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जरनल हाउस बैठक में होगी ढोल राजनीति: नगर निगम की बैठक में फेल हुए मनीमाजरा के प्रोजेक्टों पर बवाल तय – Chandigarh News

जरनल हाउस बैठक में होगी ढोल राजनीति:  नगर निगम की बैठक में फेल हुए मनीमाजरा के प्रोजेक्टों पर बवाल तय – Chandigarh News


नगर निगम का यह ढोल आज जरनल हाउस मीटिंग में चर्चा का विष्य रहेगा।

नगर निगम में जरनल हाउस की बैठक होने जा रही है। बैठक में सड़क पर कूडा फेंकने वालों के घर पर ढोल बजाने की बनाई गई योजना और इसे बाद में वापिस लेने का मुद्दा उठेगा। सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर की अगुवाई में पार्षद ढोल बजाकर निगम की विफलता पर विरोध जत

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मनीमाजरा हाउसिंग प्रोजेक्ट का विवादित जॉनिंग प्लान।

मनीमाजरा हाउसिंग प्रोजेक्ट फिर चर्चा में, इस पर विवाद होना तय

मनीमाजरा का विवादित हाउसिंग प्रोजेक्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। नगर निगम की कमेटी ने पॉकेट-6 की जमीन की जांच में सामने आई कमियों को दूर करने के बाद इसे दोबारा हाउस की बैठक में भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। पहले 7.7 एकड़ जमीन का जोनिंग प्लान तैयार किया गया था, लेकिन अब खुलासा हुआ कि पॉकेट-6 में कुल 16.50 एकड़ जमीन मौजूद है, जिसमें करीब 1 एकड़ हिस्से पर अवैध कब्जा भी है।

कमेटी ने नवंबर में हुई बैठक में एक्सईएन अजय गर्ग द्वारा प्रस्तुत डिमार्केशन रिपोर्ट में पाया कि जमीन का आकार अतिक्रमण के कारण बदला हुआ है। इसी वजह से अब पूरी जमीन को एक यूनिट के रूप में यूटी के चीफ आर्किटेक्ट के पास जॉनिंग के लिए भेजा जाएगा। नगर निगम में पहले ही इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े किए गए थे और हाउस की मीटिंग में इस पर बड़ा बवाल हुआ था।

क्या-क्या मिला कमेटी की जांच में

  • पॉकेट-6 में कुल 16.50 एकड़ जमीन, जिसमें 1 एकड़ पर अवैध कब्जा
  • ईडब्ल्यूएस नीति लंबित, प्रशासन ने जल्द फाइनल होने का आश्वासन दिया
  • राजी मातुर्का नाम से दर्ज 0.23 एकड़ भूमि की भी राजस्व रिकार्ड से जांच
  • जमीन पर मौजूद धार्मिक स्थल, सरकारी स्कूल व अन्य निर्माण की भी माप-जोख
  • अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विंग को सौंपी
मनीमाजरा वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते अमित शाह। जिसे लेकर आज विवाद होने वाला है।

मनीमाजरा वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते अमित शाह। जिसे लेकर आज विवाद होने वाला है।

मनीमाजरा में 24 घंटे पानी की योजना भी फेल

मनीमाजरा में 24 घंटे पानी का प्रोजेक्ट भी फेल हो गया है। जरनल हाउस की बैठक में इस पर भी बवाल होना लाजिमी है। क्योंकि मेयर विरोधी पक्ष इस पर पहले से ही सवाल खड़े करता आ रहा है। इस प्रोजेक्ट की स्टेट्स रिपोर्ट को भी बैठक में रखा जाना है और इसका जवाब भी विपक्ष की तरफ से मांगा जाना है। प्रोजेक्ट के फेल होने की वजह सिर्फ कंसल्टेंट की कमियां ही नहीं, स्मार्ट सिटी व निगम के अधिकारियों की भी लापरवाही सामने आई है। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं।

