![]()
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में फर्जी भूमिधारक बनकर जालसाजों ने 440 करोड़ रुपए हड़प लिए। यह आंकड़ा प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे में सामने आया है। राज्य स्तर पर फर्जीवाड़ा उजागर होने पर राज्य व केन्द्र सरकार ने छह लाख संदिग्ध किसान चिन्हित किए हैं और उनकी किस्त रोक दी है। अब संदिग्ध खाताधारकों का फिजिकल वेरिफिकेशन होगा। इसके लिए केन्द्र सरकार एसओपी तैयार कर रही है। सरकार ने किसानों के लिए फार्मर आईडी कार्ड जारी किए हैं। यह कार्ड उन किसानों के लिए है, जिनके नाम जमीन है। इसके डेटा को पीएम किसान सम्मान निधि के डेटा से क्रॉस चेक किया गया। फार्मर आईडी नहीं होने वालों को संदिग्ध माना गया है। इसके साथ जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन निरस्त होने के बाद दोबारा एक्टिव किया गया, उनसभी को भी संदिग्ध माना है। इस आधार पर राज्य स्तर पर 2 लाख और केन्द्र सरकार के स्तर पर 4 लाख खातों को संदिग्ध मान कर किस्त रोक दी गई है। कुछ खाते इनमें कॉमन भी हैं। दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि में फर्जीवाड़ा पहली बार वर्ष 2021 में उजागर हुआ जब सहकारी विभाग ने जालोर में एफआईआर दर्ज करवाई, जिसमें बताया कि 33 हजार फर्जी किसानों ने योजना में रजिस्ट्रेशन करवाया। हालांकि इसमें पुलिस ने बिना तफ्तीश के ही एफआर लगा दी। इसके बाद झालावाड़ पुलिस ने गत वर्ष एक गिरोह को पकड़कर फर्जीवाड़े का खुलासा किया। इसके बाद प्रशासन के साथ मिलकर सभी जिलों में सर्वे किया गया। सर्वे रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आने के बाद सरकार ने फर्जीवाड़े की जांच एसओजी को दी है। रात में आवेदन स्वीकार किए गए तो एक ही नंबर से 2 लाख रजिस्ट्रेशन हुए 4 लाख संदिग्ध डेटा 1. रुकी हुई किस्त के आवेदन रात में स्वीकार हुए। इस तरह के 23942 मामलों की पड़ताल में 85% गलत पाए गए, घोटाले का आंकड़ा 54 करोड़ से अधिक। 2. गिरफ्तार आरोपियों के पास 52992 डेटा मिले। पड़ताल में 80 प्रतिशत गलत पाए गए, घोटाले का आंकड़ा 14 करोड़ रुपए । 3. एक ही नम्बर से एक से अधिक रजिस्ट्रेशन। ऐसे 215000 मामले सामने आए। सर्वे में 95% गलत पाए गए, घोटाले का आंकड़ा 213 करोड़ रुपए। 4. सभी तरह के संदिग्ध डेटा 398295 मिले। सर्वे में इनमें से 56.67% गलत पाए गए। घोटाले का आंकड़ा 440 करोड़ का सामने आया। झालावाड़ में दर्ज FIR एसओजी को भेजी प्रशासन के सर्वे में 440 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी का आंकड़ा मिला था। इसके बाद सरकार सक्रिय हुई है। आनन-फानन में झालावाड़ में दर्ज एफआईआर को पड़ताल के लिए अब एसओजी को भेजा गया है। यहां उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी को जांच अधिकारी बनाने के साथ उनके सहयोग के लिए एसआईटी भी बनाई गई है। हालांकि अन्य जिलों में दर्ज पुरानी 6 एफआईआर पर किसी का ध्यान नहीं है। उन फाइलों में अभी पुलिस रिकॉर्ड भी नहीं ले सकी है। स्थिति यह है कि वर्ष 2021 में पहली बार दर्ज हुई एफआईआर में जालोर पुलिस ने बिना तफ्तीश के ही एफआर लगा दी थी। जांच अधिकारी ने बस इतना लिखा कि योजना में गलत तरीके से लिया गया पैसा रिकवर करने का प्रावधान है। थानों में पड़ी हैं फर्जीवाड़े की फाइलें 1. शाहपुरा केस नम्बर 23-22
परिवादी तहसीलदार सुरेश कुमार।
आरोप : सरकारी कर्मचारियों की आईडी हैक कर योजना की रकम हड़पी। 2. थानागाजी (अलवर) केस नंबर 39-22
परिवादी तहसीलदार अक्षयप्रेम चेयरवाल ।
आरोप : 33 हजार फर्जी किसानों ने सरकारी रकम हड़पी। 3. जालोर कोतवाली
परिवादी, डिप्टी रजिस्ट्रार (सहकारी विभाग) सुनील वीरभान ।
आरोप : 33 हजार फर्जी किसानों ने लाखों रुपए हड़पे। 4. मारवाड़ जंक्शन केस नंबर 43-25
परिवादी तहसीलदार दीपक सांखला
आरोप : 65 फर्जी खातेदारों ने जालसाजी कर सरकारी रकम हड़पी। 5. देसूरी (पाली)
परिवादी तहसीलदार हरेन्द्र चौहान।
आरोप : 32 हजार फर्जी किसानों ने ली लाखों की सरकारी रकम। 6. रानी (पाली) परिवादी तहसीलदार मनोहर सिंह
आरोप : 33 हजार फर्जी किसानों ने हड़पे लाखों रुपए। किसान सम्मान निधि में सालाना मिलते हैं 9 हजार केन्द्र सरकार ने यह योजना वर्ष 2019 में शुरू की थी। इसमें भूमि धारक किसान को दो-दो हजार रुपए की तीन किस्त हर साल मिलती है। राज्य सरकार ने इसमें तीन हजार रुपए और बढ़ाए हैं। अब हर वर्ष 9 हजार रुपए मिल रहे हैं। “जिनकी किस्त रुकी है उनके फिजिकल वेरिफिकेशन होंगे। यह वेरिफिकेशन केंद्र सरकार की ओर से एसओपी तैयार होने के बाद कराए जाएंगे।”
-विकास जैफ, प्रभारी स्टेट नोडल ऑफिस, पीएम किसान सम्मान निधि योजना “राजस्थान में पीएम सम्मान निधि में गड़बड़ी की जांच करने के लिए फाइल हमारे पास भेजी गई है। फिलहाल, एडिश्नल एसपी के नेतृत्व में डीएसपी राम सिंह मामले की जांच कर रहे हैं। जल्द ही सरकार को रिपोर्ट भेज देंगे।”
-विशाल बंसल, एडीजी एसओजी
Source link
