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साइबर ठगों का नया हथियार SIR: छत्तीसगढ़ में तीन साल में 791 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जारी किया अलर्ट; BLO नहीं मांगते OTP – Raipur News

साइबर ठगों का नया हथियार SIR:  छत्तीसगढ़ में तीन साल में 791 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जारी किया अलर्ट; BLO नहीं मांगते OTP – Raipur News


छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी लगातार नई-नई तरकीबों के साथ बढ़ती जा रही है। साइबर ठगों ने लोगों को ठगने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) फार्म भरने के नाम पर ओटीपी मांगने का पैटर्न निकाला है।

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साइबर ठगों के इस पैटर्न की जानकारी होते ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एडवाइजरी जारी की है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा, कि फोन के माध्यम से निर्वाचन आयोग का कोई भी कर्मचारी किसी भी मतदाता से ओटीपी नहीं पूछता।

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार ये साइबर ठगों का पैटर्न है, इससे बचने की आवश्यकता सभी मतदाताओं को है। आपको बता दे, कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरों के अनुसार साइबर ठगों ने प्रदेश में जनवरी 2025 से जून 2025 तक 67 हजार 389 लोगों से 791 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी हुई थी।

साइबर ठग लगातार नए-नए पैटर्न से ठगी के वारदातों को अंजाम देते है। अब इस रिपोर्ट में विस्तार से जानिए साइबर ठगी के 10 नए पैटर्न और इनसे कैसे बचा जा सकता है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने यह नोटिफिकेशन जारी किया है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने यह नोटिफिकेशन जारी किया है।

पहले पढ़े ठगों का SIR पैटर्न क्या है

साइबर ठगों निर्वाचन कर्मी बनकर फोन करते है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) फॉर्म भरने की बात बोलकर झांसे में लाते है। बातचीत करने के दौरान ओटीपी मांगते है और ओटीपी नहीं देने पर वोटर लिस्ट से नाम कटने की धमकी देते है।

वोटर लिस्ट से नाम ना कट जाए, इसलिए कॉलर उन्हें ओटीपी बता देते है और उनके अकाउंट से पैसा कट जाता है। 24 राज्यों में निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) फॉर्म भरने की प्रक्रिया करवा रहा है। कई राज्यों में इस पैटर्न पर ठगी के केस सामने आए है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त यशवंत कुमार।

राज्य निर्वाचन आयुक्त यशवंत कुमार।

अब पढ़े राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बचने के क्या उपाय बताए

राज्य निर्वाचन आयुक्त यशवंत कुमार ने एसआईआर पैटर्न के नाम पर ठगी करने वाले साइबर ठगों से बचने के लिए सुझाव दिए है। निर्वाचन आयुक्त के अनुसार एसआईआर के नाम पर यदि कोई व्यक्ति कॉल करता है और ओटीपी मांगता है, तो उसे तुरंत मना कर दें।

इसके बाद भी कॉल करके दबाव बनाता है, तो उसे साफ-साफ कहें कि “मैं कार्यालय जाकर बात करूंगा/करूंगी या अपने BLO से संपर्क करूंगा/करूंगी।” अगर कोई व्यक्ति OTP मांगने के लिए दबाव डाले, धमकी दे या जोर डाले, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें।

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने एसआईआर के नाम पर ओटीपी मांगने वालों का कॉल आने पर हेल्पलाइन नंबर: 1950 पर कॉल करने और सोशल मीडिया प्लेटफार्म @CEOChhattisgarh (फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम) पर टैग करने की अपील की है।

अब पढ़े साइबर ठगी के 10 पैटर्न

फेक अकाउंट होल्डर स्कैम ।

फेक अकाउंट होल्डर स्कैम ।

पैटर्न-1: फेक अकाउंट होल्डर स्कैम

तरीका: यह साइबर ठगी का नया तरीका है, जिसमें ठग खुद को बैंक के बड़े ग्राहक के रूप में पेश करता है। पहले वह फोन पर बातचीत कर भरोसा जीतता है और फिर फर्जी दस्तावेज भेजकर खाते से पैसे ट्रांसफर करवा लेता है।

इस स्कैम को करने के लिए ठग पहले बैंक अधिकारियों को मामूली बातों में डांटता है। डाटने के बाद पैसा पार्टी को देना है बोलकर पैसे बैंक अधिकारियों से ट्रांसफर करवाता है। पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए वॉट्सऐप में बैंक अकाउंट होल्डर के ऑफिस का फेक लेटर भेजता है।

