भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भक्तों का रेला गंगा स्नान कर जल लेकर देवघर पहुंचा। मंदिर परिसर और कतार व्यवस्था स्थल पर “बोल बम” और “हर हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओ
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गंगाजल अर्पण का महत्व
स्टेट पुरोहित श्रीनाथ महाराज ने बताया कि भाद्रपद पूर्णिमा पर गंगाजल अर्पण का अत्यधिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन जलार्पण करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसी कारण हजारों की संख्या में श्रद्धालु गंगा तट से जल लेकर बाबा धाम पहुंचे हैं। सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है।
ग्रहण के कारण शाम 6 बजे से बंद होगा पट
इस बार विशेष संयोग यह है कि सोमवार को ही साल का अंतिम चंद्रग्रहण पड़ रहा है। चंद्रग्रहण रात 9:56 बजे से शुरू होकर रात 1:28 बजे तक रहेगा। परंपरा के अनुसार सूतक काल से डेढ़ घंटे पहले मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। इसी कारण सोमवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में शाम 6 बजे तक ही जलार्पण की अनुमति होगी। इसके बाद श्रृंगार पूजा और भोग अर्पित कर पट बंद कर दिया जाएगा।
ग्रहण काल में घरों में करेंगे पूजा
ग्रहण के दौरान मंदिर में प्रवेश वर्जित रहेगा। पुरोहित श्रीनाथ महाराज ने बताया कि भक्तों को अपने घरों में ही पूजा-पाठ करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान-पुण्य करने का विधान है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि ग्रहण की अवधि में घरों में भजन-कीर्तन करें और ग्रहण मोक्ष के बाद गंगा स्नान अवश्य करें।
श्रद्धालुओं में उत्साह
ग्रहण के कारण पट बंद होने की जानकारी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही बाबा धाम पहुंच गए थे। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार दिनभर लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। भक्तों ने कहा कि पूर्णिमा और ग्रहण का यह संयोग अद्भुत है और इस मौके पर बाबा का दर्शन करना सौभाग्य की बात है।
