औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड स्थित महाराजगंज ठाकुरबाड़ी परिसर में आज बाबा बासुकीनाथ सेवा समिति के तत्वावधान में नवां सामूहिक विवाह समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। इस अवसर पर कुल 23 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार और मांगलिक गीतों के बीच विवाह बंधन में बंधे और जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। पूरे प्रखंड क्षेत्र में मांगलिक गीतों और आचार्यों के वैदिक मंत्रों की गूंज से माहौल पूरी तरह धार्मिक और उत्सवी बना रहा। बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन के साक्षी बने और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह, भाजपा के वरीय नेता सुनील कुमार सिंह, जन सुराज नेता मनीष कश्यप, भाजपा जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंह चंद्रवंशी और आयोजन समिति के अध्यक्ष वरुण कुमार सिंह उर्फ जब्बर सिंह ने संयुक्त रूप से किया। कन्या का विवाह कराना सबसे बड़ा धर्म कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने कहा कि कन्या का विवाह कराना सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए दो पवित्र आत्माओं का एक बंधन में बंधना आवश्यक होता है। एक बेटे की शादी कराना भी एक प्रकार का यज्ञ होता है, लेकिन जब एक साथ दर्जनों बेटियों की शादी कराई जाती है, तो वह महायज्ञ का रूप ले लेता है। सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी है। हर माता-पिता की इच्छा होती है कि वे अपने बेटे-बेटी की शादी धूमधाम से करें, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई परिवार ऐसा नहीं कर पाते। ऐसे में सामूहिक विवाह समारोह गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा बनता है। यहां हजारों लोगों का आशीर्वाद नवदंपतियों को मिलता है, जो उनके जीवन को सुखमय बनाने में सहायक होता है। समानता और भाईचारे का संदेश देते पूर्व सांसद ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में समानता और भाईचारे का संदेश देते हैं। इस समारोह में किसी प्रकार का जातीय भेदभाव नहीं होता और सभी धर्मों और वर्गों के लोग इसमें भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह का आयोजन करना और इसमें सहयोग देना वास्तव में सौभाग्य की बात है।अपने संबोधन में उन्होंने डाल्टेनगंज–पटना पथ को फोर लेन बनवाने की बात भी दोहराई। इस सड़क के निर्माण को लेकर जनता का विश्वास आज भी उनसे जुड़ा हुआ है और वे जनता की ताकत से इस कार्य को पूरा कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।इस मौके पर जन सुराज नेता मनीष कश्यप ने नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। उन्होंने कहा कि यदि सास अपनी बहू को बेटी की तरह और बहू अपनी सास को मां की तरह सम्मान दें, तो घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। उन्होंने कहा कि स्वर्ग में जाने की इच्छा हर किसी को होती है, लेकिन यदि परिवार में प्रेम, सम्मान और आपसी समझ हो तो घर में ही स्वर्ग जैसी अनुभूति हो सकती है। सदस्यों को पूर्व सांसद ने किया सम्मानित कार्यक्रम के दौरान पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने आयोजन समिति से जुड़े सभी सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में शादी समारोह में अत्यधिक खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जिससे कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। कई बार आपसी तालमेल की कमी के कारण पारिवारिक विवाद बढ़कर न्यायालय तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में सामूहिक विवाह समारोह सादगी, सामाजिक समरसता और दहेज मुक्त विवाह का संदेश देता है।वक्ताओं ने कहा कि दो अपरिचित व्यक्तियों के बीच सामंजस्य स्थापित कर दहेज रहित विवाह कराना वास्तव में बहुत बड़ी सामाजिक सेवा है। बाबा बासुकीनाथ सेवा समिति जैसी संस्थाएं समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रही हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समय की बर्बादी, दान-दहेज और फिजूलखर्ची जैसी कुरीतियों से समाज को मुक्ति मिल सकती है। अंतर्राज्यीय बना विवाह समारोह समिति के सचिव राकेश पाठक ने बताया कि इस वर्ष का सामूहिक विवाह समारोह अंतर्राज्यीय स्वरूप का हो गया। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड और मध्यप्रदेश से भी दूल्हा-दुल्हन इस समारोह में शामिल हुए। कुल 23 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। वर-वधु को दिए गए उपहार विवाह संपन्न होने के बाद आयोजन समिति की ओर से सभी नवविवाहित जोड़ों को उपयोगी उपहार प्रदान किए गए। इनमें बर्तन, बिछावन, पलंग, ट्रॉली बैग, सिलाई मशीन, कपड़े, साड़ी व अन्य आवश्यक सामान शामिल थे।आयोजन समिति के अध्यक्ष वरुण कुमार सिंह उर्फ जब्बर ने बताया कि समिति पिछले नौ वर्षों से लगातार सामूहिक विवाह का आयोजन कर रही है। इस आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों का भी भरपूर सहयोग मिलता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज से बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त करना है।उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग अपनी बेटियों की शादी में आडंबर और दिखावे के कारण जमीन-जायदाद तक बेच देते हैं। सामूहिक विवाह जैसे आयोजन से ऐसे परिवारों को राहत मिलती है और समाज में सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा को बढ़ावा मिलता है।
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