भारत में मनोरंजन देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है। लंबी फिल्में और टीवी सीरियल की जगह अब लोग मोबाइल पर माइक्रो-ड्रामा ज्यादा देख रहे हैं। इन शोज के एपिसोड 2 मिनट से भी कम के होते हैं और लोग इन्हें दिन के छोटे-छोटे ब्रेक में बिंज-वॉच कर रहे हैं। यह मुख्य रूप से मोबाइल फोन के लिए वर्टिकल फॉर्म में डिजाइन किया गया है, जिसे कहीं भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। निवेश फर्म लुमिकाई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में माइक्रो-ड्रामा का बाजार अभी करीब 2,856 करोड़ रुपए का है, जो 2030 तक 42,844 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। 68% ऑडियंस छोटे शहरों से, 40% दर्शक महिलाएं एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत में हर महीने करीब 4 करोड़ यूजर माइक्रो-ड्रामा देखते हैं। करीब 68% ऑडियंस टियर-2/टियर-3 शहरों से आती है, जहां सिनेमाघर कम, टीवी कमजोर और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की पहुंच सीमित रहती है। करीब 40% दर्शक महिलाएं हैं। बड़े प्रोड्यूसर व एआई से बढ़ा निवेश इसमें अब बड़े प्रोड्यूसर भी निवेश कर रहे हैं। मुकेश अंबानी की कंपनी जियोस्टार ने ‘तड़का’ नाम से प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिस पर 100 से ज्यादा शोज हैं। जी एंटरटेनमेंट और बालाजी टेलीफिल्म्स भी इस फॉर्मेट में उतर चुके हैं। कई कंपनियां अब एआई की मदद से इसे 1 हजार प्रति माह तक ले जाने की योजना बना रही हैं। ओटीटी से 90% सस्ता माइक्रो-ड्रामा माइक्रो-ड्रामा फिल्ममेकर के मुताबिक माइक्रो-ड्रामा का पूरा सीजन बनाना ओटीटी सीरीज के मुकाबले 70-90% सस्ता पड़ता है। शूटिंग 3-4 दिन में हो जाती है। लागत करीब 15 हजार से 20 हजार रुपए प्रति मिनट कंटेंट बताई गई है। पूरा सीजन 10-15 लाख रुपए में बन जाता है, जिसे 20 से 50 रुपए महीने की सब्सक्रिप्शन से उठाया जाता है।
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