10 साल का गुस्सा चारों की हत्या करने के बाद ही ठंडा हुआ। भइया-भाभी हमारी मां-छोटे भाई के साथ मारपीट करते थे। अपने ही घर में उन्हें नौकर की तरह रखते थे। इसकी वजह से उनकी हत्या कर दी। पकड़ाने के डर से हमने पूरी रात जगकर चारों शवों को 4-5 टुकड़ों में कर दिया, ताकि किसी की भी पहचान न हो सके। कैमूर में अपने भाई-भाभी और भतीजा-भतीजी की हत्या करने वाले आरोपी विकास गुप्ता ने ये सारी बातें पुलिस के सामने कबूला है। दरअसल, कैमूर में 10 और 12 मई को मिले 4 सिर कटी लाशों का खुलासा हो गया है। इसमें मृतक कृष्ण मुरारी के छोटे भाई विकास-राहुल और इनके दोस्त दीपक ने मिलकर उन्हें मौत के घाट उतारा था। आरोपियों ने पहले अपने भइया की हत्या की, फिर भाभी को मार डाला। इसके बाद दोनों बच्चों की भी हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस ने 17 मई को खुलासा किया है। इसमें अभी तक सिर्फ मुख्य आरोपी विकास गुप्ता की गिरफ्तारी हुई है। राहुल और दीपक की तलाश की जा रही है। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… दो भाइयों और मां के साथ करता था मारपीट कृष्ण मुरारी घर में सबसे बड़ा था। उससे छोटे 3 भाई हैं। इसमें विकास, सुभाष और राहुल है। विकास-कृष्ण मुरारी के बीच अक्सर घर की परेशानियों को लेकर लड़ाई होती थी। कृष्ण मुरारी का कहना था कि अब तुम्हारी शादी हो गई है। तुम मां को अपने साथ ले जाओ। वहीं, विकास कहता था, मां गांव में रहना पसंद करती है। जिस दिन उन्हें मेरे साथ महाराष्ट्र जाने का मन करेगा मैं उन्हें ले जाऊंगा। विकास के अनुसार, कृष्ण मुरारी राहुल और मां के साथ मारपीट भी करता था। मां अक्सर फोन कर उसे मारपीट के बारे में जानकारी देती थी। इतना ही नहीं, मृतक की पत्नी भी अपनी सास से घर का काम करवाती थी। इन्हीं सब बातों से परेशान होकर उनकी हत्या कर दी। 12 मार्च 2026 को विकास की हुई थी शादी कृष्ण मुरारी गांव में ही रहकर फास्ट-फूड का ठेला लगाता था। वहीं, विकास महाराष्ट्र में एक निजी कंपनी में काम करता है। 12 मार्च 2026 को ही विकास की शादी हुई थी। वहीं, सुभाष हैदराबाद में रहकर एक निजी कंपनी में काम करता है। वो घरवालों से ज्यादा मतलब नहीं रखता था। राहुल जो सबसे छोटा भाई है, वो गूंगा है। इस वजह से वो कृष्ण मुरारी और अपनी मां के साथ घर पर ही रहता है। महाराष्ट्र में बैठकर हत्या की बनाई योजना आरोपी विकास ने अपने कबूलनामा में पुलिस को बताया, ‘5 मई को मेरे बड़े भाई कृष्ण मुरारी ने हमारी मां के साथ मारपीट की थी। मां 70 साल की है। वो ज्यादा काम नहीं कर पाती हैं, लेकिन मेरे भइया-भाभी आए दिन उन्हें प्रताड़ित करते थे। उनसे झाड़ू-पोछा तक लगवाते थे। 5 मई को मां ने मुझे रात 10 बजे घर से बाहर निकलकर फोन किया। उन्होंने मुझसे कहा, मैं बड़े बेटा-बहू से छिपकर तुमको फोन कर रही हूं। दोनों ने आज मुझे बहुत मारा। मेरे शरीर पर चोट के निशान पड़ गए हैं। बिस्तर से उठने में बहुत तकलीफ हो रही है। तुम इसका कुछ करो। इतना सुनते ही मुझे बहुत गुस्सा आया। मैंने उसी समय सोच लिया, भइया-भाभी को जिंदा नहीं छोड़ना है। वो मेरी मां को जीने नहीं दे रहे हैं, इसलिए उनको मार देंगे। इसके बाद मैंने 6 मई को अपने से छोटे भाई राहुल को इस घटना की जानकारी दी। उसने भी मेरा साथ दिया। हमने एक दोस्त को भी इस साजिश में शामिल किया और महाराष्ट्र से कैमूर के लिए निकल गए। 7 मई को गांव पहुंचे और उसी दिन सभी को मार डाला विकास ने आगे बताया, 7 मई को मैं अचानक अपने घर पहुंच गया। मुझे और मेरी पत्नी को देखकर भइया-भाभी हैरान हो गए। 