मंडला जिले के बिछिया क्षेत्र की 42 वर्षीय आदिवासी महिला देवंती धुर्वे को सालों से झेल रहे पेट दर्द से आखिरकार मुक्ति मिल गई है। बालाघाट के निजी अस्पताल में हुए एक जटिल ऑपरेशन के बाद उनके पेट से सवा चार किलो का ट्यूमर निकाला गया। महिला के स्वास्थ्य में अब सुधार है। देवंती धुर्वे पिछले कई वर्षों से इस समस्या से जूझ रही थीं। उन्हें कमर और पेट में लगातार दर्द रहता था। नसबंदी के कुछ वर्षों बाद यह शिकायत शुरू हुई थी, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई और पेट में एक गांठ का रूप ले लिया। दर्द इतना असहनीय हो गया था कि उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो चुका था। आर्थिक तंगी और बड़े शहरों में महंगे इलाज की चिंता के बीच बालाघाट के मोती नगर स्थित निजी हॉस्पिटल ने उन्हें राहत प्रदान की। डॉक्टरों की टीम ने लगभग तीन घंटे तक चले इस ऑपरेशन में महिला के पेट से सवा चार किलो वजनी फाइब्रॉइड लियोमायमा (गोला) को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। जल्द मिलेगी अस्पताल से छुट्टी ऑपरेशन करने वाले डॉ. मोहम्मद भारमल ने बताया कि महिला की बच्चेदानी में एक विशाल फाइब्रॉइड विकसित हो चुका था, जिसके कारण अत्यधिक रक्तस्राव और लगातार दर्द हो रहा था। उन्होंने इसे बालाघाट जिले का संभवतः पहला और बेहद जटिल ऑपरेशन बताया। हॉस्पिटल में केवल दो सर्जनों ने हिस्टेरेक्टॉमी प्रक्रिया के माध्यम से यह कठिन ऑपरेशन किया। महिला को जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। दो साल से परेशान थे देवंती की ननद पिंकी मरावी ने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे इलाज के लिए भटक रहे थे। मंडला अस्पताल से उन्हें जबलपुर रेफर किया गया था, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वहां इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा था। किसी परिचित से बालाघाट के यहां की जानकारी मिलने के बाद वे यहां पहुंचे।
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