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पर्यावरण प्रेमी आज करवाएंगे ओरण का दौरा: सबको ओरण की महत्ता बताएंगे, कलेक्ट्रेट के सामने 23वे दिन भी धरना जारी – Jaisalmer News

पर्यावरण प्रेमी आज करवाएंगे ओरण का दौरा:  सबको ओरण की महत्ता बताएंगे, कलेक्ट्रेट के सामने 23वे दिन भी धरना जारी – Jaisalmer News


जैसलमेर। कलेक्ट्रेट के सामने 23दिनों से पर्यावरण प्रेमी दे रहे हैं धरना।

जैसलमेर में ओरण संरक्षण की मांग को लेकर चल रहा धरना बुधवार को लगातार 23वें दिन भी जारी रहा। बुधवार को ‘ओरण भ्रमण कार्यक्रम’ आयोजित किया जा रहा है, जिसमें जैसलमेर के प्रसिद्ध डूंगरपीर ओरण, मोकला का दौरा किया जाएगा। समाज सेवी विमल गोपा ने बताया कि जो भ

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भगवान गणेश के चूंधी मंदिर में भी आरती कर प्रशासन को सद्बुद्धि की प्रार्थना की थी।

23 दिन से धरना जारी

सुमेरसिंह ने बताया कि पिछले 23 दिनों से लगातार धरना देने के बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि ओरण की रक्षा के लिए टीम ने कई अनूठे प्रयास किए—जनआक्रोश रैली, लक्ष्मीनाथ मंदिर तक नंगे पांव पदयात्रा, चूंधी गणेश मंदिर में सामूहिक पूजन और दशहरा चौक पर यज्ञ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की गई। इसके बावजूद प्रशासन की उदासीनता चिंता का विषय बनी हुई है।

रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग

ओरण टीम का कहना है कि जैसलमेर की पारंपरिक ओरण और गोचर भूमि न केवल पशुधन के लिए आवश्यक है, बल्कि यह क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जल संरक्षण और जैव विविधता का भी एक अभिन्न हिस्सा है। यदि इन्हें राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया तो भविष्य में इनके अतिक्रमण और निजी स्वामित्व में जाने का खतरा बना रहेगा।

धरने पर बैठे पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल भूमि के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की लड़ाई है।

भगवान लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर तक नंगे पैर पदयात्रा भी पर्यावरण प्रेमियों ने की।

भगवान लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर तक नंगे पैर पदयात्रा भी पर्यावरण प्रेमियों ने की।

पर्यावरण को बचाने की मुहीम

सुमेर सिंह ने बताया- ओरण बचाने की यह मुहिम 16 सितम्बर से चल रही है, जब ओरण टीम के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत की थी। अब यह आंदोलन न केवल जैसलमेर, बल्कि पूरे राजस्थान में ओरण संरक्षण के लिए एक प्रतीक बनता जा रहा है।

ओरण टीम ने प्रशासन से एक बार फिर अपील की है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द ओरण व गोचर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू करे, जिससे इन अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।



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