7 मई की दोपहर मैं, मेरा भाई राहुल और दोस्त दीपक राजपूत एक कमरे में बैठे थे। हमलोग शेयर मार्केट की बात कर रहे थे। इसी वक्त अचानक कमरे में कृष्ण मुरारी आ गए। वो भी हमारे साथ बैठ गए। इसी मौके का फायदा उठाकर मैं, राहुल और दीपक ने मिलकर भइया को पकड़ लिया। हमने सबसे पहले उनका मुंह दबाया। इसके बाद करीब 5 मिनट तक उनका गला रेता। इस दौरान खून की छीटें मेरे मुंह पर पड़ रही थी। कमरे में मौजूद पीला दीवार लाल हो गया, लेकिन मेरे ऊपर गुस्सा सवार था। पति को बचाने पहुंची पत्नी को भी मार डाला हत्या के दौरान शोर सुनकर कृष्ण मुरारी की पत्नी दुर्गेश कुमारी मौके पर पहुंची। कमरे में खून और पति के शव को देखकर वह चीखने लगीं और भागने की कोशिश की। राहुल ने दौड़कर उन्हें पकड़ लिया और घसीटते हुए कमरे में लाया। इसके बाद उनका भी मुंह बंद किया और पति की तरह उसकी भी हत्या कर दी। दो हत्या के बाद पूरा कमरा खून से भर गया था। दोनों शव कमरे में बिखरे पड़े थे। आंगनबाड़ी से लौटे बच्चे, फिर हुआ सबसे बड़ा पाप आरोपी ने पुलिस को बताया कि दोपहर करीब 12 बजे दोनों बच्चे अंश और प्राची आंगनबाड़ी से पढ़कर घर लौटे। घर के अंदर आते ही दोनों अपने माता-पिता को आवाज लगाने लगे। जैसे ही बच्चे उस कमरे में पहुंचे, वहां खून और माता-पिता के शव को देखकर डर गए। हमें डर था कि बच्चे घटना की सूचना किसी को दे देगा। इसकी वजह से दोनों मासूम की भी हत्या कर दी। आरोपी ने पूछताछ में कहा, हम बच्चे को मारना नहीं चाहते थे, लेकिन उन्हें छोड़ भी नहीं सकते थे। पूरी रात टांगी से काटते रहे शव चारों की हत्या के बाद हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती शवों को ठिकाने लगाने की थी। रात 1 बजे मैं, राहुल और दीपक घर के पीछे से टांगी लेकर आए। इसके बाद एक-एक कर पहले कृष्ण मुरारी, फिर उनकी पत्नी और बाद में बच्चों के शवों के टुकड़े किए। सभी शवों के पहले सिर अलग किए। इसके बाद हाथ-पैर काटे। करीब 18 टुकड़े कमरे में फैला दिए गए। पूरी रात कमरे में शव काटने का सिलसिला चलता रहा। मां और पत्नी को कमरे में किया बंद आरोपी ने अपने कबूलनामा में आगे बताया, घटना के दौरान मेरी मां और पत्नी भी घर में मौजूद थीं। हालांकि, दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया था। उन्हें बाहर नहीं निकलने को कहा था। शवों के टुकड़े करने के बाद हमें समझ नहीं आ रहा था कि उन्हें ठिकाने कैसे लगाया जाए। इसी दौरान दोस्त दीपक ने सुझाव दिया कि शवों को अलग-अलग सूटकेस और बोरियों में भरकर नदी और नहर में फेंक दिया गया। रात में स्कूटी से ले जाकर फेंके शव के टुकड़े कृष्ण मुरारी और बेटे के शव के टुकड़ों को ट्रॉली बैग में पैक किया, जबकि पत्नी और बेटी के शव बोरी में भर दिया। सभी के सिर अलग-अलग जगहों पर फेंकने की योजना बनाई गई। रात करीब एक बजे जब गांव के लोग सो गए तो हमने स्कूटी निकाली। करीब 50 मीटर तक बिना स्टार्ट किए स्कूटी को धक्का देकर ले गए, ताकि आवाज से गांव वाले जाग न जाएं। इसके बाद रामगढ़-मोहनियां बॉर्डर स्थित दुर्गावती नदी में कुछ टुकड़े फेंके गए, जबकि बाकी शव अकोढ़ी नहर के पास बोरी में डाल दिया। अगले दिन घर की धुलाई कर मिटाए सबूत घटना को अंजाम देने के बाद 8 मई की सुबह मैंने अपनी मां और पत्नी को मायके भेज दिया। दोस्त दीपक को महाराष्ट्र जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया। इसके बाद मैं और राहुल घर लौटे और अंदर से दरवाजा बंद कर सबूत मिटाने में जुट गए। हमने सबसे पहले फर्श पर सीमेंट की परत डाली और दीवारों पर लगे खून के छींटों को पानी से साफ करने की कोशिश की। हालांकि, कई जगहों पर खून के निशान रह गए थे। इसके बाद हम दोनों भाई भी गांव छोड़कर पत्नी के मायके चले गए। इसी दौरान 10 मई को पुलिस को दुर्गावती नदी से शव के टुकड़े बरामद हुए और पूरे मामले का खुलासा शुरू हुआ। 