हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में किन्नरों के दो गुटों के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। करीब छह महीने से जारी इस विवाद के बीच मंगलवार को महक किन्नर ने अपने समर्थकों के साथ पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद बताया। महक किन्नर ने कहा कि कुछ लोग उनके खिलाफ गलत बातें फैलाकर उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और वह हर आरोप का जवाब सबूतों के साथ देने को तैयार हैं। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर मेडिकल जांच करवाने की भी बात कही। वसूली का कोई आरोप नहीं महेंद्रगढ़ में मंगल मुखी अखाड़ा नारनौल, महेंद्रगढ़ से जुड़ी महक किन्नर ने पत्रकार वार्ता में बताया कि वह पिछले 15 से 20 वर्षों से महेंद्रगढ़ शहर और आसपास के इलाकों में शांतिपूर्ण और ईमानदारी से काम कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि आज तक उन पर जबरन वसूली या किसी अन्य तरह का कोई आरोप नहीं लगा है। 2007 में हुआ था समझौता महक किन्नर के अनुसार, 25 अगस्त 2007 को एक लिखित समझौता (एग्रीमेंट) हुआ था। यह समझौता बुलबुल किन्नर और रानी बामणी किन्नर के बीच हुआ था, जिसमें बुलबुल किन्नर ने महेंद्रगढ़ जिले के इलाके का पूरा अधिकार रानी बामणी किन्नर को सौंपा था। इस एग्रीमेंट पर दोनों पक्षों की तस्वीरें, हस्ताक्षर और फरीदकोट, बठिंडा, कोलकाता, करनाल, नारनौल और फतेहाबाद के किन्नर समाज के वरिष्ठ सदस्यों सहित कई गवाहों के हस्ताक्षर भी हैं। उन्होंने इसे अपना कानूनी हक बताया। रचना का असली नाम रोहतास पत्रकारों से बातचीत में महक किन्नर ने दावा किया कि जिस व्यक्ति को “रचना” के नाम से महेंद्रगढ़ का जिम्मा दिया गया है, उसका असली नाम रोहतास है। उन्होंने आरोप लगाया कि वह गोहाना के पास का रहने वाला एक शादीशुदा व्यक्ति है, जिसके बच्चे भी हैं। महक ने कहा कि वह मीडिया, प्रशासन और जनता के सामने इस संबंध में सबूत पेश कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह गलत के खिलाफ आवाज उठाती रहेंगी, भले ही इसके लिए उन्हें किसी भी परेशानी का सामना क्यों न करना पड़े।
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