ये तुलसी बाराडेरा के 67 एकड़ में बना डंपिंग यार्ड है, जहां रायपुर शहर का कचरा डंप होता है। यहां ठेका कंपनी रामकी 520 टन और नगर निगम 200 टन डोर-टू-डोर कचरा रोज डाल रहा है।
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इससे खाद बनाई जा रही है। कचरे से रिस रहे पानी को फिल्टर कर रियूज किया जा रहा है। रामकी कंपनी के छत्तीसगढ़ रीजन प्रोजेक्ट हेड योगेश कुमार ने बताया कि 8 मेगावाट बिजली पैदा हो सकती है। मंजूरी के लिए एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
अभी मौजूद है 1.40 लाख मीट्रिक टन कचरा
यहां अब तक 2 लाख मीट्रिक टन कचरा लाकर डाला जा चुका है। इसमें से 60 हजार मीट्रिक टन कचरा खाद बनाने में इस्तेमाल हो चुका है। अभी भी यहां 1.40 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा है।
कई कंपनियों को बेची जा रही खाद
कचरे में जो प्लास्टिक वाला हिस्सा है, उसे सीमेंट फैक्ट्री को फ्री दिया जाता है। बचे हुए हिस्से से खाद बनती है। रोजाना 26 टन खाद बन रही है। इसे पारादीप, कोरोमंडल, आरसीएफ, कृभको को बेचा जा रहा है।
- 67 एकड़ में फैले तुलसी बाराडेरा यार्ड में रोज 720 टन कचरा।
- 08 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया।
- 60 हजार मीट्रिक टन से खाद अब तक बनाई गई यार्ड में।
- 1.40 लाख मीट्रिक टन कचरा अभी भी यार्ड में जमा।
- 07 बोरिंग फेल, अब कचरे से रिस रहे पानी को फिल्टर कर उपयोग कर रहे।
