विमला को फीमेल हेल्थ वर्कर की भर्ती में बोनस अंक देने से इनकार करने के आदेश को खारिज कर दिया है। जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने अप

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मामला बाड़मेर के चोहटन तहसील के पोकरसर निवासी विमला की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। विमला 25 जुलाई 2014 से 30 नवंबर 2022 तक 108 एम्बुलेंस सेवा में ईएमटी के पद पर कार्यरत थीं। ईएमटी पद की पात्रता एएनएम/जीएनएम या बीएससी (नर्सिंग) थी।​

हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा फीमेल हेल्थ वर्कर के पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया, जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि 108 एम्बुलेंस सेवा में काम करने वाले और विज्ञापित पद के समान कार्य करने वाले व्यक्तियों को बोनस अंक दिए जाएंगे। विमला ने ओबीसी श्रेणी में आवेदन करते समय अपने कार्य अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर आवश्यक बोनस अंक का दावा किया।​

इमेज सोर्स – एआई जनरेटेड

विभाग का इनकार और चुनौती

विभाग ने 16 जुलाई को विमला के बोनस अंक के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि ईएमटी के पद पर प्राप्त अनुभव विज्ञापित पद के समान नहीं है। विभाग का तर्क था कि फीमेल हेल्थ वर्कर द्वारा किए जाने वाले कार्यों की प्रकृति प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात देखभाल से संबंधित है, जो 108 एम्बुलेंस आपातकालीन सेवाओं पर तैनात ईएमटी से अपेक्षित नहीं है। इसलिए कर्मचारी द्वारा प्राप्त कार्य अनुभव को विज्ञापित पद में किए जाने वाले कार्य के बराबर या समान नहीं कहा जा सकता।​

याचिकाकर्ता विमला की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार गोदारा ने तर्क दिया कि हालांकि पद का नाम अलग हो सकता है, लेकिन डिलीवरी से पहले व बाद में सभी इमरजेंसी देखभाल तब की जाती है, जब मरीज को विभिन्न स्थानों से हॉस्पिटल्स में ले जाना होता है।

एडवोकेट गोदारा ने कहा कि 108 एम्बुलेंस आपातकालीन सेवाओं में याचिकाकर्ता द्वारा किए जाने वाले कार्य विज्ञापित पद के लगभग समान हैं। इसलिए बोनस अंक देने से इनकार करना सही नहीं है।​

कार्य अनुभव की अवधि के आधार पर बोनस अंक

हाईकोर्ट ने राजस्थान मेडिकल एंड हेल्थ सबऑर्डिनेट सर्विस रूल्स का हवाला दिया। जिसमें प्रावधान है कि नियुक्ति अधिकारी, सरकार, नेशनल रूरल हेल्थ मिशन, मेडी केयर रिलीफ सोसाइटी, मुख्यमंत्री बीपीएल जीवन रक्षा कोष आदि के तहत समान कार्य पर अनुभव की अवधि को ध्यान में रखते हुए बोनस अंक दिए जा सकते हैं।

भर्ती विज्ञापन की शर्त भी स्पष्ट है कि सरकार के हेल्थ इंस्टीट्यूट्स में चल रही योजनाओं में एमआरएस/ प्लेसमेंट एजेंसी/ एनजीओ/ 108/ पीपीपी मोड पर काम करने वाले संविदा कर्मचारी, जो विज्ञापित पद के समान कार्य कर रहे हैं, उन्हें सेवा की अवधि के आधार पर अनुभव आधारित बोनस अंक दिए जाएंगे। हर एक साल की सेवा के लिए 10 अंक की दर से अधिकतम 30 बोनस अंक दिए जा सकते हैं।​

हाईकोर्ट का विश्लेषण और फैसला

  • हाईकोर्ट ने कहा कि विवाद केवल इस बात को लेकर है कि क्या 108 एम्बुलेंस आपातकालीन सेवा में ईएमटी के पद पर काम करने वाले व्यक्ति एएनएम के कर्तव्यों/कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं या नहीं। कोर्ट ने कहा कि पद के लिए न्यूनतम योग्यता खुद संकेत करती है कि एएनएम की न्यूनतम योग्यता रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले सभी कार्य 108 एम्बुलेंस आपातकालीन सेवाओं पर तैनात कर्मचारियों द्वारा भी किए जाने आवश्यक हैं।​
  • कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों में काम करने वाले व्यक्तियों को 108 एम्बुलेंस सेवाओं में तैनात व्यक्तियों की तुलना में लंबी अवधि के लिए कार्य करने की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, नियमित उपचार दिए जाने से पहले प्रदान की जाने वाली प्रसव पूर्व या प्रसव पश्चात देखभाल समान तरीके से प्रदान की जानी जरूरी है, चाहे वह नियमित कर्मचारियों द्वारा की जाए या 108 एम्बुलेंस सेवाओं पर नियोजित व्यक्तियों द्वारा।​
  • सीएमएचओ, बाड़मेर द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि याचिकाकर्ता उसी प्रकार के पद पर काम कर रही थी, जो विज्ञापित है।

तमाम तथ्यों, शर्तों व नियम-प्रावधान को ध्यान में रखते हुए, हाईकोर्ट ने माना कि बोनस अंक देने से इनकार करना सही नहीं है। कोर्ट ने उस अस्वीकृति आदेश को रद्द कर दिया।​

कोर्ट ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया कि वे अनुभव प्रमाण पत्र को वैध पात्रता प्रमाण पत्र मानते हुए 30 बोनस अंक प्रदान करें। यदि विमला बोनस अंक देने के बाद मेरिट सूची में आती है, तो रिक्त पद उपलब्ध होने पर नियुक्ति दी जाएगी। यदि कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है, तो अगली रिक्तियों में नियुक्ति पर विचार किया जाएगा। यह कार्यवाही आदेश की प्रति प्राप्त होने से तीन महीने में की जाएगी।​



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