मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बैंच द्वारा पिछले शुक्रवार को भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद आज पहला (शुक्रवार) है। हिंदू समाज दोपहर 1 से 3 बजे तक हवन-पूजन और महाआरती करने वाला है। प्रशासन का अनुमान है कि इसमें जिले भर से बड़ी संख्या में हिंदू स
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भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया, आज हम शोभायात्रा भी निकालने वाले थे, जिसे किसी वजह से रद्द कर दिया गया है।
इधर, हाईकोर्ट से फैसले से निराश मुस्लिम पक्ष गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। इस आदेश को एकतरफा बताते हुए मुस्लिम पक्ष ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। सदर अब्दुल समद ने कहा कि कमाल मौला मस्जिद में लगभग 700 वर्षों से जुमे की नमाज अदा होती रही है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को प्रभावित किए जाने से समाज में दुख है, लेकिन लड़ाई पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी दायरे में ही लड़ी जाएगी।
शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि मुस्लिम समाज न्यायपालिका का सम्मान करता है और अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है। उन्होंने प्रशासन से शांति बनाए रखने की अपील की। इससे पहले मुस्लिम पक्ष ने भी भोजशाला में नमाज अदा करने की घोषणा की थी, जिसे देर शाम टाल दिया गया।
शहर काजी ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट से राहत और स्टे मिलेगा, तब मुस्लिम समाज सम्मान के साथ पहले की तरह नमाज अदा करेगा। उन्होंने प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करने की अपील करते हुए कहा, सभी समुदाय शांति और सौहार्द बनाए रखें। शहर हमारा-अपना है, इसलिए अमन और भाईचारे को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
सुरक्षा के लिहाज से अलग-अलग कंपनी के करीब 2 हजार का बल धार में तैनात किया गया है।
पूर्व सीएम भी फैसले पर उठा चुके सवाल इससे पहले पूर्व सीएम और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह भी हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने इंदौर में कहा था कि कोर्ट का आदेश अस्पष्ट था। ASI संरक्षित यह स्मारक पूजा स्थल नहीं है। नियमों के तहत कानूनी तौर पर पूजा-पाठ का कोई प्रावधान नहीं है।
शांति बनाने शहर में 2 हजार पुलिसकर्मी तैनात इस संवेदनशील मामले को लेकर पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, पुलिस की एक खास टीम सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी कर रही है।
कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने नागरिकों से शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय पुलिस समेत अलग-अलग कंपनी के 1500-2000 का बल धार में तैनात किया गया है। गुरुवार को धार शहर में कलेक्टर राजीव रंजन मीना और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा के नेतृत्व में पैदल फ्लैग मार्च निकाला गया।

एसपी ने बताया, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर निगरानी की जा रही है।
आठ विशेष सुरक्षा कंपनियां भी लगाई गईं एडिशनल एसपी विजय डावर ने बताया कि भोजशाला और धार शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। धार शहर में करीब 1500 से 2000 पुलिस जवान तैनात किए गए हैं।
इसके साथ ही आठ विशेष सुरक्षा कंपनियां भी लगाई गई हैं। इनमें रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), पैरामिलिट्री फोर्स, एसडीएफ, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) घुड़सवार पुलिस बल सहित अन्य सुरक्षा बल शामिल हैं।
इन सभी कंपनियों को मिलाकर करीब 600 से 700 विशेष जवान भोजशाला परिसर, संवेदनशील क्षेत्रों और शहर के प्रमुख इलाकों में तैनात रहेंगे। प्रशासन द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि शहर में शांति और कानून व्यवस्था पूरी तरह बनी रहे।

कलेक्टर ने कहा कि हर गतिविधि पर नजर है। नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
‘पहली बार पूर्ण स्वाभिमान के साथ होगी महाआरती’ अशोक जैन ने बताया कि 721 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद आज हिंदू समाज पूरे स्वाभिमान और सम्मान के साथ भोजशाला में मां सरस्वती का पूजन और महाआरती करेगा।
इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि साल 1305 ई. में मुगल आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने इस मंदिर पर अवैध कब्जा कर इसे अपवित्र कर दिया था, जिसके बाद से हिंदू समाज निरंतर संघर्ष कर रहा था।
उन्होंने कहा, हाईकोर्ट द्वारा हिंदुओं को पूजन का अधिकार दिए जाने के बाद आज का दिन बेहद ऐतिहासिक है।

