पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डड़ूमाजरा डंपिंग ग्राउंड मामले में नगर निगम चंडीगढ़ को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निगम सिर्फ जमीन समतल करके नहीं बच सकता, बल्कि पूरे डंपिंग ग्राउंड से दिखाई देने वाला हर तरह का कचरा हटाना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो “प्रदूषण फैलाने वाला भुगतान करेगा” सिद्धांत भी लागू किया जा सकता है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “यह गंदगी आपने फैलाई है, अब इसे साफ भी आप ही करेंगे।” कोर्ट ठेकेदार को नहीं, सीधे नगर निगम को जिम्मेदार मानेगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई तय करते हुए कहा कि तब तक पूरे इलाके से प्लास्टिक और पॉलीथिन तक हट जानी चाहिए। अदालत ने मानसून से पहले सफाई पूरी करने के निर्देश दिए। सरकारी वकील बोला 25 दिन और लगेंगे नगर निगम की ओर से सीनियर वकील गौरव ने हाईकोर्ट को बताया कि डड़ूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर वर्षों से पड़े पुराने कचरे को हटाने के लिए चलाया जा रहा बायो-माइनिंग अभियान लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने अदालत में कहा कि कचरे के बड़े हिस्से की प्रोसेसिंग की जा चुकी है और अब अंतिम चरण का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल साइट से बचा हुआ कचरा हटाने, प्लास्टिक और पॉलीथिन अलग करने और जमीन को समतल करने का काम चल रहा है। नगर निगम की ओर से कहा गया कि साफ किए गए कचरे को अलग-अलग स्थानों पर भेजा जा रहा है, जबकि उससे निकली बायो मिट्टी का इस्तेमाल निचले इलाकों को भरने में किया जा रहा है। गौरव ने अदालत को बताया कि डंपिंग ग्राउंड की जमीन को भविष्य में अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसमें कचरा प्रबंधन से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार, पौधारोपण और इंडियन ऑयल के साथ प्रस्तावित सीएनजी प्लांट जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि बाकी बचा काम पूरा करने में करीब 20 से 25 दिन लगेंगे और तय समय के भीतर साइट को पूरी तरह साफ करने की कोशिश की जा रही है। निपटारा नहीं, दूसरी जगह शिफ्ट कर रहे वहीं याचिकाकर्ता के वकील अमित शर्मा ने नगर निगम के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दड़ूमाजरा डंपिंग ग्राउंड के कचरे का पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से निपटारा नहीं किया जा रहा, बल्कि उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा रहा है। उन्होंने अदालत में कहा कि कई ट्रकों के जरिए कचरा चंडीगढ़ और आसपास के अन्य इलाकों में डंप किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जगहों पर कचरे को जलाया गया, जिससे लोगों को प्रदूषण का सामना करना पड़ा। अमित शर्मा ने अदालत को बताया कि प्रशासन के रिकॉर्ड में भी इस बात का जिक्र है कि अलग-अलग जगहों पर कचरा डंप और जलाने की शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि इससे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और हवा व पानी दोनों प्रदूषित हो रहे हैं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि इतनी बड़ी कचरा साइट रिहायशी इलाके के बिल्कुल पास कैसे बना दी गई। अदालत ने कहा कि यदि योजना बनाने और जगह तय करने में गलती हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी ऐसी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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