दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हरियाणा स्टेट ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन ने बुधवार को सभी जिलों में मेडिकल स्टोर बंद रखने का ऐलान किया है। राज्य में लगभग 20 हजार मेडिकल स्टोर हैं। हिसार और सोनीपत में सुबह के समय स्टोर बंद मिले। सोनीपत में तो दुकानों के बाहर स्ट्राइक के पोस्टर भी लगाए गए। पंचकूला में सभी दवा दुकानें बाकी दिनों की तरह खुली हुई हैं। गंभीर रूप से बीमार लोगों को दवाइयां मिलती रहेंगी, क्योंकि अस्पतालों के अंदर के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और बड़ी मेडिकल स्टोर की दुकानें खुली रहेंगी। सोनीपत में एक हजार से ज्यादा दुकानें सोनीपत केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रधान सुरेश कादियान ने कहा कि उन्होंने एसोसिएशन के समर्थन में दुकानें बंद रखी हैं। जिले में एक हजार से ज्यादा दुकानें हैं। अवैध ई-फार्मेसी संचालन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पारंपरिक दवा वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऑनलाइन माध्यम से बिना वैध डॉक्टर की पर्ची के दवाइयों की बिक्री हो रही है, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है। पानीपत में दो एसोएिशन आमने-सामने पानीपत में केमिस्टों के 2 धड़े हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स के पानीपत जिला प्रधान करतार सिंह मक्कड़ ने बंद का आह्वान किया है, जबकि पानीपत केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के जिला प्रधान कुलदीप सिंह कादयान ने इसका विरोध करते हुए मेडिकल स्टोर खोले रखने की बात कही है। पंचकूला एसोसिएशन बोली- हम हड़ताल से दूर पंचकूला केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान मनोज गुलाटी ने बताया कि उनके कुछ इंटरनल मुद्दे हैं, जिसके कारण उन्होंने इस हड़ताल से खुद को अलग रखा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके अलावा दिल्ली और पंजाब के कुछ जिलों में भी केमिस्ट हड़ताल में शामिल नहीं हैं। किस जिले में कितने मेडिकल स्टोर ड्रग कंट्रोलर बोले- मरीजों को दवा देने से इनकार न करें हरियाणा के ड्रग कंट्रोलर सिपुन मेहला ने कहा कि अस्पतालों के भीतर बनी केमिस्ट शॉप, प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र और मेडिकल फार्मेसी चेन की दुकानें खुली रहेंगी। उन्होंने केमिस्ट एसोसिएशनों से यह भी अपील की है कि वे गंभीर और आपातकालीन स्थिति वाले मरीजों को दवा देने से इनकार न करें। एसोसिएशन बोली- कंपनियों के लाइसेंस का पता नहीं हरियाणा स्टेट ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनजीत शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री तेज़ी से बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियों के पास आवश्यक लाइसेंस हैं या नहीं। अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री के कारण पारंपरिक मेडिकल स्टोर संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। मार्जिन को लेकर कारोबार प्रभावित एसोसिएशन के अनुसार, दवा निर्माता कंपनियों के साथ समझौते के तहत मेडिकल स्टोर संचालकों को सामान्य तौर पर 18 से 20 प्रतिशत तक का मार्जिन मिलता है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 30 प्रतिशत तक की छूट देकर बाजार पर कब्जा कर रहे हैं। इससे छोटे और मध्यम स्तर के केमिस्टों के सामने कारोबार बचाए रखना एक चुनौती बन गया है।
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