राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की बिक्री को लेकर पंप डीलर्स एसोसिएशन ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और राज्य स्तरीय समन्वयक मनोज गुप्ता को लेटर लिखा है। एसोशिएसन ने कहा है कि ऑयल कंपनियां पेट्रोल पंपों को सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध करा रही हैं। डीलर्स को मोबाइल पर मैसेज और मौखिक निर्देश देकर उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में ही पेट्रोल-डीजल देने को कहा जा रहा है। इंडियन ऑयल द्वारा एक उपभोक्ता को 50 हजार रुपए तक का डीजल और 5 हजार रुपए तक का पेट्रोल देने की सीमा तय की गई है। वहीं, भारत पेट्रोलियम द्वारा 49 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल की सीमा बताई गई है। इसी तरह, हिंदुस्तान पेट्रोलियम की ओर से भी लगभग 50 लीटर पेट्रोल और 200 लीटर डीजल की सीमा निर्धारित करने की बात कही गई है। इंडियन ऑयल कार्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक मनोज गुप्ता ने बताया-पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर फिलहाल किसी तरह की लिमिट नहीं लगाई गई है। लूज (खुला) पेट्रोल खरीदने के तरीके पर रोक लगाई गई है। जितना भी पेट्रोल खरीदना है। वह गाड़ी की टंकी की क्षमता के अनुसार दिया जा रहा है। अगर किसी गाड़ी में 50 लीटर पेट्रोल आता है, तो उसे 50 लीटर दिया जा रहा है। अगर किसी गाड़ी की क्षमता 60 लीटर की है, तो उसे 60 लीटर भी दिया जा रहा है। यही प्रक्रिया डीजल में भी लागू है, किसी तरह की कोई लिमिट नहीं है। किसी पंप के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने की आशंका, ईसी एक्ट के तहत कार्रवाई का खतरा डीलर्स ने चेतावनी दी है कि अगर यही स्थिति रही तो पेट्रोल पंपों पर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगड़ सकती है। सीमित मात्रा में ईंधन मिलने पर लोगों में नाराजगी बढ़ेगी और विवाद की आशंका रहेगी। ऐसी स्थिति में अगर किसी प्रकार की जान-माल की हानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित ऑयल कंपनियों की होगी। पेट्रोल पंप आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) के तहत आते हैं, जिसके कारण न्यूनतम स्टॉक बनाए रखना जरूरी होता है। लेकिन डिपो से कम सप्लाई मिलने के कारण कई पेट्रोल पंप ड्राई होने लगे हैं। इससे राज्य सरकार द्वारा ईसी एक्ट के तहत कार्रवाई का खतरा भी बना हुआ है। खुले में डीजल देने पर पाबंदी से डीलर्स चिंतित पेट्रोल पंप संचालकों ने खुले में बैरल या ड्रम में डीजल देने पर लगी पाबंदी को लेकर भी चिंता जताई है। किसान, सरकारी विभाग और सड़क निर्माण कंपनियां लंबे समय से बैरल में डीजल लेती रही हैं, लेकिन अब इस पर भी रोक लगाई जा रही है। जबकि इस संबंध में सरकार या कंपनियों की ओर से कोई स्पष्ट लिखित गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग डीलर्स संगठन ने ऑयल कंपनियों से मांग की है कि पूरे मामले का गंभीरता से अध्ययन कर स्पष्ट और लिखित आदेश जारी किए जाएं। साथ ही इन निर्देशों की जानकारी जनता तक अन्य माध्यमों से पहुंचाई जाए, ताकि पेट्रोल पंपों पर भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा न हो।
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