पानीपत कोर्ट के बाहर की फाइल फोटो।
पानीपत फास्ट ट्रैक कोर्ट (पोक्सो) ने मंगलवार को नाबालिग से रेप के मामले में दोषी को सजा सुनाई। कोर्ट ने कछरौली के अनिल जिला पानीपत को दोषी मानते हुए 20 साल का कठोर कारावास और 55 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी। आदेश में कहा गया है कि यदि जुर्माना अदा नह
.
बता दें कि यह मामला 7 अप्रैल 2023 का है। गांव ददलाना की रहने वाली एक महिला ने थाना सदर पानीपत में लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि उनकी चौथे नंबर की 17 वर्षीय बेटी जो उस समय 10वीं कक्षा की छात्रा थी, पिछले कुछ समय से पेट दर्द की शिकायत कर रही थी। कई बार डॉक्टर से इलाज कराने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। जबरदस्ती बनाए सबंध
मां ने जब सख्ती से पूछताछ की तो बेटी ने सच बताया कि पिछले 2–3 महीनों से उसे माहवारी नहीं हो रही थी। उसने खुलासा किया कि पड़ोस में रहने वाले कमलेश ने उसके साथ रेप किया। आरोपित मूल रूप से मध्यप्रदेश के सतना जिले का रहने वाला है और अपनी पत्नी व बच्चों के साथ ददलाना में झुग्गी में रहता है। जिसने लड़के साथ कई बार जबरदस्ती संबंध बनाए। विरोध करने पर आरोपी ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी थी।
प्रेग्नेंसी टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटिव आई
शिकायत मिलने पर थाना सदर पुलिस ने 7 अप्रैल 2023 को मामला दर्ज किया। जांच की जिम्मेदारी महिला एएसआई रानी को सौंपी गई। पुलिस ने मौके का मुआयना किया और गवाहों के बयान दर्ज किए। मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ता ने बेटी का बोनाफाइड सर्टिफिकेट पेश किया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 16.01.2006 दर्शाई गई थी।
इसे सबूत के रूप में कब्जे में लिया गया। 7 अप्रैल 2023 को नाबालिग का सरकारी अस्पताल पानीपत में मेडिकल कराया गया। डॉक्टरों ने प्रेग्नेंसी टेस्ट किया, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अगले दिन यानी 8 अप्रैल को नाबालिग के धारा 164 CrPC के तहत बयान कोर्ट में दर्ज करवाए। उसने स्पष्ट बताया कि कमलेश ने कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए, मारपीट की और धमकाया।
पानीपत सदर थाना की फोटो।
आरोपी की गिरफ्तारी और मेडिकल
8 अप्रैल को पुलिस ने आरोपी कमलेश चौधरी निवासी नैगवा, थाना जसौह, जिला सतना (मध्यप्रदेश) को रिफाइनरी बोहसी के पास से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना कबूल की और निशानदेही कराई। 9 अप्रैल को आरोपी का मेडिकल कराया गया। पुलिस ने मेडिकल से मिले सैम्पल कब्जे में लिए और उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पीड़िता की काउंसलिंग और गर्भपात
10 अप्रैल को पीड़िता की काउंसलिंग चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) पानीपत के सामने कराई गई और रिपोर्ट ली गई। बाद में नाबालिग को उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। 15 अप्रैल को CWC ने आदेश जारी किया कि नाबालिग का गर्भपात कराया जाए।
इस पर सरकारी अस्पताल पानीपत में मेडिकल बोर्ड बनाया गया और 21 अप्रैल 2023 को गर्भपात करवाया गया। भ्रूण को डीएनए टेस्ट के लिए सुरक्षित किया गया। 27 अप्रैल को पीड़िता, आरोपी और भ्रूण के डीएनए सैंपल लेकर FSL मधुबन भेजे गए। रिपोर्ट आने पर चालान पेश किया गया।
किस धारा में कितनी सजा हुई, सभी एक साथ चलेंगी
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (पोक्सो), पानीपत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत में हुई। 15 नवंबर 2023 को केस दाखिल हुआ। 16 सितंबर 2025 को अदालत ने फैसला सुनाया।
पोक्सो एक्ट की धारा 6 – 20 साल का कठोर कारावास, 25,000 जुर्माना, न भरने पर 2 साल की अतिरिक्त कैद। IPC धारा 452 में 3 साल का कठोर कारावास, 15,000 जुर्माना, न भरने पर 3 महीने की अतिरिक्त कैद। IPC धारा 506 – 3 साल का कठोर कारावास, 15,000 जुर्माना, न भरने पर 3 महीने की अतिरिक्त कैद।
सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। यानी आरोपी को कुल 20 साल की कठोर कैद भुगतनी होगी। लगाए गए जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को दी जाएगी। अदालत ने कहा कि जांच/ट्रायल के दौरान आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा से घटाया जाएगा।
