ज्योतिष के अनुसार 25 मई को सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ नौतपा शुरू हो जाएगा। नौतपा के ये 9 दिन अत्यधिक गर्मी और तेज तपिश के लिए विशेष माने जाते हैं। हालांकि सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में परिभ्रमण काल 13 दिनों से अधिक का भी हो सकता है, लेकिन पहले 9 दिन को ही नौतपा के रूप में माना जाता है। इन्हीं दिनों के आधार पर आगामी 4 महीनों की वर्षा ऋतु की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। ‘नौतपा’ का अर्थ ही नौ दिनों की तीव्र गर्मी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ज्येष्ठ मास में सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक तीव्रता से पड़ती हैं, जिससे तापमान में बढ़ोतरी होती है और लू का प्रभाव बढ़ जाता है। ज्योतिष के अनुसार मौसम में बदलाव के संकेत
ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार सूर्य 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस अवधि में मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति जलवायु को प्रभावित करती है। इस दौरान आंधी-तूफान, कहीं बूंदाबांदी और कहीं तेज बारिश जैसी स्थितियां बन सकती हैं। सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रभाव 8 जून तक रहेगा। इस दौरान मौसम में अलग-अलग प्रकार के बदलाव देखने को मिलेंगे। कहीं अच्छी बारिश के योग बनेंगे तो कहीं खंडवृष्टि और अति वृष्टि की स्थिति भी बन सकती है। बादल निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय रहने के संकेत बताया गया है कि इस बार रोहिणी का निवास समुद्र में है, जिसे वर्षा के लिए अनुकूल माना जाता है। समुद्र को जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत माना जाता है, ऐसे में वाष्प बनने और बादल निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय रहने के संकेत मिलते हैं। इसके अलावा माली के घर में रोहिणी के निवास को भी शुभ वर्षा का संकेत माना गया है।
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