पंजाब के बरनाला जिले के दीपागढ़ गांव के एक होनहार युवक, रमनदीप सिंह ढिल्लों की न्यूजीलैंड में हुई एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। रमनदीप अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने और बेहतर भविष्य के सपनों के साथ विदेश गया था। इस दुखद समाचार के गांव पहुँचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। रमनदीप की असमय मृत्यु ने एक हँसते-खेलते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा न्यूजीलैंड के डी-पुक्की क्षेत्र में उस समय हुआ, जब रमनदीप अपनी गाड़ी से कार्यस्थल की ओर जा रहा था। रास्ते में उसकी गाड़ी एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि रमनदीप को संभलने का जरा भी मौका नहीं मिला और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। रमनदीप वहां पिछले काफी समय से रहकर कड़ी मेहनत कर रहा था और अपने परिवार का एकमात्र सहारा बना हुआ था। सपनों को हकीकत में बदलने की कोशिश का दुखद अंत परिजनों ने बताया कि रमनदीप बेहद मेहनती, मिलनसार और जिम्मेदार स्वभाव का युवक था। उसने अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए विदेश की राह चुनी थी और वहां से लगातार परिवार की आर्थिक मदद कर रहा था। गांव के लोगों का कहना है कि रमनदीप न केवल अपने परिवार का सहारा था, बल्कि वह नेक दिल और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहने वाला इंसान था। उसकी मौत से दीपागढ़ गांव ने एक होनहार नौजवान खो दिया है। पार्थिव शरीर को भारत लाने की सरकार से गुहार हादसे की खबर मिलने के बाद से ही रमनदीप के घर पर रिश्तेदारों और ग्रामीणों का तांता लगा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अपने लाडले के अंतिम दर्शनों का इंतजार कर रहे हैं। गांववासियों और पीड़ित परिवार ने पंजाब सरकार और भारतीय दूतावास से पुरजोर मांग की है कि रमनदीप के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि उसका अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव की मिट्टी में किया जा सके। विदेशों में बुझते पंजाब के ‘चिराग’ और गहरी होती पीड़ा इस घटना ने एक बार फिर उन हजारों पंजाबी परिवारों के दर्द को ताजा कर दिया है, जिनके बच्चे रोजी-रोटी और बेहतर जीवन की तलाश में सात समंदर पार जाते हैं। दीपागढ़ के निवासियों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशों में सड़क हादसों और अन्य कारणों से पंजाबी युवाओं की मौतों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। रमनदीप की मौत ने न केवल एक घर का चिराग बुझा दिया है, बल्कि उन उम्मीदों को भी खत्म कर दिया है जिनके सहारे यह परिवार आगे बढ़ रहा था।
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