छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडी में पदस्थ रेंजर जीवन लाल भोंडेकर पर जंगल से बिना पंचनामा तैयार कर सागौन लकड़ी से अपने घर के लिए फर्नीचर बनाए जाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि रेंजर अपनी टीम के साथ वृक्षारोपण के लिए पौधे लेने डौंडी वन परिक्षेत्
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जहां से उन्होंने 44 नग सागौन की लकड़ी अपने गाड़ी में लोड करवाकर सिवनी गांव के फर्नीचर दुकान में भेजा और डाइनिंग ड्रेसिंग टेबल बनवाने का ऑर्डर दिया। मामला सामने आने के बाद एक्टीविस्ट की शिकायत पर रायपुर से राज्य उड़नदस्ता की टीम जांच के लिए पहुंची थी। जहां से कुछ लकड़ी जप्त की गई है। वहीं DFO ने मामले में जांच की बात कही है।

आरोप है कि यह लकड़ी बिना हैमरिंग, बिना किसी वैध सरकारी दस्तावेज और बिना चालान के बालोद काष्ठागार (डिपो) में रखवाया गया।
बिना पंचनामा बनाए लकड़ी ले गए अधिकारी
वन अधिकारियों के मुताबिक, जंगल से लकड़ी लाई जाती है तो पंचनामा तैयार करना होता है, लेकिन बिना पंचनामा तैयार कर रेंजर भोंडेकर ने लकड़ी डौंडी के काष्टागार भेजवाया। फिर वहां से सिवनी गांव के फर्नीचर मार्ट भेजा गया। फर्नीचर बनने के बाद जितनी लकड़ी बच गई अधिकारी उसे अपने साथ ले गए।

ग्राम सिवनी बस स्टैंड स्थित विश्वकर्मा फर्नीचर मार्ट में वन विभाग का रेंजर बनवा रहे थे अवैध सागौन के फर्नीचर।
रडार में अधिकारी कर्मचारी
इस प्रकरण में जिले के वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी राज्य स्तरीय जांच टीम के रडार पर आ गए हैं। वहीं, फर्नीचर मार्ट संचालक कमलाकांत विश्वकर्मा ने भी वन विभाग के द्वारा सागौन की लकड़ी छोड़ने की बात की पुष्टि की है।

रेंडर ने डायनिंग टेबल और ड्रेसिंग टेबल बनाने कहा
विश्वकर्मा फर्नीचर मार्ट के संचालक कमलाकांत विश्वकर्मा ने बताया कि सागौन की लकड़ी किसके द्वारा लाई गई। इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। लेकिन उन्हें डिविजन ऑफिस बुलाया गया था।
जहां एक रेंजर भांडेकर ने डायनिंग टेबल और दो ड्रेसिंग टेबल बनाने कहा और फर्नीचर तैयार कर सौंपने के बाद भुगतान किया गया। अधूरा कार्य शेष था। जांच के लिए रायपुर से पहुंची उड़नदस्ता की टीम बचे हुए सागौन चिरान को अपने साथ ले गए।
जानिए क्या है पूरा मामला
शिकायतकर्ता जीशान सिद्दीकी के अनुसार, बालोद उड़नदस्ता की टीम 30 अक्टूबर को वृक्षारोपण के लिए पौधे लेने डौंडी वन परिक्षेत्र स्थित आवारी नर्सरी पहुंची थी।
इसी दौरान डौंडी रेंजर जीवन लाल भोंडेकर द्वारा विभागीय माजदा वाहन को साथ लेकर कर्मचारियों को बीटेझर जंगल से लकड़ी लाने भेजा गया। आरोप है कि यह लकड़ी बिना हैमरिंग, बिना किसी वैध सरकारी दस्तावेज और बिना चालान के मंगवाई गई, जिसे बाद में बालोद काष्ठागार (डिपो) में रखवाया गया।
यहीं से लकड़ी को आरा मिल में चिरान कराकर बालोद से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित विश्वकर्मा फर्नीचर मार्ट में फर्नीचर तैयार करने के लिए भेजा गया। बताया जा रहा है कि यहां दो ड्रेसिंग टेबल और एक डायनिंग टेबल बनाने का ऑर्डर दिया गया था।
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब शिकायतकर्ता ने इसकी जानकारी रायपुर वन विभाग के सीनियर अधिकारियों को दी। शिकायत के बाद राज्य उड़नदस्ता की टीम ने कार्रवाई करते हुए फर्नीचर मार्ट से डायनिंग टेबल से संबंधित सागौन लकड़ी के 44 नग चिरान जब्त कर लिए हैं।
डौंडी रेंजर सहित बीट गार्ड पर संलिप्तता का आरोप
शिकायककर्ता के अनुसार निजी उपयोग के लिए सागौन पेड़ की अवैध कटाई कर फर्नीचर मार्ट भिजवाने में डौंडी परिक्षेत्र के रेंजर जीवन लाल भांडेकर, बीट गार्ड ईश्वर कुमार व अन्य कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है।
हालांकि अभी आरोप तय नहीं हो पाया है। जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं इस संबंध में रेंजर जीवनलाल भांडेकर मीडिया में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
रायपुर के अधिकारियों ने की जांच
शिकायत के बाद जांच के दौरान टीम ने 44 नग सागौन चिरान, कुल मात्रा 0.057 घनमीटर, तथा तैयार फर्नीचर जब्त किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रकरण से जुड़े कुछ स्तरों पर अधिकारियों द्वारा जानकारी देने से बचने का प्रयास किया गया। जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
फिलहाल सीनियर अधिकारी खुद बालोद पहुंचकर पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया जाएगा।
बता दें कि इस मामले में पीओआर क्रमांक 58/04 के तहत 44 नग जब्त सागौन चिरान, कुल मात्रा 0.057 घनमीटर दर्ज की गई है।
जानिए क्या कहते हैं जिम्मेदार



राज्य स्तरीय जांच टीम को हरसंभव मदद कर रहे – DFO
बालोद डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि बालोद वन मंडल अंतर्गत सिवनी क्षेत्र के एक फर्नीचर मार्ट में शिकायत के माध्यम से कुछ सागौन की लकड़ी मिलने की सूचना मिली थी। अभी इसकी जांच राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम कर रही है।
टीम ने विभिन्न साइट्स विजिट कर बयान, साक्ष्य, फोटोग्राफ्स कलेक्ट किया है। जांच में टीम को हरसंभव मदद कर रहें है। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार अफसर, कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है।
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