पैसे नहीं ट्रांसफर करने पर अकाउंट बंद करने की धमकी देता है। बैंक का बड़ा अकाउंट बंद ना हो, इसलिए बैंक अधिकारी पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इस पैटर्न में रायपुर के बड़े बिल्डर और भाजपा नेता के बेटे के खाते से ठगी हो चुकी है। इन दोनो मामले में बैंक अधिकारियों ने पुलिस में शिकायत की है।

पैटर्न-2: फेक ई-चालान स्कैम

तरीका: यह एक नया प्रकार का साइबर फ्रॉड है। इसमें ठग खुद को ट्रैफिक अथॉरिटी या पुलिस अधिकारी दिखाते हैं और लोगों को चालान भरने के नाम पर नकली एप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। यह एप असल में माल वेयर होता है, जो मोबाइल की संवेदनशील जानकारी जैसे SMS, बैंकिंग एप्स, OTP और पासवर्ड चुरा लेता है।

ठग वॉट्सऐप, SMS या ईमेल के जरिए फर्जी चालान का मैसेज भेजते हैं और खुद को ट्रैफिक पुलिस या सरकारी अधिकारी बताते हैं। मैसेज में लिखा होता है कि आपकी गाड़ी से नियमों का उल्लंघन हुआ है और आपको जुर्माना भरना है।

साथ ही इसमें एक APK फाइल (जैसे e-parivahan.apk) या लिंक दिया जाता है, जिस पर दावा होता है कि चालान की जानकारी देखने या भुगतान करने के लिए एप इंस्टॉल करें। जब यूजर एप इंस्टॉल करता है, तो यह फोन से संवेदनशील जानकारी जैसे SMS, कॉन्टैक्ट्स, बैंकिंग एप्स, पासवर्ड और OTP एक्सेस करने की अनुमति मांगता है। एक बार जब ठगों को ये जानकारी मिल जाती है, वे मोबाइल बैंकिंग या UPI के जरिए खाते से पैसे निकाल लेते हैं।

पैटर्न-3: डिजिटल अरेस्ट स्कैम

तरीका: यह एक तरह का साइबर फ्रॉड है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, साइबर सेल एजेंट या किसी सरकारी जांच एजेंसी का सदस्य बताकर कॉल करते हैं। वे दावा करते हैं कि आपके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है, जैसे अश्लील वीडियो शेयर करना, मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स से जुड़ा अपराध।

साथ ही, वे वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल करके नकली पुलिस आईडी कार्ड, वारंट या कोर्ट ऑर्डर दिखाते हैं। वीडियो कॉल के दौरान वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर आपसे जुर्माना या जमानत राशि का भुगतान करने को कहते हैं। रायपुर में इस पैटर्न पर दर्जनों ठगी हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। अगर कोई आपको इस नाम पर धमकाता या डराता है, तो यह फ्रॉड है। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी साइबर सेल या पुलिस को सूचना दें।

पैटर्न-4: फास्टैग स्कैम

तरीका: इस स्कैम में ठग आपके फास्टैग से जुड़ी जानकारी या पैसे चुरा लेते हैं। इसके लिए वे फर्जी कॉल, SMS, वेबसाइट या QR कोड का इस्तेमाल करते हैं।

अगर आप इनके झांसे में आकर अपनी डिटेल्स शेयर कर देते हैं, तो ठग आपका फास्टैग बैलेंस खाली कर सकते हैं।

पैटर्न-5: जम्प्ड डिपॉजिट स्कैम

तरीका: इस स्कैम में साइबर ठग UPI उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाते हैं। सबसे पहले वे आपके बैंक अकाउंट में थोड़ा सा पैसा भेजते हैं।

फिर वह आपको यह दिखाते हैं कि पैसा वापस करना है और कई बार विथड्रॉल या रिफंड की रिक्वेस्ट भेजते हैं। अगर आप इस रिक्वेस्ट को स्वीकार करते हैं और अपना UPI पिन डाल देते हैं, तो ठग आपके बैंक अकाउंट से पैसे चुरा लेते हैं।

पैटर्न-6: APK फाइल स्कैम

तरीका: यह एक साइबर फ्रॉड है जिसमें ठग आपको किसी आधिकारिक संस्था जैसे बैंक, ट्रैफिक अथॉरिटी या सरकारी सेवा का नाम लेकर APK फाइल भेजते हैं।

