लुधियाना नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और पंजाब राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के निर्देशों पर आज (9 मई) जिले में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण हरप्रीत कौर रंधावा की देखरेख में रही। लुधियाना मुख्यालय सहित जगराओं, समराला, खन्ना और पायल की सब-डिवीजनों में सुबह से ही पक्षकारों की भारी भीड़ उमड़ी। आंकड़ों में आज की लोक अदालत कुल बेंच 58 (48 जिला मुख्यालय और 10 सब-डिवीजन में) टेक-अप केस करीब 1,15,000 मामले। लक्ष्य- शाम तक लगभग 1,10,000 मामलों के निपटारे की उम्मीद। अकेले चेक बाउंस (Section 138) के 1.25 लाख से ज्यादा मामले लंबित। जड़ से खत्म होती है मुकदमेबाजी, न अपील न दलील। मुकदमेबाजी जड़ से खत्म हो जाती है मीडिया से मुखातिब होते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरप्रीत कौर रंधावा ने कहा कि लोक अदालत का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां होने वाले फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती। लोक अदालत में जब दो पक्ष आपसी सहमति से राजीनामा करते हैं तो मुकदमेबाजी जड़ से खत्म हो जाती है। इससे न केवल समय बचता है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। चेक बाउंस मामलों के लिए लगेगी स्पेशल अदालत न्यायाधीश ने बताया कि लुधियाना में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (138) के मामलों की संख्या बहुत अधिक है। इसे देखते हुए भविष्य की योजना भी साझा की गई 18 जुलाई 2026 विशेष रूप से चेक बाउंस (138 NI Act) के मामलों के लिए स्पेशल लोक अदालत लगेगी। 12 सितंबर 2026 अगली बड़ी नेशनल लोक अदालत आयोजित होगी, जिसमें सभी श्रेणियों के केस लिए जाएंगे। टूटते घरों को बचाने की अपील: शादी में सब्र और समझ जरूरी शादी के महज दो-तीन साल के भीतर कोर्ट पहुंच रहे युवाओं को न्यायाधीश रंधावा ने भावुक व व्यावहारिक सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज मैंने खुद कई जोड़ों की काउंसलिंग की है। शादी की शुरुआत में दिक्कतें आना स्वाभाविक है। अगर पति-पत्नी थोड़े सब्र और समझदारी से काम लें, तो तलाक की नौबत नहीं आएगी और घर हँसते-बसते रहेंगे। इन मामलों का होगा निपटारा: लोक अदालत में मुख्य रूप से वैवाहिक विवाद, चेक बाउंस के मामले, दीवानी (Civil), और समझौते योग्य आपराधिक (Compoundable Criminal) मामलों की सुनवाई की गई। बार एसोसिएशन के वकीलों ने भी इस मुहिम में पूरा सहयोग दिया ताकि आम जनता को त्वरित न्याय मिल सके।
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