फाजिल्का की अनाज मंडी में इन दिनों गेहूं की लिफ्टिंग (उठान) को लेकर आढ़ती और ट्रांसपोर्टर आमने-सामने आ गए हैं। आढ़तियों का कहना है कि मंडी से गेहूं की लिफ्टिंग समय पर नहीं हो रही है, जिससे गेहूं के बैग खुले में पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। इस देरी के कारण गेहूं की नमी कम हो रही है और वजन में कमी आ रही है, जिसका खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ रहा है। फिलहाल, इस विवाद की वजह से अनाज मंडी में गेहूं के अंबार लगे हुए हैं और लिफ्टिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। आढ़तियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए ताकि गेहूं का उठान समय पर हो सके और भविष्य में होने वाली ‘शॉर्टेज’ की जिम्मेदारी तय की जाए। यदि समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। आढ़ती बोले- लिफ्टिंग धीमी होने से हो रहा नुकसान फाजिल्का आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष गोल्डी सचदेवा ने प्रशासन से गुहार लगाते हुए बताया कि मंडी में अब तक करीब 15 लाख गेहूं के बैग आ चुके हैं, लेकिन उनमें से 7 लाख बैग भी नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसपोर्ट ठेकेदार की सुस्ती के कारण गेहूं सूख रहा है। जब वजन कम होता है, तो खरीद एजेंसियां आढ़तियों को जिम्मेदार ठहराती हैं, जबकि इसके लिए सीधा जिम्मेदार ट्रांसपोर्टर है। ट्रासपोर्टर्स बोले- बेबुनियाद आरोप लगा रहे आढ़ंती दूसरी ओर, ट्रांसपोर्टर गोपाल अग्रवाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि लिफ्टिंग का काम तेजी से चल रहा है और अब तक 56 प्रतिशत गेहूं मंडी से उठाया जा चुका है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि आढ़तियों ने मंडी में पड़े गेहूं की सही देखभाल नहीं की, जिससे उसकी गुणवत्ता खराब हो गई है और इसी वजह से गोदामों में उनकी गाड़ियां रिजेक्ट होकर वापस आ रही हैं। ट्रांसपोर्टर का दावा है कि आढ़ती अपनी लापरवाही छिपाने के लिए उन पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गेहूं की क्वालिटी खराब होने से उन्हें खुद भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि गाड़ियां गोदाम से वापस लौट रही हैं। इस आपसी खींचतान के कारण मंडी में काम कर रहे मजदूरों और किसानों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
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