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रोपड़ का किसान मल्टीक्रॉपिंग से कमा रहा 6 लाख: बरसों दुबई में बिताए, फॉरेन रिटर्न बेटों के साथ मिल की जैविक खेती – Punjab News

रोपड़ का किसान मल्टीक्रॉपिंग से कमा रहा 6 लाख:  बरसों दुबई में बिताए, फॉरेन रिटर्न बेटों के साथ मिल की जैविक खेती – Punjab News

किसान गुरदित्त सिंह आम के पौधों के साथ।

दुबई में 16 साल सुपरवाइजरी की, वहां पॉलीहाउस खेती देखी, स्वदेश लौट ऐसी ही खेती करने की सोची। समय आने पर उसे कर भी दिखाया। आज वह सालाना 6 लाख रुपए कमाते हैं। वह फॉरेन रिटर्न अपने तीनों बेटों के साथ मिल जैविक खेती करते हैं, जिसमें मल्टीक्रॉपिंग भी भरपू

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यह कहानी पंजाब के रोपड़ के रसीदपुर गांव के बुजुर्ग किसान गुरदित्त सिंह (81 वर्ष) की है, जिनका जन्म 1945 में लायलपुर (अब पाकिस्तान) के 119 चक्क रसूलपुर गांव में हुआ था। गुरदित्त के अनुसार, वह 1983 में दुबई चले गए और 1999 में लौटकर उन्होंने खेती शुरू की।

कृषि विज्ञान केंद्र ने नेट लगाया, प्रशिक्षण दिया

तीनों बेटे 67 वर्षीय पाल सिंह कतर से, 45 वर्षीय हरचरन सिंह कुवैत से और 40 साल के हरविंदर सिंह मस्कट से कुछ साल बिता 2006 में लौट आए। फिर सबने भगत पूर्ण सिंह पिंगलवाड़ा का साहित्य पढ़, 2006 में कृषि प्रशिक्षण हासिल कर, 2008 में नेटहाउस खेती शुरू की। कृषि विज्ञान केंद्र ने नेट लगाया और खेतीबाड़ी संबंधी प्रशिक्षण दिया।

सिमरन ऑर्गेनिक फार्म की स्थापना

उन्होंने बताया कि 2009 में पंजाब एग्रो में रजिस्ट्रेशन के बाद 2012 में सर्टिफिकेट प्राप्त कर नेट हाउस में शिमला मिर्च, सीडलेस खीरा, टमाटर की खेती शुरू की। इसमें पेस्टिसाइड डालना पड़ता था, जिसे बंदकर 2012 में करीब साढ़े छह एकड़ में जैविक खेती अपनाई। उनका सिमरन ऑर्गेनिक फार्म है।

सब्जियों के साथ करते हैं पशुपालन

इसमें छह कनाल में गन्ना, बाकी जमीन में टमाटर, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, आलू, प्याज, तोरी, घीया, कद्दू, भिंडी, बैंगन, दालें, अल्सी, चना, मसूर, मक्का, गेहूं, हल्दी, मूंगफली, सरसों, मूंग, पपीता, आम, ड्रैगन फ्रूट, अनार, आड़ू की खेती शामिल है। वह एक एकड़ में गेहूं की तीन किस्मों सोनामोती, चपाती नंबर 1 व शरबती की बिजाई करते हैं। वह पशुपालन करते हैं।

साहीवाल गायें और अच्छी नस्ल की भैंसें रखी

उन्होंने साहीवाल गायें और अच्छी नस्ल की भैंसें रखी हैं, जिनके दूध से देसी घी, लस्सी, ताजा मक्खन तैयार कर बेचते हैं। वह अपने खेतों का साग घर में सिर्फ नमक डालकर तैयार कर बेचते हैं। वह गुड़ भी बनाते हैं। उन्होंने जैविक खाद संजीवनी तैयार की, जिसे सिंचाई के दौरान डाला जाता है, जिससे मित्र कीट पैदा होते हैं।

पहले घर-घर बेची, अब मंडियों में जाते हैं

उन्होंने बताया कि पहले वह अपने खाद्य पदार्थों को घर-घर बेचते थे। दो साल से पंजाब एग्रो ने राज्य भर में जैविक उत्पाद बेचने के लिए मंडियां स्थापित की। रोपड़ में ज्ञानी जैल सिंह नगर में रविवार सुबह 9 से 11 बजे तक, दो घंटे मंडी लगती है। इसमें वह भी अपने खाद्य उत्पाद बेचते हैं। उनको वर्ष 2023 में एग्रीकल्चर टुडे दिल्ली ने सम्मानित किया था।

संपर्क : 88726-56895



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