पाकिस्तान के ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए गया सिख श्रद्धालुओं का जत्था आज अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत लौट आया।
अमृतसर में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर पाकिस्तान के ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए गया सिख श्रद्धालुओं का जत्था आज अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत लौट आया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एस.जी.पी.सी.) के नेतृत्व में गए इस
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लुधियाना की श्रद्धालु जसबीर कौर ने बताया कि दस दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान स्थित कई प्रमुख गुरुद्वारों के दर्शन किए। इनमें गुरुद्वारा जन्म स्थान ननकाना साहिब, गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर, गुरुद्वारा सच्चा सौदा और गुरुद्वारा डेरा साहिब लाहौर शामिल हैं।
उन्होंने इस यात्रा को आत्मिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत अनुभवपूर्ण बताया। गुरु नानक देव जी का गुरुपर्व इन पवित्र स्थलों पर मनाना उनके लिए अविस्मरणीय रहा।
लोगों ने दस दिवसीय यात्रा के दौरान पाकिस्तान स्थित कई प्रमुख गुरुद्वारों के दर्शन किए।
स्थानीय संगत ने भी जत्थे का स्वागत किया
दिल्ली के महेशपाल सिंह ने पाकिस्तान सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा, ठहरने और भोजन के प्रबंध संतोषजनक थे। स्थानीय संगत ने भी जत्थे का गर्मजोशी से स्वागत किया।
अटारी-वाघा सीमा पर भारतीय अधिकारियों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने बताया कि गुरु नानक देव जी का गुरुपर्व पाकिस्तान के गुरुद्वारों में मनाना उनके लिए एक अद्भुत और आत्मिक अनुभव था, जिसने उन्हें गहरी शांति प्रदान की।
एक श्रद्धालु ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “हम गुरु नानक देव जी के दरबार में मत्था टेककर खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं। पाकिस्तान में सभी व्यवस्थाएं बहुत अच्छी थीं और स्थानीय संगत ने हमें बहुत प्यार और सत्कार दिया। यह यात्रा हमारे जीवन का एक अनमोल और यादगार अनुभव रही।”
