पंजाब में होने वाले नगर निकाय चुनावों को लेकर शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी सरकार के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने चुनाव प्रक्रिया में सरकारी दखल और प्रशासनिक दबाव के आरोप लगाते हुए कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो पार्टी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करेगी। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मजीठिया ने कहा कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराने की बजाय विपक्षी उम्मीदवारों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर नामांकन और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है ताकि विपक्षी उम्मीदवार चुनाव मैदान से बाहर हो जाएं। निकाय चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद होते मजीठिया ने कहा कि नगर निकाय चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद होते हैं, लेकिन पंजाब में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है और कुछ मामलों में कार्यालयों को बंद रखकर या अधिकारियों की अनुपस्थिति दिखाकर काम लटकाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को एनओसी और अन्य जरूरी कागजात समय पर नहीं दिए जा रहे। कई उम्मीदवारों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मजीठिया ने कहा कि उनके पास ऐसी रिकॉर्डिंग और जानकारियां हैं, जिनसे साफ संकेत मिलता है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। वोटर लिस्ट को लेकर भी सवाल उठाए अकाली नेता ने वोटर लिस्ट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतिम सूची तैयार होने के बाद भी मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही बाहरी लोगों के नाम वोटर सूची में शामिल किए जाने की आशंका भी जताई। मुख्य सचिव केएपी सिन्हा का नाम लेते हुए मजीठिया ने कहा कि सरकार के कई फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं और कुछ मामलों में रिकॉर्ड दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सरकारी फैसलों और प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी मजीठिया ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पंजाब में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों में डर का माहौल है। उनका आरोप है कि सरकार राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। मजीठिया ने कहा कि अकाली दल चुनाव आयोग के सामने भी अपनी आपत्तियां रखेगा। यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी कानूनी लड़ाई लड़ते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी।
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