अनूपपुर के जैतहरी की ग्राम पंचायत परसवार (करहीबाह) में नगरपालिका के कचरा डंप किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। शनिवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर ग्राम पंचायत सरपंच और कलेक्टर को शिकायती आवेदन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि आवंटित भूमि पर कचरा फेंकने से गांव के पर्यावरण और मवेशियों के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। चारागाह और खेती पर प्रदूषण ग्रामीणों का आरोप है कि नगरपालिका यहां घरेलू कचरे के साथ-साथ खतरनाक प्रदूषित अपशिष्ट भी फेंक रही है। यह 8 एकड़ भूमि गांव के सैकड़ों मवेशियों के लिए मुख्य चारागाह है। कचरे में मौजूद प्लास्टिक और जहरीले पदार्थों को खाने से मवेशियों के बीमार होने और असमय मृत्यु की आशंका बढ़ गई है। साथ ही, तेज हवाओं से उड़ती पॉलीथिन और राख किसानों के खेतों को भी प्रदूषित कर रही है। आबादी बढ़ने से बदला डंपिंग स्थल नगरपालिका अध्यक्ष अंजुलिका शैलेंद्र सिंह ने बताया कि पहले तिपान नदी किनारे सिंदूरी गांव में कचरा डंप किया जा रहा था। लेकिन वहां आबादी बढ़ने और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद फरवरी माह में कचरा डालना बंद कर दिया गया था। इसके बाद कलेक्टर अनूपपुर द्वारा करहीबाह में यह 8 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। नपा अध्यक्ष बोलीं- आबादी से दूर है नया स्थल वहीं अध्यक्ष अंजुलिका शैलेंद्र सिंह के अनुसार, करहीबाह स्थित नया स्थल आबादी क्षेत्र से दूर है और वहां केवल एक-दो मकान ही हैं। उन्होंने कहा कि खेत भी इस स्थल से पर्याप्त दूरी पर हैं, इसलिए प्रदूषण का खतरा कम है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन (रिसाइकिलिंग) नहीं किया जा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है। संसाधनों के अभाव में बिगड़ रही व्यवस्था उल्लेखनीय है कि नगरपालिका अनूपपुर से प्रतिदिन 5 से 8 टन कचरा निकलता है। पूर्व में सिंदूरी गांव के पास रिसाइकिलिंग की व्यवस्था थी, लेकिन वर्तमान डंपिंग स्थल पर संसाधनों की कमी और अव्यवस्थित प्रबंधन को लेकर अब करहीबाह के ग्रामीण भी लामबंद हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि इस गोचर भूमि को कचरा मुक्त रखा जाए।
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