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चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल में समय पर नहीं खुलता गेट: बाहर बैठ बच्चे करते इंतजार, DPE-जांच के आदेश, सिक्योरटी गार्ड- गलत हुआ कौन जिम्मेवार – Chandigarh News

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल में समय पर नहीं खुलता गेट:  बाहर बैठ बच्चे करते इंतजार, DPE-जांच के आदेश, सिक्योरटी गार्ड- गलत हुआ कौन जिम्मेवार – Chandigarh News

चंडीगढ़ के गांव मलोया स्थित आरसी-2 सरकारी स्कूल में बच्चों को सुबह स्कूल गेट के बाहर बैठाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल सुबह 7 बजे खुलने के बावजूद बच्चों को 7:50 बजे से पहले अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता। मामले की जानकारी मिलने पर डीपीई (डायरेक्टर पब्लिक एजुकेशन) ने जांच के आदेश दिए हैं। बताया जा रहा है कि रोजाना बच्चे सुबह समय पर स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन उन्हें स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं मिलता। छोटे-छोटे बच्चे यूनिफॉर्म में स्कूल गेट के बाहर बैठकर गेट खुलने का इंतजार करते हैं। अभिभावकों ने जताई नाराजगी स्कूल के बाहर मौजूद कई अभिभावकों ने बिना नाम बताए अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि यह समस्या एक-दो दिन की नहीं, बल्कि रोजाना की है। सुबह बच्चे तय समय पर स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन गेट समय पर नहीं खोला जाता। इस कारण छोटे-छोटे बच्चों को लंबे समय तक स्कूल के बाहर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। अभिभावकों ने बताया कि परिवार मजदूरी, फैक्ट्री, सफाई, घरेलू काम और अन्य निजी नौकरियों से जुड़े हैं। कई लोगों को सुबह जल्दी काम पर पहुंचना होता है। ऐसे में वे बच्चों को स्कूल छोड़कर तुरंत अपने काम के लिए निकल जाते हैं, लेकिन जब गेट बंद मिलता है तो उन्हें बच्चों के साथ बाहर खड़ा रहना पड़ता है। इससे उन्हें रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वे खुलकर सामने नहीं आना चाहते, क्योंकि उन्हें डर है कि शिकायत करने के बाद कहीं स्कूल में उनके बच्चों को परेशान न किया जाए। इसी वजह से अधिकतर अभिभावकों ने पहचान उजागर किए बिना ही अपनी बात रखी। सिक्योरिटी गार्ड बोला- 7:50 से पहले एंट्री नहीं स्कूल गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड ने बच्चों को अंदर जाने से रोकते हुए कहा कि सुबह 7:50 बजे से पहले किसी भी छात्र को स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाता। गार्ड के अनुसार यह व्यवस्था स्कूल प्रबंधन की ओर से लागू की गई है और उसे इसी के तहत ड्यूटी निभाने के निर्देश दिए गए हैं। गार्ड ने बताया कि जब तक स्कूल का पूरा स्टाफ और शिक्षक नहीं पहुंच जाते, तब तक बच्चों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाती। उसका कहना था कि यदि स्टाफ के आने से पहले किसी बच्चे के साथ स्कूल परिसर में कोई हादसा या अनहोनी हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा। गार्ड ने यह भी कहा कि कई बार बच्चे स्कूल खुलने से काफी पहले पहुंच जाते हैं। ऐसे में उन्हें बाहर ही इंतजार करने के लिए कहा जाता है। मौके पर कई छोटे बच्चे यूनिफॉर्म में स्कूल गेट के बाहर बैठे दिखाई दिए, जबकि कुछ अभिभावक भी बच्चों के साथ खड़े रहे। जब गार्ड से पूछा गया कि क्या बच्चों को बाहर रोकने के लिए कोई लिखित आदेश दिए गए हैं, तो उसने कहा कि उसे स्कूल की तरफ से यही निर्देश मिले हैं कि तय समय से पहले किसी बच्चे को अंदर प्रवेश नहीं देना है। हालांकि उसने यह भी कहा कि वह केवल मिले आदेशों का पालन कर रहा है। बच्चों को रोकने के आदेश नहीं वहीं, स्कूल की प्रिंसिपल अमृत पाल कौर ने पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्कूल का गेट रोजाना सुबह 7 बजे खोल दिया जाता है और इसके कुछ समय बाद बच्चे स्कूल पहुंचना शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन की ओर से बच्चों को गेट पर रोकने के कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। लेकिन किसी भी बच्चे को स्कूल के बाहर खड़ा रखने या अंदर प्रवेश से रोकने की अनुमति किसी कर्मचारी को नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में बच्चों को गेट के बाहर रोका जा रहा है तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच करवाई जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि सिक्योरिटी गार्ड या किसी अन्य कर्मचारी ने किसके निर्देश पर बच्चों को अंदर आने से रोका। डीपीई ने मांगी रिपोर्ट मामला डीपीई (डायरेक्टर पब्लिक एजुकेशन) नितिन सिंगला तक पहुंचने के बाद उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं। डीपीई ने कहा कि पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी और यदि लापरवाही सामने आती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।



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