पीड़ित प्रताप सिंह यादव और हाइवे बनाने के लिए तोड़ा पेट्रोल पंप और बाद में लगाया गया नया पेट्रोल पंप।
रेवाड़ी में एनएच-11 (रेवाड़ी-नारनौल) का निर्माण एक बार फिर विवाद में आ गया है। NHAI पर बिना मुआवजा दिए पेट्रोल पंप तोड़कर जमीन कब्जाने और हाईवे बनाने का आरोप लगाया है।
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पीड़ित ने अब प्रशासन को चेतावनी पत्र लिखा है। जिसमें उसने आर्बिट्रेटर के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अब वह अपनी जमीन पर कब्जा लेने पर स्वतंत्र है। इतना ही नहीं इससे होने वाले नुकसान और कब्जा लेने पर होना वाले खर्च के लिए भी NHAI ही जिम्मेदार होगा।
पंप तोड़कर जबरदस्ती लिया कब्जा
ढाणी सान्तों निवासी प्रताप सिंह यादव ने बताया कि खोरी के पास उनका पेट्रोल पंप था। NHAI ने रेवाड़ी-नारनौल हाईवे के लिए जमीन का अधिग्रहण किया। हमारी कॉमर्शियल भूमि को एग्रीकल्चर का अवॉर्ड घोषित कर दिया। जबकि उन्होंने सीएलयू लेकर पेट्रोल पंप लगाया हुआ था। जिसे कोर्ट में केस होते हुए जबरदस्ती जुलाई 2022 में तोड़ दिया।
कब्जा लेने के लिए तामझाम के साथ पहुंची टीम। (फाइल फोटो)
आर्बिट्रेटर के आदेश भी नहीं माने
प्रताप सिंह यादव ने बताया कि आर्बिट्रेटर एवं उपायुक्त ने 11 फरवरी 2025, 1 जुलाई 2025 और 6 अगस्त 2025 को कॉमर्शियल माना। राजस्व विभाग को उसी अनुसार ब्याज सहित मुआवजा देने के आदेश दिए। इसके बावजूद अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं मिल रहा।
नोडल अधिकारी देंगे मुआवजा
प्रताप सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने NHAI से आर्बिट्रेटर के आदेश अनुसार मुआवजा मांगा। हमें जवाब मिला कि मुआवजा NHAI को नहीं, बल्कि नोडल अधिकारी को देना है। NHAI का दावा है कि उसने मुआवजा नोडल अधिकारी को जारी कर दिया है और आर्बिट्रेटर के फैसले को कोर्ट में भी चुनौती दी है।

कब्जा कार्रवाई के दौरान टूटा पेट्रोल पंप और मौके पर मौजूद मशीनरी।
डेढ़ करोड़ से अधिक बनती है राशि
प्रताप सिंह यादव ने बताया कि उनकी आर्बिट्रेटर के आदेशानुसार उनकी मुआवजा राशि 1 करोड़ 59 लाख 65 हजार 966 रुपए बनती है। जिसे राजस्व विभाग और NHAI ने जारी नहीं किया है। बिना मुआवजा दिए जमीन का अधिग्रहण करना गैरकानूनी है। हमें अपनी जमीन वापस लेने का अधिकार है।
कानूनी रूप से जमीन हमारी- प्रताप
प्रताप सिंह यादव ने बताया कि उन्होंने 23 दिसंबर को चेतावनी पत्र लिखा है। जिसमें आर्बिट्रेटर के 11 फरवरी 2025 के आदेश का हवाला दिया है। प्रशासन आठ साल से हमारी जमीन पर अवैध कब्जा किए हुए है। हमने डीसी रेवाड़ी, कमिश्नर गुरुग्राम, डीजीपी, मुख्य सचिव और गृह सचिव को पत्र लिखकर अपनी बात रख दी है।
जिसमें स्पष्ट किया है कि कानूनी रूप से जमीन अब हमारी है। हम कभी भी उसका कब्जा ले सकते हैं। जिससे होने वाले नुकसान व कब्जा कार्रवाई का पूरा खर्च उठाने के लिए प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।
