दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने त्वरित सुनवाई की याचिका स्वीकार कर ली है। मामले की अगली सुनवाई अब 26 मई को होगी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को सूचीबद्ध किया। हालांकि, सरकारी वकील द्वारा समय मांगे जाने के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार, राजेंद्र भारती की ओर से 4 मई को जल्द सुनवाई के लिए आवेदन लगाया गया था, जो 6 मई को कोर्ट के सामने पेश हुआ। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली। इससे पहले मामले की सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय थी, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। कपिल सिब्बल ने रखी पक्ष की दलील पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने मामले की जल्द सुनवाई की मांग करते हुए भारती का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत से जल्द तारीख देने का आग्रह किया। एफडी हेराफेरी मामले में दोषी दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार दिया था। कोर्ट ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई थी और जमानत दे दी थी। उन्हें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में दोषी माना गया है। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में 3-3 साल और 2 साल की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद उनकी विधायकी पर संकट खड़ा हो गया है। फर्जी दस्तावेजों से निकाला गया था एफडी का ब्याज मामले की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई थी। श्याम सुंदर संस्थान की अध्यक्ष सावित्री श्याम, जो राजेंद्र भारती की मां हैं, उन्होंने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी। 1998 से 2001 के बीच राजेंद्र भारती बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे। वे श्याम सुंदर संस्थान के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य भी थे। आरोप है कि उन्होंने बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी। इसके बाद 1999 से 2011 के बीच 13.5 प्रतिशत की दर से हर साल 1 लाख 35 हजार रुपए ब्याज के रूप में निकाले गए। भाजपा नेता ने उठाया था मामला 3 मार्च 2011 को बैंक अध्यक्ष बने भाजपा नेता पप्पू पुजारी ने इस मामले को सामने लाया। सहकारिता विभाग के तत्कालीन संयुक्त पंजीयक अभय खरे की जांच में एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज हुई। 2012 में भारती ने बैंक से एफडी की राशि मांगी, लेकिन ऑडिट आपत्ति के चलते भुगतान रोक दिया गया। इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाशचंद्र जांगड़े की पहल पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया। कोर्ट के आदेश पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ। 2 अप्रैल को सदस्यता खत्म होने का आदेश कानूनी प्रावधानों के अनुसार, 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होने पर विधायकी जा सकती है। राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई गई है। सजा के बाद विधानसभा ने आदेश जारी कर उनकी सदस्यता खत्म कर दी और दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट से सजा पर स्टे मिलने पर उनकी सदस्यता बच सकती है। विधायक के बेटे अनुज भारती ने बताया कि उनके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। अब फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी और जमानत के लिए आवेदन दिया जाएगा। राजेंद्र भारती को दोषी ठहराए जाने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यदि उनकी सदस्यता समाप्त होती है, तो सीट खाली होने पर उपचुनाव कराए जा सकते हैं। उमंग सिंघार ने सरकार पर लगाए आरोप नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा सरकार कांग्रेस विधायकों को निशाना बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने मामलों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी लिखा कि पूर्व भाजपा विधायक नरोत्तम मिश्रा का पेड न्यूज मामला अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जबकि राजेंद्र भारती के मामले में तेजी दिखाई गई। उमंग सिंघार ने विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा, सेमरिया विधायक अभय मिश्रा और भोपाल मध्य विधायक आरिफ मसूद के मामलों का भी जिक्र करते हुए सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया।
इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म विधानसभा सचिवालय ने दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने का आदेश जारी कर दिया है। गुरुवार देर रात करीब साढ़े दस बजे प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा विधानसभा पहुंचे। इसके बाद सचिवालय खोलकर भारती की सीट रिक्त घोषित करने का पत्र चुनाव आयोग को भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। पूरी खबर पढ़ें…
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