यह फाइल मोबाइल में इंस्टॉल करने पर मालवेयर एक्टिव हो जाता है और आपका संवेदनशील डेटा जैसे: SMS और कॉल्स, बैंकिंग एप्स और UPI पिन, पासवर्ड और OTP और कॉन्टैक्ट लिस्ट चुरा लेते है। इंस्टॉल होने के बाद स्कैमर आपके बैंक अकाउंट या डिजिटल वॉलेट से पैसे निकाल सकते हैं।

पैटर्न-6: ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी स्कैम

तरीका: यह एक साइबर फ्रॉड है जिसमें ठग आपको किसी ट्रेडिंग या इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (जैसे शेयर, क्रिप्टो, फॉरेक्स या कमोडिटी ट्रेडिंग) के नाम पर फंसाते हैं।

वे दावा करते हैं कि आप छोटी रकम निवेश कर तेजी से बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। फर्जी एप्स, वेबसाइट या कॉल के जरिए वे आपका भरोसा जीतते हैं और पैसा ले लेते हैं।

कैसे पहचानें कि आपका डेटा कलेक्ट हो रहा है?

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इसे पहचानने का कोई एक तय तरीका नहीं है, लेकिन कुछ संकेत आपके फोन में बता सकते हैं कि आपका डेटा शायद कलेक्ट किया जा रहा है।

साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू के अनुसार, अगर आपके मोबाइल का डेटा चोरी किया जा रहा है, तो डेटा यूजेज अचानक बढ़ सकता है। कई ऐप्स आपका डेटा कलेक्ट करने के बाद इसे थर्ड-पार्टी सर्वर पर भेज देती हैं। जब यह प्रक्रिया होती है, तो आपका डेटा जल्दी खत्म होने लगता है।

साथ ही, अगर फोन की बैटरी जल्दी खत्म होने लगे, फोन अक्सर गर्म हो और ऐप्स असामान्य तरीके से काम करें, तो यह भी एक चेतावनी हो सकती है कि आपका डेटा कलेक्ट हो रहा है।

अक्सर स्कैमर्स फर्जी या एडिटेड ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड दिखाकर आपको धोखा देते हैं। इसलिए अगर कभी भी ऐसी कोई विड्राल या रिफंड रिक्वेस्ट मिले, तो सावधान हो जाएं और इसे कभी स्वीकार न करें।

6 सालों में साइबर ठगी की घटनाएं 42 गुना बढ़ गई

भारत में साल 2023 में 9.2 लाख से अधिक साइबर अपराध संबंधी शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें लगभग 6,000 करोड़ की आर्थिक हानि हुई।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में साइबर ठगी की घटनाएं 42 गुना बढ़ गई हैं। यह केवल तकनीकी समस्या नहीं रह गई, बल्कि आर्थिक और कानूनी चुनौती भी बन गई है।

ठगी से प्राप्त धन को धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने के लिए मनी म्यूल, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क का सहारा लिया जा रहा है। इसके मुकाबले सरकारें साइबर सुरक्षा पर अरबों रुपए खर्च कर रही हैं।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (ICCC) ने 2025 के लिए अनुमान लगाया है कि भारतीयों को साइबर ठगी के माध्यम से 1.2 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान होने की आशंका है। यह राशि बिहार राज्य के वार्षिक बजट के लगभग आधे के बराबर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आम जनता को डिजिटल लेनदेन करते समय ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। केवल भरोसेमंद और लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म पर ही ऑनलाइन पेमेंट और बैंकिंग करना सुरक्षित है।

छत्तीसगढ़ में 791 करोड़ रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतें

विधानसभा के पिछले सत्र में यह आंकड़े पेश किए गए थे। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन सालों में 791 करोड़ की साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने विधायकों के सवालों पर विधानसभा में बताया था, कि राज्य के 67,389 लोगों ने 2023 से जून 2025 तक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 791 करोड़ रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 21,195 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है और 1,820 पीड़ितों का पैसा वसूल कर उन्हें वापस कर दिया गया है।

रायपुर एएसपी लखन पटले।

रायपुर एएसपी लखन पटले।

अब पढ़े रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने क्या कहा

दैनिक भास्कर से चर्चा के दौरान एएसपी सिटी लखन पटले ने बताया, कि साइबर ठगों के खिलाफ सड़क से लेकर साेशल मीडिया तक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

कई आरोपियों पर कार्रवाई भी की है। लोगों को भी इन साइबर ठगों से सचेत रहने और जागरूक होने की आवश्यकता है। साइबर ठगों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।



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