पाली नगर निगम में बुधवार को आयुक्त नवीन भारद्वाज अपने ऑफिस में काम करते हुए।
जोधपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम आयुक्त को उनकी सरकारी गाड़ी फिर से सौंपी गई और ऑफिस के ताले भी खोले गए। ऐसे में बुधवार को निगम आयुक्त नवीन भारद्वाज अपने ऑफिस में बैठकर सरकारी काम-काज निपटाते नजर आए।
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11 मई को जोधपुर हाईकोर्ट जज शुभा मेहता ने मामले में आदेश जारी कियाा था। जिसके तहत जोधपुर हाईकोर्ट ने नगर निगम पाली को राहत देते हुए नगर निगम ऑफिस की संपत्ति जब्त करने संबंधी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिविल प्रथम अपील और उससे जुड़े स्थगन आवेदन पर सुनवाई होने तक डिक्री के निष्पादन की कार्यवाही स्थगित रहेगी।
इस पर नगर निगम पाली में आयुक्त ऑफिस का ताला बुधवार को फिर से खोला गया और उन्हें उनकी सरकारी गाड़ी भी लौटाई गई।
बता दें कि परिवादी विनोद तेजी को कोर्ट के आदेश के बाद भी पट्टा जारी करने पर 7 मई को पाली डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज राजेंद्र कुमार के आदेश पर पाली नगर निगम ऑफिस की सम्पति जब्त और गाड़ी जब्त की गई थी।
पाली नगर निगम में खड़ी नगर निगम आयुक्त की सरकारी गाड़ी।
2 पॉइंट्स में समझ लीजिए पूरा मामला
1. नगर निगम पट्टा जारी नहीं कर रहा था
सीनियर एडवोकेट अशोक अरोड़ा ने बताया- परिवादी विनोद तेजी पुत्र गोपाल निवासी अशरफो रजा कॉलोनी, सोजत रोड, नया गांव पाली ने अपने प्लॉट 615 का पट्टा जारी कराने के लिए नगर निगम पाली में अप्लाई किया था। लंबे समय तक पट्टा जारी नहीं होने पर विनोद ने 2022 में जिला न्यायालय पाली में वाद प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई के बाद जिला न्यायाधीश राजेंद्र कुमार ने 6 सितंबर 2025 को निर्णय पारित करते हुए नगर निगम को 1 महीने के भीतर परिवादी विनोद के पक्ष में पट्टा जारी करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद नगर निगम ने आदेश की पालना नहीं की गई। इसके बाद फिर से 5 मई 2026 को 7 मई तक पट्टा जारी करने का आदेश जारी किया। ऐसा नहीं होने पर निगम ऑफिस वाहन सील करने की कार्रवाई से अवगत करवाया।
2. संपत्ति कुर्क करने का निवेदन किया था
आदेश की अवहेलना पर परिवादी विनोद तेजी ने न्यायालय में इजराय (Execution) पेश कर नगर निगम की संपत्ति कुर्क करने का निवेदन किया। इस पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से नगर निगम कार्यालय की कुर्सियां, टेबल, एसी तथा आयुक्त के वाहन को कुर्क करने के आदेश जारी किए।
न्यायालय के आदेश पर सेल अमीन रवि गहलोत ने नगर निगम कमिश्नर का ऑफिस सील कर दिया। कमिश्नर की वाहन कुर्क कर न्यायालय की अभिरक्षा में रखा गया है।
नगर निगम पहुंचा हाईकोर्ट इसके बाद नगर निगम हाईकोर्ट पहुंचा। नगर निगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पंवार और अधिवक्ता वीएलएस राजपुरोहित ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि मूल डिक्री 6 सितंबर 2025 के खिलाफ सिविल प्रथम अपील संख्या 1265/2025 पहले से लंबित है और उसके साथ स्थगन प्रार्थना पत्र भी दायर किया गया है।
अदालत को बताया गया कि 25 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने निष्पादन न्यायालय की कार्यवाही 23 मार्च 2026 तक स्थगित रखने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अपील की पत्रावली अदालत कार्यालय में उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके कारण अपील एवं स्थगन आवेदन पर नियमित सुनवाई नहीं हो पाई।
कामकाज प्रभावित होने की बात कही थी
नगर निगम की ओर से यह भी कहा गया कि इसमें उनकी कोई त्रुटि नहीं है, जबकि कुर्की की कार्यवाही के चलते नगर निगम कार्यालय का सामान्य कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं, डिक्रीधारक पक्ष की ओर से दलील दी गई कि निष्पादन न्यायालय का आदेश विधिसम्मत है और याचिकाकर्ता पहले से लंबित अपील में ही राहत प्राप्त कर सकता है। यह भी कहा गया कि समानांतर कार्यवाही की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि अपील एवं स्थगन आवेदन की सुनवाई केवल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने के कारण लंबित है और इसमें नगर निगम की कोई गलती नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता को ‘उपचारविहीन’ नहीं छोड़ा जा सकता।
इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए नगर निगम कार्यालय की संपत्ति की कुर्की एवं डिक्री निष्पादन की समस्त कार्यवाही पर रोक लगा दी। साथ ही निर्देश दिए कि प्रथम अपील और स्थगन आवेदन पर सुनवाई के समय लंबित रिट याचिका की जानकारी भी न्यायालय को दी जाए।
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