झज्जर जिले के बेरी विधानसभा क्षेत्र में अपनी सद्भाव यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद बृजेन्द्र सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के उस बयान का इशारों ही इशारों में जवाब दिया। जिसमें हुड्डा ने कहा था कि वह यात्रा में शामिल नहीं हुए बल्कि अपने नेता राहुल गांधी की सभा के लिए मंच पर गए थ। बृजेन्द्र सिंह ने कहा कि गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम में मंच भले ही आदरणीय राहुल गांधी के लिए सजा हुआ था, लेकिन यह कोई मायने नहीं रखता कि मंच किसका था या सड़क किसकी थी, महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी की उसमें सम्पूर्ण भागीदारी रही। चाहे वह नेता मंच पर मौजूद रहा हो या फिर सड़क पर यात्रा का हिस्सा बना हो। दरअसल, सोशल मीडिया पर चल रहे एक बयान के दौरान हुड्डा ने हाल ही में कहा था कि वह सद्भाव यात्रा में शामिल होने नहीं बल्कि अपने नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजेन्द्र सिंह ने बेहद संतुलित अंदाज अपनाया और ज्यादा टिप्पणी करने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि हुड्डा वरिष्ठ नेता हैं और उनके बारे में अधिक बोलना उचित नहीं होगा। बृजेन्द्र सिंह की सदभावना यात्रा यहां बेरी हलके के गांव गौच्छी से शुरू हुई और बाद में गांव धांधलान और जिले के बड़े गांव डीघल पहुंची। विशेष बात यह रहीं कि झज्जर जिले की बृजेन्द्र सिंह की यात्रा के दौरान आज भी जिले के स्थानीय नेताओं ने अपनी दूरी बनाए रखी। बोले- जो आएगा उसका स्वागत होगा बृजेन्द्र ने गांव धांधलान में बार-बार कुरेदने पर इतना ही कहा कि जब उन्होंने यात्रा शुरू की थी तो उन्हें शुरू में तो यह बात अखरती थी कि उनकी यात्रा में कांग्रेस से जुड़े कई नेता नहीं दिख रहे है। लेकिन बाद में उनकी समझ में इतना हीं आया कि वह न तो एमपी है और न ही विधायक। इसलिए जो आएगा उसका स्वागत और जो नहीं आएगा उसका भी स्वागत। बोले- झज्जर उनके पिता का ननिहाल इस दौरान बृजेन्द्र सिंह ने झज्जर जिले से अपने भावनात्मक जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि झज्जर उनके पिता का ननिहाल रहा है और यहां के लोगों में उन्हें विशेष अपनेपन की भावना देखने को मिली। काश…ममता को पहले समझ में आ जाती इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी द्वारा भाजपा को हराने के लिए विपक्षी दलों के एकजुट होने की बात पर भी प्रतिक्रिया दी। बृजेन्द्र ने कहा कि काश यह बात ममता बनर्जी को लोस व विस चुनाव से पहले समझ में आ जाती। हार के बाद टीएमसी को इंडिया गठबंधन की अहमियत समझ में आई, जबकि सत्ता में रहते हुए ममता बनर्जी को इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई। राहुल गांधी के आने से मिली मजबूती उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के आने के बाद उनकी सद्भाव यात्रा को और मजबूती मिली है। बृजेन्द्र के अनुसार वह भारत जोड़ो यात्रा से प्रभावित हुए थे और उसी सोच के तहत उन्होंने यह यात्रा शुरू की। मीडिया द्वारा कांग्रेस नेताओं को एक मंच पर देखने की उम्मीदों पर भी उन्होंने टिप्पणी की। बृजेन्द्र ने कहा कि मीडिया चाहता है कि सभी नेता एक साथ दिखाई दें, लेकिन व्यावहारिक राजनीति में ऐसा हमेशा संभव नहीं होता। हरियाणा की राजनीतिक परिस्थितियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए यह संघर्ष का समय है और भाजपा को हराने के लिए पार्टी को संगठनात्मक प्रक्रिया को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इस मौके पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री ओर उनके पिता विरेन्द्र सिंह डूमर खां,पूर्व विधायक विेरेन्द्रपाल,एडवोकेट ऋषि गौच्छी,भी मौजूद थे।
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