इस वजह से फेल हुआ प्रोजेक्ट

कैपिटल वर्क देर से पूरा हुआ- अगस्त 2024 की जगह जून 2024 में पूरा होना था।24 घंटे पानी का प्रोजेक्ट शुरू ही देरी से हुआ। 5 महीने बाद जुलाई 2024 में ट्रायल शुरू किया गया। कुछ काम अगस्त 2024 तक भी अधूरे रहे।

ट्रायल नहीं किया गया- प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले 24 घंटे का ट्रायल होना चाहिए था, जो नहीं हुआ।निगम स्टाफ ने बताया कि 24 घंटे ट्रायल से कई लीकेज का पता चल सकता था, जो बाद में सामने आया।

लीकेज रोकने में देरी- मौहाली रोड, हाउसिंग बोर्ड, मनसा देवी, गुरुद्वारा, मार्केट, हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट—कई जगह लीकेज थे, जिन्हें बार-बार रिपेयर किया गया लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया।

उद्घाटन की जल्दबाजी- कैपिटल वर्क उसी दिन दिखा दिया गया, जिस दिन अमित शाह उद्घाटन करने आए।17 जून 2024 को टेस्टिंग चल रही थी, 31 जुलाई 2024 को उद्घाटन की योजना थी।निगम इंजीनियरिंग विंग ने जुलाई में ही इसे उपयोग योग्य बता दिया। जबकि जांच रिपोर्ट कहती है कि 3 अगस्त 2024 को प्रोजेक्ट 24 घंटे पानी सप्लाई देने में सक्षम नहीं था।

स्मार्ट वाटरमीटरिंग में गड़बड़ी- मीटर रीडिंग सर्वर में गलत अपलोड हुई।800 से 1300 मीटर तक रीडिंग लाइन फेल हुई।डेटा ट्रांसफर नहीं हुआ।कई इलाकों में कनेक्शन खुद ही डिस्कनेक्ट हो गए।

संचालन की कमियां- कई जोन में 24 घंटे पानी नहीं आया—मनीमाजरा, मोटर मार्केट, हाउसिंग बोर्ड, मनसा देवी, सब में सप्लाई बाधित रही, फीडर 2 और 3 से सप्लाई ठीक नहीं हुई।

निगम की जांच रिपोर्ट में ये बातें सामने आईं…

  • कई जोन में 24 घंटे पानी नहीं आया
  • टेस्टिंग नेटवर्क कमजोर था
  • मीटर रीडिंग अपलोड नहीं हुई
  • स्मार्ट सिस्टम में डेटा फेल
  • 20 दिन में ही 117 शिकायतें
  • 24 घंटे पानी देने की क्षमता ही अधूरी

मलोया गौशाला संभालेगी समाज सेवी संस्था

चंडीगढ़ नगर निगम ने मलोया गौशाला के संचालन और रखरखाव को NGO के हवाले की जा रही है। इसके लिए निगम ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) दोबारा जारी किया था, जिसके जवाब में तीन NGOs ने आवेदन किया है। यदि इनमें से किसी एक को जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो निगम को करीब ₹1.51 करोड़ तक की वार्षिक बचत हो सकती है।यह प्रस्ताव अब निगम की जनरल हाउस बैठक में रखा जा रहा है। निगम की 351वीं बैठक में फैसला हुआ था कि सेक्टर-25 और सेक्टर-45 की गौशालाओं का संचालन मुफ्त में दो NGOs प्रार्थना फाउंडेशन ट्रस्ट और गौरी शंकर को दिया जाएगा।लेकिन मलोया गौशाला के लिए EOI रद्द कर फिर से आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद 3 अगस्त 2025 को दोबारा सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया और NGOs से आवेदन मंगवाए गए।

मलोया गौशाला में करीब 570 पशु

तीनों NGOs ने निगम से प्रति पशु प्रतिदिन वित्तीय सहायता का प्रस्ताव भेजा है। इस समय मलोया गौशाला में लगभग 570 पशु हैं, जिन पर निगम हर महीने काफी खर्च कर रहा है। वर्तमान में चारा, दाना, दवाइयों, कर्मचारियों, बिजली और पानी आदि पर निगम लगभग ₹17,96,491 प्रति माह खर्च कर रहा है, यानि कि करीब ₹2.15 करोड़ सालाना।



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