भोजशाला को रविवार सुबह गंगाजल और गोमूत्र से शुद्ध किया गया था।
समिति सदस्य बोले- मुक्ति अभी अधूरी भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने कहा कि यह मुक्ति अभी अधूरी है। जब तक भोजशाला का पूरा वैभव और स्वरूप राजा भोज के काल जैसा नहीं हो जाता, तब तक यह सत्याग्रह जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “आज भी जब हम मंदिर में आते हैं तो बहुत-सी चीजें आंखों में चुभती हैं। अभी हमने सिर्फ एक कलंक धोया है और अब यह स्थान भोजशाला सरस्वती मंदिर कहलाया जा रहा है।”

आरती के बाद केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने भगवा ध्वज फहराया था।
मंगलवार को मना था विजय महासत्याग्रह इससे पहले फैसले के बाद मंगलवार को हिंदू समाज ने विजय महासत्याग्रह के रूप में मनाया। सुबह ठीक 8:55 बजे मां सरस्वती की स्तुति के साथ ही परिसर हनुमान चालीसा के पाठ और महाआरती के जयकारों से गूंज उठा। यह महासत्याग्रह भोज उत्सव समिति द्वारा उन योद्धाओं को समर्पित किया गया, जिन्होंने भोजशाला आंदोलन में अपने प्राण न्योछावर कर दिए या जेल की सलाखों के पीछे वक्त गुजारा।
सत्याग्रह के बाद ज्योति मंदिर के सामने समाज ने जमकर उत्साह मनाया। दोपहर में ही आतिशबाजी कर दिवाली मनाई गई, जो करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक चलती रही। वहीं सभी ने एक ही संकल्प लिया कि अब जल्द ही लंदन से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को स्थापित करना है।
इस समारोह में न्यायालय में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता मनीष गुप्ता भी इस सत्याग्रह में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को तीन सूत्रीय मांग का प्रतिवेदन भेजा गया है। इसमें पहली मांग मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने के लिए ठोस कदम उठाने की है।
दूसरी मांग यह है कि चूंकि कोर्ट ने इसे मंदिर माना है, इसलिए गर्भगृह में लिखी कुछ इस्लामिक आयतों को वहां से हटाया जाए। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि एएसआई सर्वे के दौरान परिसर से निकलीं ब्रह्माजी और वाग्देवी सहित सभी 94 देवी-देवताओं की मूर्तियों को तत्काल भोजशाला में स्थापित करने के लिए पत्राचार किया गया है।


सत्याग्रह का अब अगला लक्ष्य मूल प्रतिमा भोज उत्सव समिति के सुमीत चौधरी ने बताया कि साध्वी ऋतंभरा के आह्वान पर साल 1992 में भोजशाला की मुक्ति के लिए आंदोलन शुरू हुआ था। साल 2003 तक समिति ने भोजशाला के बाहर सड़क पर बैठकर प्रति मंगलवार सत्याग्रह किया। इसी का परिणाम था कि 2003 में प्रशासन को इसके ताले खोलने पड़े और हिंदुओं को मंगलवार को पूजन का अधिकार मिला।
इसके बाद सत्याग्रह परिसर के अंदर तब्दील हो गया, जहां अखंड पूजन और साल के 365 दिन भोजशाला खोलने का संकल्प लिया गया। अब कोर्ट के फैसले के बाद यह सत्याग्रह मां की मूल प्रतिमा को पुनः गर्भगृह में स्थापित कराने के संकल्प के साथ जारी रहेगा।



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भोज उत्सव समिति ने परिसर को गंगाजल और गोमूत्र से शुद्ध किया। इसके बाद गर्भगृह को रंगोली से सजाया। परिसर के बाहर ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को भी गर्भगृह में स्थापित किया गया। मंत्रोच्चार, देवी अनुष्ठान और वास्तु पूजन के बाद सुबह 11:45 बजे आरती की गई। पूरी खबर पढ़िए…
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