10 मई को मिला था पहला सुराग 10 मई को दुर्गावती नदी में एक सूटकेस मिला। उसके अंदर इंसानी शरीर के 18 टुकड़े थे। पुलिस भी यह देखकर हैरान रह गई। पहली नजर में साफ था कि यह सामान्य हत्या नहीं है। शवों के टुकड़ों को देखकर पुलिस को शक हुआ कि ये कई लोगों के हो सकते हैं। दो दिन बाद अकोढ़ी नहर के पास बोरी में बंद मानव अंग और सिर बरामद हुए। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया। बच्चों की ड्रेस से खुला राज कैमूर एसपी हरि मोहन शुक्ला के मुताबिक शुरुआत में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती शवों की पहचान थी। आसपास के जिलों में भी किसी परिवार के गायब होने की सूचना नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर मिसिंग बच्चों की जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान बच्चों के कपड़े और एक शर्ट पुलिस के हाथ लगे। इन्हीं कपड़ों से पुलिस को रामगढ़ थाना क्षेत्र के डहरक गांव में रहने वाले कृष्ण मुरारी गुप्ता के परिवार पर शक हुआ। जब पुलिस गांव पहुंची तो उसका घर बंद मिला। यहीं से पूरा मामला खुलना शुरू हुआ। CCTV और मोबाइल लोकेशन ने तोड़ी साजिश पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की। घर के आसपास लगे CCTV खंगाले गए। मोबाइल लोकेशन निकाली गई। जांच में सामने आया कि विकास गुप्ता घटना से ठीक पहले महाराष्ट्र से गांव आया था और घटना के बाद अचानक वापस चला गया। इसके बाद पुलिस ने विकास के ससुराल का लोकेशन पता किया और वहां से उसे हिरासत में ले लिया। शुरुआती पूछताछ में ही वह टूट गया और पूरी कहानी बता दी। घर में मिला खून, सीमेंट से ढंका गया था फर्श पुलिस जब घर के अंदर पहुंची तो कई चौंकाने वाले सबूत मिले। जिस कमरे में शव काटे गए थे, वहां फर्श पर ताजा सीमेंट डाला गया था। कई जगहों पर धुलाई की गई थी। नालियों में खून बहाने के निशान भी मिले। दीवारों और फर्श पर खून के धब्बे फॉरेंसिक टीम को मिले। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल खून लगा चाकू, एक देसी कट्टा, तीन गोली और एक फाइटर बरामद किया है। नाबालिग पत्नी भी जांच के घेरे में जांच में सामने आया कि विकास गुप्ता की शादी इसी साल 9 मार्च को हुई थी। उसकी पत्नी नाबालिग बताई जा रही है। वहीं तीसरे आरोपी दीपक राजपूत की शादी भी 12 मार्च को हुई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के दौरान घर में मौजूद महिलाओं को हत्या और शव काटने की जानकारी कितनी थी। हैदराबाद वाला भाई नहीं था शामिल मृतक कृष्ण मुरारी का मझला भाई सुभाष गुप्ता हैदराबाद में प्राइवेट नौकरी करता है। पुलिस ने साफ किया है कि उसका इस हत्या में कोई रोल नहीं मिला है। घटना की जानकारी मिलने के बाद वह गांव पहुंचा और अब बड़े भाई, भाभी और दोनों बच्चों का श्राद्धकर्म कर रहा है। डहरक गांव में इस घटना के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव वालों को अब भी भरोसा नहीं हो रहा कि एक भाई अपने ही परिवार को इतनी बेरहमी से खत्म कर सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार में विवाद जरूर था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि मामला चार हत्याओं और शवों के टुकड़े करने तक पहुंच जाएगा। एसपी बोले- स्पीडी ट्रायल से दिलाएंगे सजा कैमूर एसपी हरि मोहन शुक्ला ने कहा कि यह बेहद जघन्य और अमानवीय घटना है। SIT, FSL और डॉग स्क्वायड की मदद से मामले का खुलासा किया गया है। उन्होंने कहा कि एक आरोपी गिरफ्तार हो चुका है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की तैयारी में है।
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