कैथल जिले के खरक पांडवा गांव में रविवार को बाबा पागल पीर की समाधि पर नौवां वार्षिक भंडारा धूमधाम से मनाया गया। आयोजन में गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बुजुर्गों, महिलाओं के साथ बच्चों ने बाबा की समाधि पर मत्था टेका। गांव और परिवार को उन्नति
.
बाबा पागल पीर आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कई सालों से गांव में भंडारे का आयोजन होता है। बाबा पागल पीर की शक्ति में ग्रामीणों की गहरी आस्था है। समिति ही समाधि प्रांगण की देखभाल करती है। साथ ही गांव के विकास कार्यों में भी योगदान देती है।
खरक पांडवा में बाबा पागल पीर के भंडारे में उपस्थित श्रद्धालु।
ग्रामीणों का कहना है कि, खरक पांडवा का इतिहास काफी पुराना है। महाभारत काल से इसकी जड़े मिलती है। गांव के कुछ बुजुर्गों ने बताया कि, गांव की स्थापना के समय ही बाबा पागल पीर का यहां आगमन हुआ था। तभी से गांव वालों में उनके प्रति आस्था बनी हुई है।
हांडी में मिली खाद्य सामग्री से भर गया था श्रमिकों का पेट
बुजुर्ग रतन सिंह कहते हैं कि, एक बार समाधि के पास तालाब की खुदाई हो रही थी। तभी वहां खोदाई कर रहे श्रमिकों के लिए भोजन के लिए एक हांडी में थोड़े चावल, पानी और शक्कर मिली। जब तक तालाब की खुदाई चलती रही, तो उसी हांडी से श्रमिकों को भोजन मिलता रहा। चमत्कार देखकर लोगों की आस्था बाबा में और भी बढ़ गई।

भंडारे में भोजन ग्रहण करते श्रद्धालु।

बाबा पागल पीर के भंडारे में भोजन ग्रहण कराते सेवादार।
