पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खरड़ नगर काउंसिल चुनाव पर रोक लगा दी है। यह फैसला 15 मई को उस समय आया जब विभिन्न प्रत्याशी एसडीएम कम चुनाव अधिकारी खरड़ कार्यालय में नामांकन दाखिल कर रहे थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से नामांकन प्रक्रिया रोक दी। यह रोक खरड़ शहर से सटे छह गांवों – त्रिपड़ी, दाऊ माजरा, भुखड़ी, तोले माजरा, पीर सोहाना और रडियाला – के निवासियों द्वारा दायर याचिका के बाद लगाई गई है। पंजाब सरकार ने इन गांवों को नगर काउंसिल की सीमा में शामिल कर लिया था, जिससे उनकी पंचायतें भंग हो गई थीं। हालांकि, चुनाव के लिए जारी अधिसूचना में नई वार्डबंदी नहीं की गई थी। इस वजह से इन गांवों के निवासियों को नगर काउंसिल चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं मिल पा रहा था। ग्रामीणों ने दायर की थी याचिका ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया कि उनके पास न तो सरपंच है और न ही पार्षद, जिससे उनके काम प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें मतदान के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान डबल बेंच ने मतदान के संवैधानिक अधिकार को महत्वपूर्ण मानते हुए चुनाव पर रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक नई वार्डबंदी पूरी नहीं हो जाती, तब तक चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि नई डीलिमिटेशन (वार्डबंदी) पूरी होने तक नगर काउंसिल का कामकाज प्रशासक के अधीन रहेगा। पंजाब सरकार पहले ही एसडीएम खरड़ को नगर काउंसिल का प्रशासक नियुक्त कर चुकी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन नई वार्डबंदी कब तक पूरी करता है। नई वार्डबंदी के बाद खरड़ में वार्डों की संख्या 37 या उससे अधिक होने की संभावना है, जिससे चुनावी समीकरणों में बदलाव आ सकता है।
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