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हरियाणा कैबिनेट मीटिंग आज: CM इसमें कई एजेंडों पर चर्चा करेंगे; आईएएस एसोसिएशन के लंच में शामिल होंगे, पंचकूला भी जाएंगे – Haryana News



कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करेंगे।

साल के लास्ट डे में अनौपचारिक बैठक के तुरंत बाद हरियाणा सरकार ने आज औपचारिक कैबिनेट मीटिंग बुला ली है। इस बैठक में कई अहम नीतिगत निर्णय लिए जाने की संभावना है।इससे पहले 17 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में हांसी को जिला बनाए जाने का बड़ा फैसला लिया गया

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कैबिनेट बैठक के बाद आईएएस एसोसिएशन की ओर से हरियाणा निवास में लंच का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अगुवाई में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश के अधिकतर आईएएस अधिकारी मौजूद रहेंगे।

एक दिन पहले CM ने मंत्रियों से की चर्चा

कैबिनेट मीटिंग से एक दिन पहले अनौपचारिक मीटिंग में सरकार के अब तक के कामकाज का आत्म-मूल्यांकन किया गया। मंत्रियों के साथ अनौपचारिक बैठक सिर्फ बीते साल की समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें अगले वर्ष की प्राथमिकताओं, विभागीय जिम्मेदारियों और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं पर भी खुलकर चर्चा हुई। बैठक में अधिकतर मंत्री मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक मंत्री से उनके विभाग में वर्ष 2025 के दौरान किए गए कार्यों, लागू योजनाओं और नए प्रोजेक्ट्स की स्थिति पर सीधी रिपोर्ट मांगी।

नए साल में मंत्रियों को ग्राउंड में रहने की सलाह

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि अब केवल फाइलों में दर्ज उपलब्धियां नहीं, बल्कि मैदान में नजर आने वाला काम ही सरकार का पैमाना होगा। जिन योजनाओं की रफ्तार धीमी पाई गई, उन्हें लेकर मंत्रियों से स्पष्ट जवाबदेही तय करने को कहा गया।

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों से जुड़ी बजट घोषणाओं को प्राथमिकता दें और लंबित फैसलों को तेजी से अमलीजामा पहनाएं। इसके साथ ही, चुनावी संकल्प-पत्र में किए गए वादों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया।

2026 के एजेंडे पर मंथन हुआ

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये वादे राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता से किए गए वचन हैं, जिन्हें समयबद्ध कार्य योजना के तहत पूरा किया जाना चाहिए। बैठक में 2026 के लिए सरकार के एजेंडे पर भी मंथन हुआ।प्रशासनिक सुधार, विकास परियोजनाओं की गति, जनकल्याण योजनाओं की प्रभावशीलता और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को स्पष्ट रूप से कहा कि आने वाला वर्ष डिलीवरी का साल होना चाहिए, जहां नीतियों के बजाय नतीजे जनता के सामने हों।



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