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तीन नाबालिगों ने किया गैंगरेप, जमानत नही: जज बोलीं यह हीनियस क्राइम, जमानत पीड़िता के साथ अन्याय, बेहोशी की हालत में छोड़ा था – Chandigarh News

तीन नाबालिगों ने किया गैंगरेप, जमानत नही:  जज बोलीं यह हीनियस क्राइम, जमानत पीड़िता के साथ अन्याय, बेहोशी की हालत में छोड़ा था – Chandigarh News

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के एक मामले में शामिल नाबालिग आरोपी की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता इतनी अधिक है कि आरोपी को रिहा करना न केवल समाज के लिए खतरा है, बल्कि यह पीड़िता के साथ भी अन्याय होगा। यह है मामला यह पूरी घटना 19 जनवरी, 2025 को हुई पटियाला के समाना की है। 17 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि तीन नाबालिग युवक उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर एक सुनसान घर में ले गए थे। वहां तीनों ने बारी-बारी से उसके साथ दरिंदगी की और उसे बेहोशी की हालत में छोड़कर फरार हो गए। पुलिस जांच में सामने आया कि घटना के समय मुख्य आरोपियों में से एक की उम्र 17 वर्ष 1 महीना थी। नाबालिग के वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष है। उसे सिर्फ इसलिए फंसाया गया है क्योंकि उसकी दोस्ती मुख्य आरोपी से थी। वकील ने उम्र का हवाला देते हुए सुधार की गुंजाइश बताई। सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह केवल दोस्ती का मामला नहीं है। नाबालिग इस जघन्य अपराध की प्लानिंग और उसे अंजाम देने में बराबर का भागीदार था। हाईकोर्ट की 3 बड़ी टिप्पणियां 1. बुरी संगत का असर (Social Investigation Report) : सामाजिक जांच रिपोर्ट (SIR) से खुलासा हुआ कि नाबालिग ने यह अपराध अपने दोस्तों के प्रभाव में आकर किया। अदालत ने माना कि वह नकारात्मक प्रभावों के प्रति बेहद संवेदनशील है और बाहर आने पर फिर से अपराधियों के संपर्क में आ सकता है। 2. सुधार बनाम सजा: कोर्ट ने कहा कि हालांकि किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) एक सुधारात्मक कानून है, लेकिन इसकी धारा 12 स्पष्ट करती है कि यदि जमानत देने से न्याय के उद्देश्यों की विफलता (Ends of Justice) होती है, तो राहत नहीं दी जा सकती। 3. समाज में गलत संदेश: हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि गैंगरेप जैसा अपराध ‘अत्यंत गंभीर और जघन्य’ है। ऐसे आरोपी को छोड़ना न केवल समाज में गलत संदेश भेजेगा, बल्कि पीड़िता को डराने-धमकाने का खतरा भी पैदा करेगा। निचली अदालतों का फैसला 1. 20 मार्च 2025 को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।अदालत ने कहा कि आरोपी “पीयर ग्रुप इन्फ्लुएंस” में अपराध में शामिल हुआ और उसकी रिहाई से समाज पर नकारात्मक असर पड़ेगा। 2. 14 अगस्त 2025 को सेशन कोर्ट ने भी अपील खारिज करते हुए कहा कि जमानत देने से पीड़िता पर दबाव बढ़ेगा और समाज में गलत संदेश जाएगा।



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