नोएडा प्राधिकरण में अधिकारियों के साथ बैठक करते आईडीसी।
नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने शहर की ड्रेनों से बहने वाले घरेलू गंदे पानी के इन-सीटू और एक्स-सीटू ट्रीटमेंट करने की एक योजना को मंजूरी दी है। यह काफी समय से लंबित प्रस्ताव था, जिसका उद्देश्य कोंडली सिंचाई नाले और यमुना नदी में बिना ट्रीट किए सीवेज के प्रव
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यह मंजूरी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अभिषेक कुसुम गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में दी गई है। एनजीटी ने 3 अगस्त 2022 के आदेश में शहरी निकायों को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि बिना ट्रीट किए अपशिष्ट जल सिंचाई नालों में न छोड़ा जाए।
इसके बाद नोएडा प्राधिकरण ने ड्रेनों की स्थिति,प्रदूषण और ट्रीटमेंट के उपायों का आकलन करने के लिए नेशनल इनवायरमेंट इंजीनयिरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR–NEERI) को नियुक्त किया था। प्राधिकरण और नीरी के बीच 21 जुलाई 2022 को एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे।
नोएडा में शाहदरा ड्रेन
डी-1 ये डी-24 तक की कोडिंग नीरी ने नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र की करीब 30 ड्रेनों का अध्ययन किया, जिनमें से 24 ड्रेन सक्रिय पाई गईं। शेष ड्रेन या तो सूखी हैं या उनमें कोई डिस्चार्ज नहीं है। सक्रिय ड्रेनों को D1 से D24 तक कोड दिए गए और उनके प्रवाह व प्रदूषण स्तर के आधार पर वर्गीकृत किया गया।
कोर्ट के निर्देशों के तहत कुछ ड्रेनों को पहले ही इंटरसेप्ट किया जा चुका है। ड्रेन D20 को होजरी कॉम्प्लेक्स क्षेत्र के सीवेज पंपिंग स्टेशन (SPS) पर ट्रैप किया गया है। ड्रेन D6, D7 और D8 को सेक्टर-33 के संप वेल पर इंटरसेप्ट किया गया है। बोर्ड के अनुसार ड्रेन D2 फिलहाल सूखी है, जबकि ड्रेन D5 एसटीपी-54 से शोधित जल लेकर सेक्टर-23 में सिंचाई नाले में मिलती है, इसलिए इन पर अतिरिक्त कार्य की जरूरत नहीं है।
नए एसटीपी बनाने को भी मंजूरी बोर्ड ने जून 2026 तक अन्य ड्रेनों को इंटरसेप्ट करने की समयसीमा भी मंजूर की है। इसके तहत ड्रेन D10 और D11 को सेक्टर-50 स्थित एसटीपी पर और ड्रेन D18 को सेक्टर-106, भंगेल के एसपीएस पर ट्रैप किया जाएगा, ताकि सीवेज का उपचार सुनिश्चित हो सके। अधिक प्रदूषण भार वाली प्रमुख ड्रेनों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाने को भी हरी झंडी दी गई है।

नोएडा प्रवेश द्वार
MBBR और FABAS तक का होगा यूज नीरी द्वारा तैयार डीपीआर के अनुसार ड्रेन D3 (सेक्टर-22), D21 (गेझा रोड, बायोडायवर्सिटी पार्क के पास) और ड्रेन D24 (सेक्टर-126 से मयूर स्कूल की ओर) के लिए मूविंग बेड बायो फिल्म रिक्टर (एमबीबीआर) तकनीक आधारित एसटीपी बनाए जाएंगे। इन पर कुल लगभग 75 करोड़ रुपए की लागत आएगी और इन्हें जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इसके अलावा ड्रेन D22 (सेक्टर-44, महामाया फ्लाईओवर से पंचशील की ओर) के लिए FABAS तकनीक पर आधारित एसटीपी को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 127.5 करोड़ रुपए खर्च होंगे और इसे भी जून 2027 तक पूरा किया जाना है।
इन पर दिसंबर 2028 तक होगा काम अन्य प्रमुख ड्रेनों D4, D9, D12, D15, D16 और D19 के लिए नीरी बाद में डीपीआर सौंपेगा। इन पर उपचार कार्य अगले चरणों में होंगे, जिनकी समयसीमा दिसंबर 2028 तक रखी गई है। वहीं कम और मध्यम प्रदूषण वाली ड्रेनों D13, D14, D17 और D23 — के लिए बायो-रिमेडिएशन और फाइटो-रिमेडिएशन तकनीक अपनाई जाएगी।
