नूंह जिले के तावडू उपमंडल के गांव सेवका में बुधवार को पंचायत और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नौ मकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान लगभग 1500 गज पंचायती जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के बाद दलित समाज में नाराजगी देखी गई। यह कार्रवाई दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई, जिसके दौरान पूरा गांव पुलिस छावनी में बदल गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट तपेश कुमार की निगरानी में बुलडोजर ने मकानों को गिराना शुरू किया। आरोप- गांव में और भी अवैध कब्जे, लेकिन इसी को तोड़ा जिन परिवारों के मकान तोड़े गए, उनमें हरलाल, प्रभु, गुलाब, हीरा और बिरसिंह सहित कई दलित परिवार शामिल हैं। पीड़ित परिवारों ने पंचायत पर आरोप लगाया कि गांव में अन्य स्थानों पर भी अवैध कब्जे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल दलित समाज के खिलाफ की गई। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई पंचायत चुनाव में सरपंच का समर्थन न करने का बदला है, जबकि प्रभावशाली लोगों के कब्जों पर पंचायत चुप है। सरपंच ने कहा- कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई वहीं, सरपंच पति इरशाद ने इस कार्रवाई को पूरी तरह कानूनी बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम कोर्ट के आदेश पर उठाया गया है। इरशाद ने यह भी दावा किया कि पंचायत अब तक करीब तीन एकड़ पंचायती जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करा चुकी है और भविष्य में भी अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। पीड़ित परिवारों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
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