डीग में होली के बाद सोमवार को बास्योडा पर्व के अवसर पर पारंपरिक हुरंगा महोत्सव का आयोजन किया गया। नगर परिषद द्वारा मुख्य बाजार में आयोजित इस उत्सव में पारंपरिक नृत्य, लोकगायन और लठ्ठमार होली मुख्य आकर्षण रहे।
महोत्सव की शुरुआत लक्ष्मण मंदिर के महंत पंडित मुरारीलाल पाराशर ने गणेश वंदना और पूजा-अर्चना के साथ की। मंदिर परिसर में होरी और रसिया गायन हुआ, जिसमें उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दोपहर में लक्ष्मण मंदिर के सामने नगर परिषद कार्यालय परिसर में मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें शहर और आसपास के गांवों से आई बम्ब पार्टियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने बम्ब की थाप पर ब्रज के लोकगीत और रसियाओं पर नृत्य किया।
शाम को तेलीपाड़ा से विवेक पाराशर और काव्य पाराशर तन्नू के नेतृत्व में राधा-कृष्ण की सजीव झांकी के साथ हुरयारिनों की टोली पहुंची। इस दौरान हुरयारिनों ने हुरयारों पर लाठियां बरसाईं। इस पारंपरिक दृश्य को देखने के लिए शहर के लोग मकानों और छतों पर एकत्र हुए।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बम्ब पार्टियों और कलाकारों को नगर परिषद की ओर से सम्मानित किया गया। कमेटी के छत्रपाल सिंह गुर्जर और राजाराम गुर्जर ने उन्हें नगद पुरस्कार प्रदान किए। हुरंगा महोत्सव के अवसर पर लक्ष्मण मंदिर परिसर में महंत पंडित मुरारीलाल पाराशर के सानिध्य में होरी पद गायन का भी आयोजन हुआ। भजन गायकों ने ब्रज की पारंपरिक होरी प्रस्तुत की।
इससे पूर्व सुबह भूड़ा गेट स्थित शीतला माता मंदिर (शेड़ का मढ़) पर महिलाओं ने शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाया। उन्होंने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। महिलाएं पारंपरिक थाल लेकर गीत गाते हुए मंदिर पहुंचीं, जहां पूजा-अर्चना के लिए कतारें लगी थीं।
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