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जेएलएन के पीडियाट्रिक बिल्डिंग में फंसा बच्चा, रेस्क्यू किया: मॉकड्रिल में 20 मिनट से ज्यादा टाइम लगा, जयपुर से आई टीम ने किया निरीक्षण – Ajmer News

जेएलएन के पीडियाट्रिक बिल्डिंग में फंसा बच्चा, रेस्क्यू किया:  मॉकड्रिल में 20 मिनट से ज्यादा टाइम लगा, जयपुर से आई टीम ने किया निरीक्षण – Ajmer News


निदेशालय चिकित्सा विभाग से आई विशेष टीम की ओर से अजमेर के जेएलएन अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया जा रहा है। मंगलवार को अस्पताल में एक मॉकड्रिल आयोजित की गई।

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पीडियाट्रिक बिल्डिंग के चौथे मंजिल पर फंसे बच्चे को एयरलिफ्ट कर रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू में 20 से 25 मिनट का समय लगा। निरीक्षण करने आई टीम को कई खामियां मिली है। अधिकारियों ने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से चर्चा कर बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

सबसे पहले देखें रेस्क्यू की तस्वीरें…..

निरीक्षण करने आई टीम को कई खामियां मिली है। अधिकारियों ने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से चर्चा कर बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

मंगलवार को अस्पताल में एक मॉकड्रिल आयोजित की गई।

मंगलवार को अस्पताल में एक मॉकड्रिल आयोजित की गई।

पीडियाट्रिक बिल्डिंग के चौथे मंजिल पर फंसे बच्चे को एयरलिफ्ट कर रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू में 20 से 25 मिनट का समय लगा।

पीडियाट्रिक बिल्डिंग के चौथे मंजिल पर फंसे बच्चे को एयरलिफ्ट कर रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू में 20 से 25 मिनट का समय लगा।

पीडियाट्रिक बिल्डिंग की टैरिस पर आग लगने से फंसा बच्चा, मॉकड्रिल हुई

मंगलवार को जेएलएन अस्पताल की पीडियाट्रिक बिल्डिंग की टेरेस पर आग लगने से एक मासूम बच्चा फंस गया। मामले की सूचना पर अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया। अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। अग्निशमन विभाग की एयरलिफ्ट करने वाली गाड़ी को मौके पर बुलाया गया।

एयरलिफ्ट का प्रोसेस 11:36 पर शुरू हुआ। प्रिंसिपल डॉक्टर अनिल सामरिया, अधीक्षक डॉक्टर अरविंद खरे और उपाध्यक्ष डॉक्टर अमित यादव सहित अन्य डॉक्टर और अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौजूद थे। वेट ज्यादा होने के कारण एक डॉक्टर को वापस नीचे उतार दिया गया।

बाद में डॉक्टर अग्निशमन विभाग की टीम के साथ करीब 11:50 पर ऊपर टेरेस पर पहुंच गए। यहां आग पर काबू पाकर बच्चे का रेस्क्यू किया गया। 12 बजे करीब बच्चे को लेकर एअरलिफ्ट के जरिए टीम नीचे पहुंची और तुरंत इलाज के लिए भेजा गया। इस पूरे रेस्क्यू में करीब 20 से 25 मिनट का समय लगा था। यह पूरा प्रोसेस एक मॉकड्रिल था। निदेशालय चिकित्सा विभाग से आई टीम के लिए यह मॉकड्रिल की गई थी। जिसमें टीम की ओर से व्यवस्थाओं को चेक किया गया।

कुछ खामियां सामने आई, ठीक करने के निर्देश दिए

कंसल्टेंसी की सहायक निदेशक डॉक्टर नेहा शर्मा ने बताया कि अस्पताल प्रशासन को स्टाफ को पहले ब्रीफ करने की जरूरत थी। ऊपर अगर कम लोग जाते तो वह ज्यादा बेहतर था। स्टाफ अगर साथ में जाता तो उनकी भी ट्रेनिंग हो सकती थी। टाइम भी ज्यादा लगा था। इसे लेकर अगली बार के लिए निर्देश दिए गए कि पहले स्टाफ की ब्रीफिंग हो और उसके बाद ही मॉकड्रिल की जाए जिससे कि वह कुछ ट्रेनिंग ले सके। साथ ही ग्रुप में स्टाफ को मॉकड्रिल में लिया जाए। जिससे कि कुछ स्टाफ बाहर रहे और कुछ अपना काम करें जिससे कि मरीजों को भी कोई समस्या नहीं हो। मंथली ट्रेनिंग होना जरूरी है।



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