भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के झीरम घाटी हमले को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। झीरम हमले से प्रभावित नेताओं और परिजनों ने राजीव भवन में पत्रकारवार्ता कर नड्डा के बयान को आपत्तिजनक बताया और मामले की निष्पक्ष ज
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू, झीरम हमले में शहीद स्व. योगेंद्र शर्मा की पत्नी और पूर्व विधायक अनिता शर्मा, जीरम प्रभावित शिव सिंह ठाकुर और प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला मौजूद रहे।
“नड्डा, रमन सिंह और मुकेश गुप्ता का हो नार्को टेस्ट”
प्रदेश कांग्रेस महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने कहा कि, झीरम घाटी हमले को लेकर जेपी नड्डा का बयान न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि शहीदों का अपमान भी है। उन्होंने मांग की है कि जेपी नड्डा, तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और तत्कालीन डीजीपी मुकेश गुप्ता का नार्को टेस्ट कराया जाए, जिससे झीरम हमले की सच्चाई सामने आ सके।
गैदू ने कहा कि, कांग्रेस ने झीरम हमले में अपने नेताओं की पूरी एक पीढ़ी खो दी थी और उस वक्त राज्य में भाजपा की सरकार थी। उन्होंने सवाल उठाया कि 12 साल से केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद एनआईए आज तक इस हमले के दोषियों तक क्यों नहीं पहुंच पाई। एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से पूछताछ क्यों नहीं की, यह भी बड़ा सवाल है।
“हमारे जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं”
पूर्व विधायक अनिता शर्मा ने कहा कि, झीरम हमले के पीड़ितों के जख्म अभी भरे भी नहीं हैं और ऐसे बयान देकर उन्हें फिर से आहत किया जा रहा है। नड्डा एक केंद्रीय मंत्री हैं और उन्होंने संविधान की शपथ ली है।
यदि उनके पास कोई साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय जांच एजेंसियों को सौंपना चाहिए। उन्होंने मांग की कि नड्डा के बयान के आधार पर उनसे पूछताछ की जाए और जो भी दोषी हों, उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
“परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा जानबूझकर हटाई गई”
झीरम हमले से प्रभावित शिव सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि, तत्कालीन भाजपा सरकार ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को जानबूझकर पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी। उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर सुरक्षा हटाई गई और इसके बाद यह बड़ा हमला हुआ।
“झीरम की सच्चाई रोकने की साजिश”
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि, भाजपा ने झीरम हमले की सच्चाई सामने आने से रोकने के लिए हर स्तर पर साजिश की। कांग्रेस सरकार बनने के बाद राज्य में एसआईटी का गठन किया गया था, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने एनआईए को झीरम मामले की फाइल राज्य की एसआईटी को सौंपने नहीं दी।
शुक्ला ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद एनआईए सुप्रीम कोर्ट चली गई और करीब पांच साल की कानूनी लड़ाई के बाद दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए की अपील खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार की एसआईटी को जांच का अधिकार दिया।
हालांकि, तब तक राज्य में सरकार बदल चुकी थी। कांग्रेस ने मांग की कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी के जरिए झीरम घाटी हमले की साजिशों की दोबारा गहन जांच शुरू की जाए, ताकि सच सामने आ सके।
